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अपनी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के तरीके

हर इंसान में कोई न कोई खास बात होती है, और वह भीतर से रचनात्मक भी होता है, बस ज़रूरत होती है, इस रचनात्मकता को पहचान कर उसे प्रोत्साहित करने की।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Nov 07, 2014

रचनात्मकता को दें प्रोत्साहन

हर इंसान में कोई न कोई खास बात होती है, वह भीतर से रचनात्मक होता है। बस ज़रूरत होती है, इस रचनात्मकता को पहचान कर उसे प्रोत्साहित करने की। कई बार एक बेकार का डर हमें अपनी क्षमताओं का प्रदर्षन करने से रोकता है। हम बिना जानें ही यह खुद ही तय कर लेते हैं कि हम में वो बात नहीं। या हम रचनात्मक नहीं। लेकिन यह गलत है। हर व्यक्ति रचनात्मक है, बस आप अपनी रचनात्कता को पहचान नहीं पाए हैं। तो चलिये जानें कि अपनी रचनात्मकता को प्रोत्साहित कैसे किया जाए।   
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रचनात्मकता की सराहना करना सीखें

अपनी रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि आप अनूठा या नया सोचने वाले लोगों की सराहना करें, उन्हें शाबाशी दें। हर उस सोच या काम के लिए बधाई दें जो अनूठा या नया हो। जब आप अपने आसपास देखेंगे तो ऐसे कई लोग और चीज़ें नजर आएंगे, जिसमें आपको रचनात्मकता नज़र आएगी। उनकी सराहना करें और सीखने का प्रयास करें। एक बार जब आप दूसरों की रचनात्मकता को दिल से सराहना शुरू करेंगे तो खुद को ऐसे रास्ते पर पाएंगे जो अनूठी सोच की तरफ जाता है।
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क्या सोचें से बेहतर है, कैसे सोचें

सृजनात्मक व्यक्ति जानते हैं कि कैसे सोचें, न कि क्या सोचें। अगर आप सच में अधिक सृजनात्मक बनना चाहते हैं तो आपको व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में ज्यादा रचनात्मक बनना पड़ेगा। भले ही आप अल्बर्ट आइंस्टीन जितने क्रिएटिव न बन पाएं, लेकिन आप उस व्यक्ति से ज्यादा क्रिएटिव बन जाएंगे जो कैसे सोचें की बजाय क्या सोचें पर ज्यादा जोर देता है।
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एक्पर्ट बनें

क्रिएटिव बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम यह है, कि आप अपने कार्य क्षेत्र में एक्सपर्ट बनें। अपने काम को इतनी शिद्द्त के साथ सीखें व करें की आपका उसमें कोई आपका हाथ न पकड़ पाए। इस प्रकार आप अपने कार्य क्षेत्र में अधिक रचनात्मक हो पाएंगे।
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अपनी जिज्ञासा को पुरस्कृत करें

आपकी जिज्ञासा आपके भीतर की रचनात्मकता की जननी साबित होती है। इसलिए अपने भीतर की जिज्ञासा को मारें नहीं, बल्कि इसे पुरस्कृत करें। अपने आप को नए विषयों के  बारे में जानने के अवसर देते रहें और जिज्ञासा को जीवित रखें।
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अपने भीतर के बच्चे को जीवित रखें

देखा जाए तो हम बड़े होकर भी अशिक्षित हैं और यह भूल जाते हैं कि चीजों को प्रोफिट लॉस से जुदा एक अलग नज़रिए से भी देखा जा सकता है। हमें सीखना होगा कि कैसे बच्चों की तरह सोचा जा सकता है। स्पेन के प्रसिद्ध पेंटर पाब्लो पिकासो ने एक बार कहा था, ‘हर बच्चा एक कलाकार है। बस समस्या यह है कि बड़े होने के बाद हम कलाकार नहीं रह जाते।' तो अपने भीतर के बच्चे को ज़िन्दा रखें।
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रचनात्मक सोच के स्वरूप को हासिल करें

सोच के एक दायरे के भीतर सीमित न करें। कल्पनाओं को पंख फैलाकर उड़ान भरने दें। अपने को एक निष्क्रिय उद्देश्य समझने की बजाय सक्रिय विषय समझें। यदि आप य़कीन करते हैं, तो आप जो करना चाहें वो कर सकते हैं। लेकिन अगर आप अपनी सोच के दायरे को सीमित रखेंगे, तो आपके आसपास का वातावरण भी आपको वैसा ही बनाता जाएगा।  
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रचनात्मक व्यक्ति जैसा अभिनय

अगर एक बार आपने अपने को रचनात्मक व्यक्ति की तरह से देखना शुरू कर देंगे, तो आप यह यकीन करना भी शुरू कर देंगे कि आप भी  रचनात्मक हैं। तब आप बहुत आगे निकल जाएंगे। यदि आप किसी रचनात्मक व्यक्ति को देखते हुए आगे बढ़ रहे हैं तो ये काबिलियत आपके अंदर भी आ जाएंगी।
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सकारात्मक बनें

सकारात्मकता और रचनात्मक का बहुत गहरा संबंध है। रचनात्मक व्यक्ति को ऐसी सकारात्मक सोच वाला होना चाहिए कि, कैसे चीजों को अलग एक नए नज़रिए से देखा और किया जा सकता है। किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए उसके पास खुद का एक अपना समाधान होना चाहिए।  
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