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जलन और ईर्ष्याभाव से बचने 7 तरीके

जलन और ईर्ष्‍या होना एक सामान्‍य बात है, लेकिन इसे दिल पर लेने की बजाय इन आसान तरीकों से इससे बचा जा सकता है, इन तरीकों को जानें और द्वेष की जगह प्‍यार फैलायें।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Meera Roy / Nov 23, 2015

जलन और ईर्ष्‍या की भावना

जलन या ईर्ष्याभाव प्राकृतिक है। लेकिन कभी कभी यह समस्या का रूप इख्तियार कर लेती है। ऐसा तब होता है जब जलन या ईर्ष्याभाव अन्य भावनाओं पर हावी होने लगती है। इसके चलते हम ज्यादा गुस्सैल, चिड़चिड़े, डरे हुए, कड़वाहट से भर जाना आदि नकारात्मक भावनाओं से भर जाते हैं। ऐसा अकसर तब होता है जब हम दूसरे से अपनी तुलना करते हैं। जलन और ईर्ष्याभाव पर काबू पाने के लिए हम निम्न तरीकों को अपना सकते हैं-

भावनाओं के प्रति सचेत होना

हालांकि जलन या ईर्ष्या प्राकृतिक भाव है; लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसकी अनदेखी की जाए। जलन या ईर्ष्या भाव पर काबू पाना हो तो अपनी नकारात्मक और सकारात्मक भावनाओं को समझना होगा। अकसर जलन से भरे लोग अपनी नकारात्मक भावनाओं को समझना नहीं चाहते। नतीजतन समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। जैसे ही अपनी भावनाओं के प्रति सचेत होने लगेंगे, यह समस्या कम होने लगेगी। बावजूद इसके यदि समस्या कम न हो तो मेडिटेशन करें यानी ध्यान लगाएं। इससे गुस्से पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है।

ईर्ष्या करने की बजाय उसे स्वीकारो

सवाल है ईर्ष्या क्यों है? क्या आपका दोस्त आपसे ज्यादा रहीस है, इसलिए जलन है? क्या वह आपसे बेहतर पढ़ता है, इसलिए जलन है? जलन की कोई भी वजह हो सकती है। बेहतर यही है कि ईर्ष्या की वजह जानने की कोशिश करें, उसे स्वीकार करें। अंततः खुद को वैसा बनाएं जैसा आप बनना चाहते हैं।

तुलना और प्रतिस्पर्धा के बीच फर्क समझें

हम अकसर तुलना और प्रतिस्पर्धा के बीच फर्क नहीं कर पाते। जबकि इन दोनों के बीच बहुत बड़ा फर्क मौजूद है। प्रतिस्पर्धा करने में अकसर हमें मजा आता है। अपने प्रतिस्पर्धी को पछाड़ने से जीत का भाव होता है। लेकिन तुलना करने से जीत हासिल नहीं होती अपितु हमेशा ईर्ष्या भाव से घिरे रहते हैं। यही नहीं तुलना करने से हमेशा खुद को कमतर पाते हैं। कमतरी भाव हमें दूसरों से पछाड़ने में बड़ा रोल अदा करती है। जिन लोगों से आपको जलन होती है, उनसे प्रेरणा हासिल करें और अपने जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश करें।

दूसरों की मदद लें

जो लोग आपके दोस्त हैं, आपके प्रियजन हैं, इस संदर्भ में उनकी मदद ली जा सकती है। वास्तव में जो आपको करीब से जानते हैं, वही लोग आपको जलन और ईर्ष्याभाव से निकलने में मदद भी कर सकते हैं। जलन अकसर दिल में खालीपन के चलते भी होता है। यदि आप अकेलेपन के कारण दूसरों से जलन या ईर्ष्याभाव रखते हैं तो दोस्तों की मदद लेना बेहतरीन उपाय है।

अपनी खासियतें गिनें

अमन के पास आई फोन 6 है जबकि दीपक के पास नहीं है। यही कारण है कि दीपक अमन को नापसंद करता है। यही नहीं आई फोन 6 खरीदने के लिए उसने अपने पिता पर अतिरिक्त दबाव भी डाल रखा है। लेकिन दीपक को यह नहीं पता कि अमन भी उससे जलता है क्योंकि दीपक स्पोर्ट्स में बहुत अच्छा है। अमन चाहकर भी उसे पछाड़ नहीं पा रहा। असल में हम दूसरों के पास क्या है, यही जानकर परेशान रहते हैं। कभी यह नहीं सोचते कि हमारे पास क्या है जो दूसरों के पास नहीं है। अपनी खासियत और खूबियों को गिनें, जलन भाव से बचने का यह सबसे आसान उपाय है।

चलो जाने भी दो

चीजों की अनदेखी करना बहुत अच्छा होत है। ‘चलो जाने भी दो’ जैसे भाव आपको खुश रख सकते हैं। मनमौजी बना सकते हैं। यही नहीं ‘चलो जाने भी दो’ के भाव से दूसरे आपसे ईर्ष्या से भर सकते हैं। असल में इस तरह की सोच वही रख सकता है जिसे दूसरों की चीजों से फर्क नहीं पड़ता। ऐसा आप शारीरिक एक्सरसाइज, ध्यान, हाबी आदि से भी कर सकते हैं।

प्यार है उपचार

अंततः किसी भी समस्या का उपचार प्यार होता है। जिससे आप जलते हैं, उससे प्यार करना सीखें। इसके बाद ही आप समझ पाएंगे कि जलन भाव सिर्फ तकलीफ देती है जबकि प्यार करने से समस्याओं का अंत हो जाता है। यहां तक कि आप जलन और ईर्ष्या भाव पर भी जीत हासिल कर लेते हैं। यह बात हमेशा ज़हन में रखें कि इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है। कुछ कमी आपमें है तो कुछ दूसरों में भी है। दूसरों की खूबियों से प्यार करें। उनसे प्रेरित हों और कुछ सीखने की कोशिश करें।

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