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नाखुश होते हुए भी एक साथ क्‍यों रहते हैं कपल्‍स

अधिकतर लोगों के आपस में विचार ना मिलने के कारण उनकी मैरिड लाइफ स्ट्रेसफुल है इसके बावजूद वो अपनी शादी को बनाए रखना जरूरी समझते है। इन कारणों को जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।

डेटिंग टिप्स By Aditi Singh Jan 14, 2016

नाखुश पार्टनर का साथ

एक सर्वे के अनुसार लाखों ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं जो अपनी मैरिड लाइफ से खुश नहीं है लेकिन वे इमोशनल और फाइनेंशियल नुकसान के डर से ‌डिवोर्स नहीं ले पाते।सर्वे में ये भी देखा गया कि फाइनेंशियली कंडीशन खराब होने के कारण ही महिलाएं अपने पार्टनर से डिवोर्स नहीं लेना चाहती। वही पुरुष इसलिए डिवोर्स नहीं लेना चाहते क्योंकि इससे उनके परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आइये इस बारे में विस्तार से जाने
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मां-बाप की खातिर

शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों का रिश्ता भी होता है। इसलिए लोग कई बार अपनी टूटी हुई शादी को भी परिवार की खुशी की खातिर बनाए रखने में समझदारी मानते है। शादी में समझौतों को करना एक सामान्य बात है, इसलिए शादी को तोड़ना सामाजिक रूप से भी बहुत सराहा नहीं जाता है। अक्सर शादी के टूटने के बाद घरवालों पर निर्भरता बढ़ जाती है इसलिए भी उनके बिना सर्पोट के शादी को नहीं तोड़ा जाता है।
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बच्चों की खातिर

आप भले ही अपने पार्टनर के खुश ना हो पर बच्चों के लिए शादी में बने रहने में भलाई समझते है। आपकी टूटी शादी बच्चों पर बुरा असर डाल सकती है। बच्चों को अच्छा भविष्य देने के लिए मां-बाप दोनो की भूमिका जरूरी होती है। अपनी साथी से ना सहीं पर बच्चों से तो हर मां-बाप को प्यार होता है। हो सकता है रोज रोज की किचकिच आपको परेशान करती है पर कहीं ना कहीं एक दूसरे के लिए प्यार भी छिपा होता है। शायद आप उसे दर्शाने और समझाने में असफल हो जाते है।
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सामाजिक दायरों के चलते

समाज में कई लोगो का अपना एक व्यक्तित्व होता है जिसे बनाए रखने के लिए लोग तलाक देना पंसद नहीं करते है। तलाक कहीं ना कहीं आपकी छवि को भी प्रभावित करता है। सामाजिक छवि के साथ साथ तलाक की वजह से आर्थिक परेशानियां भी हो सकती है। कई लोग इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए अपने नाखुश पार्टनर को बर्दाश्त कर लेते है।
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अकेलेपन का डर

शादी दो लोगों का रिश्ता होती जैसे ही आप तलाक के बारें में सोचते है आप खुद को अकेला पाने लगते है। मनुष्यों की ये प्रवृत्ति होती है कि वो साथ रहते हुए भी अकेले जी सकते है पर अलग होने पर उन्हें अकेलापन ज्यादा खलने लगता है। और ये भी सहीं कि एक दूसरे पर निर्भरता कई बार इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि अलग होना अवसाद की कगार पर ला सकता है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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