Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

इन तरीकों से बच्‍चों को सिखायें प्रकृति के साथ जीना

प्रकृति के साथ पलना-बढ़ना शायद बीते जमाने की बात हो चुकी है, लेकिन इन बातों का ध्‍यान रख बच्‍चों को प्रकृति के करीब ला सकते हैं, आइए हम बताते हैं बच्‍चों को प्रकृति के साथ जीना कैसे सिखायें।

परवरिश के तरीके By Gayatree Verma Oct 14, 2015

बच्‍चे और प्रकृति

अब टीवी बंद करने और अपने चिंटू-मिंटू के हाथ से स्मार्टफोन लेने का वक्त आ गया है। आज बच्चों के बेस्ट फ्रैंड उनके फोन बन गए हैं जो कि उनके शरीर और दिमाग पर गहरा असर डाल रहे हैं। इन स्मार्टफोन और टीवी व अन्य तकनीकों की वजह से बच्चे प्रकृति से दूर जा रहे हैं। इससे समय से पहले ही बच्‍चों में कई तरह की बीमारी देखी जा सकती है। प्रकृति के करीब रहना मतलब बीमारियों से दूर रहना। अगर आप अपने बच्‍चों को प्रकृति के करीब ले जायेंगे तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ रहेंगे। आइए हम आपको बताते हैं कि अपने बच्‍चों को प्रकृति के साथ जीना सिखायें।

वॉक है जरूरी

सुबह और शाम को छह बजे अपने बच्चों के साथ एक लॉन्ग वॉक पर निकलें। अगर पार्क या सुनसान रास्तों को, जहां सड़क किनारे में पेड़ लगे हैं, चुनते हैं तो ज्यादा बेहतर होगा। इससे आप लोगों को प्रकृति के करीब जाने का मौका मिलेगा और आपको स्वच्छ ऑक्सीजन मिलेगी। सुबह और शाम की यह लॉन्ग वॉक आपके माइंड को रिफ्रेश करने में मदद करेगी।

खेतों में जाएं

अभी वह समय है जब सारे फसल पक गए हैं और नई-नई सब्जियों से खेत लद गए हैं। खेत के ये दृश्य देखने में ही काफी मनोरम लगते हैं जो आंखों और दिमाग को बहुत सुकुन पहुंचाएंगे। तो देर न करें और अपने बच्चों को पास के ही फार्म में ले जाएं। बच्चों को भी प्रकृति की अहमियत पता चल जाएगी।

सूखे पत्तों पर कूदें

याद है, बचपन में पतझड़ के मौसम में जो पत्ते झड़ते थे उसको एक जगह इकट्ठा कर आप उस पर कूदा करते थे। अब फिर से यही चीज करिए। लेकिन इस बार अपने बच्चों के साथ करिए और खुद भी एक बार बच्चा बन जाइए। बच्चों को पत्तों के इस गट्ठर पर कूदना और आपका ये नया रुप दोनों अच्छा लगेगा।

पेड़ों पर चढ़ना सिखायें

आज के अधिकतर बच्चे शायद ही कभी पेड़ पर चढ़े होंगे। ऐसे में उन्हें पेड़ पर चढ़ाइए। प्लीज गिरने का डर मत रखिये। क्या आप पहली बार पेड़ पर चढ़े थे तो गिरे थे? और अगर गिरे भी थे तो कितनी चोट लगी थी? चोट लगना अच्छी बात है औऱ वो तुरंत ठीक हो जाएगी। इसलिए पेड़ों पर खुद भी चढ़े और बच्चों को भी चढ़ाएं।

पिकनिक पर जाएं

ठंड आ रही है और इससे पहले की कड़ाके की ठंड आ जाए, उससे पहले बच्चों को लेकर पास के ही जंगल (जो सुरक्षित हो और जहां लोग जाते हो) में पिकनिक मनाने चले जाए। वहां हर काम का बंटवारा करे। एक जरूरी बात कि अपने बच्चों के फोन और विडियोगेम घर पर ही रख दें और गुल्ली डंडा खेलने के लिए रख लें।

तारे गिनना

मौसम का बदलाव रात के अंधेरे में भी बदलाव लाता है। हर मौसम की रातें अलग-अलग होती हैं जिसके बारे में शायद ही बच्चों को पता हो। ऐसे में बच्चों को आकाश में रात में आ रहे बदलावों के बारे में पढ़ाएं और साथ ही रात को छत में जाकर इसका प्रेक्टिकल भी कर के दिखाएं। गर्मी की रात, सर्दी की रातों से अलग होती हैं। सर्दी की रातों में आसमान साफ नजर आता है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK