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पुरुषों के मुकाबले महिलाएं है ज्‍यादा प्रभावित

अनिद्रा की समस्‍या किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकती है, लेकिन समस्‍या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्‍यादा देखने को मिलती है, आइए जानें कैसे।

महिला स्‍वास्थ्‍य By Pooja SinhaFeb 22, 2016

पुरुषों के मुकाबले महिलाएं है ज्‍यादा प्रभावित

नींद न आना या नींद का बार-बार टूटना या गहरी नींद की कमी आदि अनिद्रा के लक्षण हैं। अनिद्रा की समस्‍या किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकती है, लेकिन समस्‍या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्‍यादा देखने को मिलती है। कई बार तो अनिद्रा की समस्‍या उम्र बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाती है। अनिद्रा के कारण आपको दिनभर सिर भारी रहना, उबासियां आना, किसी भी काम में मन न लगना आदि समस्‍याओं से गुजरना पड़ता है। साथ ही इससे आपको कई अन्‍य तरह की परेशानियां भी घेर लेती है। वैसे तो महिलाओं में अनिद्रा की समस्‍या तनाव, शारीरिक व मानसिक रोग, अनियमित जीवनशैली और डर आदि के कारण होती है लेकिन कुछ अन्‍य कारणों से भी महिलाओं में अनिद्रा की समस्‍या ज्‍यादा होती है। आइए जानें ऐसे की कुछ कारणों के बारे में इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से।

बढ़ती उम्र

यह तो हम जानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर के हार्मोन में बदलाव आने लगता है। इससे अक्सर गहरी नींद की कमी हो जाती है। कई बार मेनोपॉज के दिनों के आसपास भी महिलाएं कम सोती हैं, बार-बार रात में उठती है और सुबह खुद को स्वस्थ महसूस नहीं कर पातीं।

गर्भावस्था व मासिक धर्म

इस दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण ज्यादातर महिलाओं में अनिद्रा की समस्‍या देखने को मिलती है। कई बार मासिक धर्म से पहले भी महिलाओं में नींद न आने, नींद के बार-बार टूटने, डर लगने, उठने-बैठने में तकलीफ व दिन में नींद की झपकी आने की शिकायत देखी जाती है। इसी तरह गर्भावस्था के पहले तीन माह के दौरान महिलाएं जहां अधिक नींद की जरूरत महसूस करती हैं और उनमें दिन में सोने की इच्छा रहती है, वहीं अंतिम तीन महीनों में कई बार तनावग्रस्त होने से बार-बार पेशाब आना, छाती में जलन, दर्द, डर, बेचैनी, पैरों में दर्द आदि लक्षण आने के कारण ज्यादातर समय जागते हुए बीतता है और वे सुबह थका हुआ महसूस करती हैं।

आनुवांशिकता हैं मुख्य कारण

एक स्टडी के अनुसार नींद न आने की बीमारी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा होती है। इस स्टडी के मुताबिक, इसका कारण आनुवांशिक है। महिलाओं में अनिद्रा की आनुवांशिकता की संभावना 59 फीसदी, जबकि पुरुषों में 38 फीसदी होती है। अमेरिका के रिचमंड स्थित वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट कर रही और अध्ययन की लेखक मैकेंजी लिंड ने कहा, 'यह अध्ययन दर्शाता है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अनिद्रा के लक्षणों के विकास में जींस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो वयस्क के नमूने में लैंगिक असमानता के लिए पहला औपचारिक सबूत प्रदान कर रहा है।'

अनिद्रा से बचने के उपाय

अगर नींद न आने का कारण कोई शारीरिक या मानसिक परेशानी है तो सबसे पहले उसका उपचार करवाएं। सोते समय कमरे में अंधेरा या मंद रोशनी रखें। बिना किसी कारण के चिंता या भय मन में न आने दें। सोने से पहले हल्का भोजन करें व शराब, सिगरेट व कॉफी जैसे पदार्थो से पूरी तरह दूरी रखें।
Image Source : Getty

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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