• shareIcon

गर्भावस्था के बारे में ये 10 बातें जो कोई नहीं बताता आपको

गर्भावस्था एक महिला के जीवन के सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण समय में से एक है, लेकिन कई महिलाएं मातृत्व के इस नौ महीने की इस यात्रा को बहुत कम जानते हुए शुरू करती हैं। ऐसी कई बातें है जिनका उल्‍लेख महिलाओं को तब होता है जब वह उनके साथ होती है।

गर्भावस्‍था By Pooja Sinha / Jan 14, 2015

गर्भावस्‍था में इन बातों को नहीं जानती आप

गर्भावस्था एक महिला के जीवन के सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण समय में से एक है, लेकिन कई महिलाएं मातृत्व के इस नौ महीने की इस यात्रा को बहुत कम जानते हुए शुरू करती हैं। इम्पीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के प्रोफेसर विवेत्ते ग्लोवर फ्रॉम के अनुसार गर्भधारण करने के बाद महिला का शरीर कई बदलावों से गुजरता है। महिला के शरीर में बदलाव हार्मोन में परिवर्तन के कारण होते हैं। लेकिन ऐसी कई बातें है जिनका उल्‍लेख महिलाओं को तब होता है जब वह उनके साथ होती है। आइए ऐसी ही कुछ बातों की जानकारी हम आपको देते हैं।
Image Courtesy : Getty Images

श्रोणि में दर्द

गर्भावस्‍था के दौरान एक महिला का शरीर जन्‍म देने के लिए तैयार होने के कारण कई सामान्‍य परिवर्तनों से गुजरना पड़ता है। इस दौरान रिलैक्सिन नामक हार्मोन के स्राव, स्‍नायुबंध, मसल्‍स और नसों को अधिक से अधिक लचीलापन देता है। इसके अलावा, रिलैक्सिन बच्‍चे के सिर को नीचा लाने के लिए एक महिला के श्रोणि पर्याप्त लचीला बनाता है। इस अतिरिक्‍त लचीलेपन के साथ मसल्‍स को खींचाव आसान होता है। कभी-कभी गर्भावस्था के अंतिम दिनों में, जोड़ महिला के श्रोणि के दो हिस्सों को एक साथ कसकर रखते हैं, बिल्‍कुल अलग होकर एसपीडी का कारण बनता है। इससे महिला के खड़े होने, घूमने और बैठे रहने पर श्रोणि और पीठ में दर्द होने लगता है।  
Image Courtesy : Getty Images

भावनात्‍मक बदलाव

प्रोफेसर ग्लोवर के अनुसार गर्भवती में अन्‍य महिलाओं की तुलना में चिंता और अवसाद के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं। इस दौरान किसी भी महिला में असामान्य भावनात्मक परिवर्तन होना सामान्य ही माना जाता है। हॉर्मोन्स में हो रहे बदलावों के चलते महिलाओं के स्वभाव में तो परिवर्तन आता ही है और वे अधिक गुस्सा करने लगती हैं। उनका स्वभाव चिड़चिड़ा और अजीब सा हो जाता है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, विशेष रूप से गर्भावस्‍‍था के पहले तीन महीनों में होने वाले बदलाव महिला के मन को प्रभावित कर उसे बीमार, थक हुआ और रुआंसा महसूस कराते हैं। लेकिन यह बदलाव बच्चे के स्वास्थ्‍य पर बुरा असर डाल सकता है।
Image Courtesy : Getty Images

मसूड़ों से खून बहना

कई बार गर्भवती महिलाओं को मसूड़े से खून आने की दिक्कत अधिक होती है। इसे प्रेग्नेंसी जिन्जवाइटिस भी कहते हैं। इसमें हार्मोनल बदलाव की वजह से मसूड़ों तक सही तरीके से ब्‍लड नहीं पहुंच पाने के कारण मसूड़े कमजोर होने लगते हैं और उनसे खून निकलता है। इसलिए महिलाओं को ब्रश करते समय या फ्लॉस करते समय आपके दांतों में से खून आता है तो आपको डेंटिस्‍ट के पास तुरन्‍त जाना चाहिए। साथ ही अपने दांतों की अच्‍छी तरह से देखभाल के लिए नियमित रूप से चेकअप के लिए अपने दंत चिकित्‍सक के पास जाये।
Image Courtesy : Getty Images

कब्ज

अधिकांश महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान कब्ज की शिकायत रहती है। हार्मोन्स में आए बदलाव के कारण शरीर की पाचन प्रक्रिया धीमी होने पर आंतों की शिथिल मांसपेशियां कब्ज पैदा करने लगती हैं। गर्भावस्था के आखिरी दो तिमाही में आंतों पर गर्भाशय का दबाव कब्ज पैदा कर देता है। इससे निजात पाने गर्भवती को अपने नियमित आहार में फाइबर (रेशेदार) युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल एवं सब्जियों व दालों का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में सेवन करना चाहिए। खूब पानी पिएं। कैफीन युक्त पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें, क्योंकि कैफीन से आपका शरीर नियमित रूप से मल त्यागने के लिए आवश्यक द्रवों को नष्ट कर देता है। इसके अलावा हल्के व्यायाम को शामिल करें।
Image Courtesy : Getty Images

