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ये कारण जो लिव-इन को बनाते हैं शादी का विकल्प

करियर के चरम पर शादी और जिम्मेदारी के बिना मानसिक और शारीरिक जरूरतों को पूरा करने का इकलौता तरीका है लिव-इन। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि भारत में लिव-इन शादी का स्थाई विकल्प बन गया है किंतु ये शादी का एक अस्थाई विकल्प बनकर जरूर उभरा है।

डेटिंग टिप्स By Gayatree Verma Nov 16, 2016

लिव-इन रिलेशनशिप

लोग शादी क्यों करते हैं। शायद बच्चे, परिवार, प्यार, केयर और सेक्स के लिए...
लेकिन जब बच्चों (एक तरह की जिम्मोदारी) को छोड़कर ये चारों चीजें (सेक्स, परिवार, प्यार, केयर) बिना शादी और जिम्मेदारी के मिले तो गलत क्या है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी लिव-इन रिलेशन के समर्थन में बोलते हुए कहा कि जब दो युवा लोग साथ रहना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है?
आज ये सोच हर दूसरे युवा की है और काम व करियर बनाने की होड़ में ये जिम्मेदारी शायद ही कोई और युवा उठाना चाहता है, जिसके कारण लिव-इन रिलेशनशिप शादी का सबसे अच्छा विकल्प बन गया है। आइए जानें किन कारणों से लिव-इन शादी का विकल्प बनकर उभरा है।

मनचाहा जीवन और मनचाहा जीवनसाथी

आज अधिकतर यूथ अपने घरों से दूर शहरों में रहकर जॉब कर रहे हैं। ये यूथ अकेले रहते हैं। सुबह से शाम तक ऑफिस में रहते हैं। ऐसे में इन्हें ऐसे दोस्त की तलाश रहती है जो सहयोग करे लेकिन किसी भी तरह की पाबंदी ना लगाएं। जबकि शादी में एक तरह की पाबंदी लग जाती है फिर चाहे वो लव मैरिज हो या अरेंज। ऐसे में जब मनचाहे दोस्त के साथ मनचाहा जीवन जीने का मौका लिव-इन रिलेशनशिप दे रहा है तो शादी क्यों करे...? क्योंकि शादी तो करनी ही है फिर अभी से ऐसी पाबंदी क्यों?

जिम्मेदारी निभाना

शादी के बाद लड़के-लड़की, दोनों की जिंदगी में बदलाव आता है लेकिन सबसे अधिक बदलाव लड़कियों की जिंदगी में आता है। अगर कहें कि शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी में पहले की तुलना में लगभग 180 डिग्री का घुमाव आता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ऐसे में जब लड़कियां घर से बाहर निकल रही हैं तो वो सोचती हैं कि जब मौका मिला है तो करियर अच्छा बना ही लें। लेकिन करियर बनाने के दौरान जो अकेलापन आता है उससे उबरने के लिए एक साथी की जरूरत होती है जो केवल प्यार दे जिम्मेदरी नहीं। लिव-इन रिलेशनशिप यही प्यार लाता है वह भी बिना जिम्मेदारियां के।

आधा-आधा

शादी के बाद एक तरह से दो लोगों के भरण-पोषण (अगर परिवार है तो परिवार के भरण-पोषण की भी) की जिम्मेदारी आर्थिक तौर पर लड़के पर आ जाती है। जबकि लिव-इन में सबकुछ आधा-आधा होता है। और लड़कों को वैसे भी कोई शादी करने की जल्दी तो होती नहीं जिस कारण आज लड़के लिव-इन रिलेशनशिप को ज्यादा तवज्जो देते हैं। फाइनेंसिल सपोर्ट के साथ लिव-इन में सेक्सुअल सपोर्ट भी मिलता है जिस कारण यूथ (खासकर लड़के) लिव-इन की खुली तौर पर वकालत करते हैं।

सारी सुविधा मिलना

इसे इस तरह देखिये...
आप करियर के शीर्ष स्तर पर हैं, कोई जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन घर जाते हैं तो कोई प्यार करने वाला है, सुख-दुख बांटने वाला है...
किसे नहीं चाहिए ऐसी लाइफ?

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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