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युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है हुक्‍का पीने का चलन, जानें सेहत के लिए कितना खतरनाक है ये

एक शोध के अनुसार हुक्के का सेवन सिगरेट की तुलना में ज्यादा नुकसानदायक होता है। इस बारें में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।

तन मन By अतुल मोदी / Jan 18, 2016

सिगरेट से ज्यादा हानिकारक हुक्का

गांवों से शुरू हुआ हुक्‍का के चलन ने शहरों में नया रूप ले लिया है। एक समय था जब घर के बड़े-बुजुर्ग खाट पर बैठ पर हुक्‍का पीते थे, लेकिन जैसे-जैसे दौर बदला हुक्‍का भी मॉर्डन कल्‍चर में शामिल होता गया। आज महानगरों के मॉल्‍स में हुक्‍का पीने वाले युवाओं की तादात काफी देखने को मिलेगी, जहां नौजवान लड़के और लड़कियां धुएं का कश मारते दिख जाएंगे। इसमें अलग-अलग फ्लेवर्ड के हुक्‍का शामिल हैं। हुक्‍का को लेकर कई तरह के मिथ हैं। ज्‍यादातर लोगों को लगता है कि हुक्‍का हानिकारक नहीं होते। आज इन्‍हीं मिथ की सच्‍चाई हम आपको बता रहे हैं।  

कैंसर की संभावना

अमरीकन लंग एसोसिएशन (एएलए) ने हुक्का के हानिकारक पहलुओं पर पहली बार गहन शोध किया है। एएलए द्वारा इजारी रिपोर्ट के अनुसार,यह धारणा गलत है कि पानी से धुएं के गुजरने से प्रदूषक तत्व छन जाते हैं और फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता। एक शोधकर्ता ने कहा कि मुख, फेफड़ा और ब्लड कैंसर एवं हुक्का सेवन के बीच रिश्ते की पुष्टि हो चुकी है। हुक्का सिगरेट की तरह ही मुख, फेफड़ा और ब्लड कैंसर का वाहक है। इसके अलावा यह हृदय रोग और धमनियों में थक्के जमने की समस्या की भी वजह बन सकता है।

निकोटिन की मात्रा में बढ़ोत्तरी

40 से 50 मिनट तक हुक्का पीने से ही शरीर में निकोटिन की मात्रा में 250 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है। कई लोग इससे कहीं अधिक लम्बे समय तक हुक्का का सेवन करते हैं, जाहिर है कि उनके शरीर में निकोटिन की मात्रा इससे कहीं अधिक होती होगी। शरीर में इतना निकोटिन 100 सिगरेट के सेवन से पैदा होने वाले निकोटिन के बराबर है। इसके अलावा हुक्के में भरे जाने वाले चारकोल से कई तरह के खतरनाक रासायनिक तत्व पैदा होते हैं, जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। चारकोल के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ दूसरे जहरीले तत्व पैदा होते हैं।

हाथ-पैरों में दर्द और झंझनाहट

हुक्के की तम्बाकू में पाया जाने वाला एक हानिकारक पदार्थ निकोटिन होता है जो हुक्का पीने पर हमारे शरीर में प्रवेश करता हैं। यह हानिकारक पदार्थ निकोटिन हाथ-पैरों की खून की नलियों में धीरे-धीरे कमजोरी व सिकुड़न पैदा करना शुरू कर देता है। जब साफ खून सप्लाई करने वाली यह हाथ पैर की खून की नलियाँ जब निकोटिन के प्रभाव में आधे से यादा सिकुड़ जाती हैं तो हाथ पैरों को जाने वाली शुध्द साफ की सप्लाई गड़बड़ा जाती हैं, जिससे हाथ-पैरों के लिये आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा में भारी गिरावट आ जाती हैं।

डॉक्टर से सलाह

अगर हुक्केबाजों के हाथ व पैर की उंगुलियों में घाव उभर आए तो तुरन्त वैस्क्युलर सर्जन की निगरानी में इलाज़ करें। अब तक आप यह बात समझ गए होगें कि हुक्का पीना हमारे जीवन और हाथ-पैरों के लियें कितना घातक है, उसका हमेशा के लिए परित्याग कर दें। यह भी बात समझ लें कि हुक्के का सेवन कम कर देने से शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता इसको पूरी तरह से त्यागने से ही आप हुक्के से नुक्सान होने के ख़तरे से दूर हो पाऐगें।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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