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बच्‍चों को इसलिए नहीं देनी चाहिए सजा

कांच का एक ग्लास तोड़ देने पर अगर आप अपने बच्चे को सजा दे रहे हैं तो गलत है, आपकी इस सजा से बच्‍चे पर क्‍या असर पड़ता है, इस स्‍लाइडशो में हम आपको बता रहे है।

परवरिश के तरीके By Gayatree Verma Dec 01, 2015

बच्चों को सजा देना

कई बार बच्चा जब जिद पकड़ लेता है या बात नहीं सुनता तो अभिभावक उन्हें सजा देते हैं जो कि गलत है। इससे बच्चे और जिद्दी हो जाते हैं। क्या सजा ही एकमात्र तरीका है बच्चों को सुधारने का? ये सवाल खुद से पूछिए और अपने बच्चे को उनसे की गई गलती के लिए समझाइए कि ये गलत क्यों है। आपका एक थप्पड़ और सजा जिंदगी भर के लिए बच्चे को आपके खिलाफ कर सकता है।

दुर्भावना का जन्म

कोई भी इस दुनिया में जानबुझ कर गलती नहीं करता। फिर ये तो बच्चे हैं जिन्होंने अब तक चीजों को पूरी तरह समझा भी नहीं है। ऐसे में अगर आप बिना सोचे-समझे बच्चे को उसकी गलती के लिए थप्पड़ लगाती हैं तो उसके मन में आपके या खुद के प्रति दुर्भावना पैदा कर सकती है।

बच्चा कर सकता है नफरत

अगर हर बात को याद दिलाने और सबक सिखाने के लिए सजा का इस्तेमाल करते हैं तो आपका बच्चा आपसे नफरत करने लगेगा।

गलत के लिए तैयार

हर बात पर बच्चे को सबक देने पर कई बार बच्चे चिढ़ कर या जानबुझकर गलती दोहराने लगते हैं। साथ ही बच्चे अपने आपको सजा के लिए मानसिक रुप से तैयार भी कर लेते हैं। इससे बच्चे को सजा की ज्यादा चिंता नहीं होती। तब उनको आपको परेशान करने में ज्यादा मजा आने गता है।

फोबिया पैदा करना

ये कारण सबसे खतरनाक है क्योंकि बच्चा एक बार डर गया या उसमें किसी भी प्रकार फोबिया पैदा हो गया तो उसे वो जीवनभर के लिए दब्बु बना देगा। इससे बच्‍चों का मनोवैज्ञानिक विकास भी रुक जाएगा।

हीन भावना का कारण

कई बार सजा बच्चों को हीन भावना ग्रस्त कर देती है। बार-बार सजा पाने से बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है और वो खुद को किसी लायक नहीं समझते। इसलिए बच्चों को सजा देने के बजाय उन्हें समझाइए कि फलाना चीज क्यों गलत है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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