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जानें क्रिएटिनिन के बढ़े हुए लेवल को कैसे कम करें

क्रिएटिनिन का बड़ा हुआ स्‍तर किडनी सम्बंधित बीमारी या समस्याओं की ओर इशारा करता है। लेकिन घबराइये नहीं क्‍योंकि आहार में परिवर्तन, जीवन शैली में कुछ बदलाव, दवाओं के सेवन आदि से क्रिएटिनिन लेवल को कम किया जा सकता है।

अन्य़ बीमारियां By Pooja Sinha / Aug 09, 2016

क्रिएटिनिन के बढ़े स्‍तर को कम करने के उपाय

क्रियेटिन एक मेटाबॉलिक पदार्थ है, जो आहार को एनर्जी में बदलने के लिये सहायता देते समय टूट कर क्रिएटिनिन (एक वेस्ट पदार्थ होता है) में बदल जाता है। वैसे तो किडनी क्रिएटिनिन को छानकर ब्‍लड से बाहर निकाल देती है, उसके बाद यह वेस्ट पदार्थ यूरीन के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन कुछ स्वास्थ्य सम्बंधित समस्यायें किडनी के इस कार्य में बाधा पहुंचाती हैं, जिसके कारण क्रिएटिनिन बाहर नहीं निकल पाता है और ब्‍लड में इसका स्तर बढ़ने लगता है। क्रिएटिनिन का बड़ा हुआ स्‍तर किडनी सम्बंधित बीमारी या समस्याओं की ओर इशारा करता है। लेकिन घबराइये नहीं क्‍योंकि आहार में परिवर्तन, जीवन शैली में कुछ बदलाव, दवाओं के सेवन आदि से क्रिएटिनिन लेवल को कम किया जा सकता है।

प्रोटीन की ज्‍यादा मात्रा से बचें

यूं तो शरीर में पर्याप्‍त एनर्जी का स्‍तर बनाये रखने के लिए और शारीरिक क्रियाओं के लिये आहार में प्रोटीन का होना अत्‍यंत आवश्‍यक है। इसलिये अपने आहार में से प्रोटीन को एकदम से खत्म न करें। लेकिन आहार के माध्यम से प्राप्त होने वाला क्रिएटिनिन, आमतौर से एनिमल प्रोडक्ट्स से प्राप्त होता है। वैसे तो इनसे प्राप्त होने वाली मात्रा हानिकारक नहीं होती है परंतु यह उन लोगों के लिये समस्या बन सकता है जिनका क्रिएटिनिन लेवल पहले से ही बढ़ा हुआ है। इसलिए उन खाद्य पदर्थों से परहेज करें जिनमें प्रोटीन ज्यादा मात्रा में उपलब्ध होता है जैसे रेड मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स आपके लिये विशेष रूप से हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक स्रोतों जैसे नट्स तथा दालों से इसे प्राप्त किया जा सकता है।

नियंत्रित मात्रा में लें सोडियम

अधिक मात्रा में सोडियम लेने से शरीर में फ्लूड और स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाले स्तर तक एकत्रित करने लगता है, जिससे हाई बीपी की समस्‍या होने लगती है। इन दोनों कारणों से क्रिएटिनिन लेवल बढ़ सकता है। इसलिए कम सोडियम वाला आहार लें। जिन खाद्य पदार्थों और पेय में नमक ज्यादा हो जैसे प्रोसेस्ड फूड उनसे दूर रहें और उनके स्थान पर उपलब्‍ध कम सोडियम युक्त प्राकृतिक आहार लें।

ब्‍लड प्रेशर की दवाओं से नियंत्रित करें

डायबिटीज के अलावा हाई ब्‍लड प्रेशर भी किडनी को नुकसान पहुंचाने वाला एक अन्य कारण है। ब्‍लड प्रेशर को नियंत्रित रखने से किडनी को और नुकसान नहीं होता है और इस तरह क्रिएटिनिन के लेवल को कम करने में भी मदद मिलती है।

भरपूर नींद लें

नींद के दौरान बहुत से शारीरिक कार्य कम या धीमे पड़ जाते हैं। इसमे शरीर की मेटाबॉलिक क्रियायें भी शामिल हैं। परिणामस्वरूप, क्रिएटिनिन में परिवर्तन की गति धीमी हो जाती है जिससे ब्‍लड में पहले से उपस्थित क्रिएटिनिन, नये क्रिएटिनिन के एकत्रित होने से पहले ज्यादा मात्रा में फिल्टर होकर बाहर निकल जाता है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की पर्याप्‍त नींद लें।

हर्बल टी और नेटल लीफ

  • माना जाता है कि कुछ खास तरह की हर्बल चाय ब्‍लड में उपस्थित क्रिएटिनिन की मात्रा को कम करती है। हर्बल चाय किडनी को अधिक मूत्र उत्पादन के लिये प्रोत्साहित करती हैं। इस तरह, अधिक मात्रा मे क्रिएटिनिन शरीर के बाहर निकल जाता है। इसलिए बढ़े हुए क्रिएटिनिन के स्‍तर को कम करने के लिए नियमित रूप से हर्बल टी लें।
  • नेटल लीफ भी मूत्र निष्कासन को बढाकर अतिरिक्त क्रिएटिनिन को भी बाहर निकालने में मदद करते हैं। नेटल में हिस्टामिन तथा फ्लेवोनॉयड्स नामक तत्‍व होते हैं जो किडनी में पहुंचकर ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं। इससे यूरीन फिल्ट्रेशन बढ़ जाता है। नेटल लीफ को आप सप्लीमेण्ट्स के रूप में या चाय बनाकर पी सकते हैं।

Image Source : Getty

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