बवासीर

लगभग 50 प्रतिशत गर्भवती में बवासीर की समस्‍या देखने को मिलती है- जिसमें मलाशय में सूजन और उभड़ी हुई नसों की समस्‍या, आमतौर पर प्रसव के बाद बेहतर हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय के विस्‍तार से मलाशय नसों पर अधिक दबाव पड़ने से बवासीर की समस्‍या होने लगती है। इस समस्‍या के चलते खुजली और खून बहने के साथ लंबे समय तक बैठने पर असहज महसूस होता है।  
Image Courtesy : Getty Images

बालों के टेक्सचर में बदलाव

गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के बालों की ग्रोथ के साथ-साथ उनके टेक्सचर में भी काफी बदलाव दिखता हैं। यह सब गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं मे आए हॉर्मोनल बदलाव के कारण होता है, इसको एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन प्रभावित करता है। जिसके बढ़ने से बाल अधिक घने और चमकदार होने लगते हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद ये साइकल सामान्य हो जाते हैं। लेकिन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को हेयर फॉल की शिकायत रहती है। क्योंकि ऐसे मे पहले ही बढ़े हुए बालों का बढ़ना रुक जाता है और वह सब एक साथ गिरने लगते हैं।
Image Courtesy : Getty Images

सुनाई कम देना

गर्भावस्था हार्मोन कभी-कभी अस्थायी सुनवाई हानि या टिनिटस (कान में घंटी जैसा बजना) का कारण भी बनता है। कुछ गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से एलर्जी से ग्रस्त महिलाओं में साइनस की समस्‍या अधिक देखने को मिलती है। भीतरी कान में तरल पदार्थ के साथ नम और संचार प्रणाली के साथ जुड़े होने के कारण, गर्भावस्‍था में रक्‍त की मात्रा के बढ़ने पर महिलाओं के कंबुकर्णी नली को प्रभावित कर, कान के अवरूद्ध होने की भावना पैदा करता है। चाहे आप गर्भवती है या नहीं, लेकिन ठंड जैसे वायरस के पकड़ने पर समस्‍या दूर होने तक अस्‍थायी रूप से आपको कम सुनाई देता है।  
Image Courtesy : Getty Images

भूलने की प्रवृत्ति

गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में बहुत सारे बदलाव आते हैं जिसके चलते बहुत बार तकलीफ भी होती हैं। गर्भावस्था के समय महिला की आदतों में बहुत सारी चीजे देखने को मिलती हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सिर दर्द, कमर दर्द और चि़डचि़डापन जैसी बातें देखने को मिलती हैं जिसके चलते महिलाओं की स्मरण शक्ति भी कमजोर हो जाती हैं और उनमें भूलने की आदत पड जाती हैं। गर्भावस्था हार्मोन आपको काफी भुलक्कड़ बना देते हैं। इसलिए एक डायरी में महत्‍वपूर्ण तारीखों को उसमें लिखें और उसे अपने पास हमेशा रखें।

नकसीर

रक्‍त की मात्रा और गर्भावस्‍था हार्मोंन नाक के ऊतकों को प्रभावित कर नकसीर की समस्‍या का कारण बनते हैं। यह काम के दौरान यात्रा या मीटिंग के विशेष रूप से असुविधाजनक हो सकता है। अपनी नाक को धीरे से ब्‍लो करने या अधिक पानी पीना इस समस्‍या में आपकी मदद कर सकता है। रक्तस्राव को रोकने के लिए कुछ मिनट के लिए अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच अपनी नाक दबाओ। और खून के पांच मिनट तक बंद न होने की स्थिति में डॉक्‍टर से संपर्क करें।
Image Courtesy : Getty Images

स्तनों से रिसाव

गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के स्‍तनों से स्‍तनपान के लिए तैयार होने के कारण आकार, परिपूर्णता और कोमलता में वृद्धि होनी लगती है। कुछ महिलाओं के स्तनों कोलोस्ट्रम आने लगता है। कोलोस्‍ट्रम बच्चों के लिए उत्पादित दूध का पहला रिसाव है। यह एंटीबॉडी युक्त एक मोटी पीले रंग का तरल पदार्थ संक्रमण से नवजात शिशुओं की सुरक्षा करता है। प्रसूति ब्रा पहनने से अच्‍छा समर्थन मिलता है और पैड पहनने से संभावित शर्मनाक लीकेज को अवशोषित में मदद मिलती है।
Image Courtesy : Getty Images

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK