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महिला की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले 7 तथ्‍य

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार भारत में करीब 1.90 करोड़ दंपत्ति इनफरटाइल यानी नपुंसकता के शिकार हैं, बांझपन मूलरूप से गर्भणारण करने में असमर्थता है, इसको प्रभावित करने वाले ये कारक हो सकते हैं।

गर्भावस्‍था By Aditi Singh Jun 06, 2015

महिलाओं मे बांझपन

ब्रिटेन के यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्‍शन एंड एंब्रयोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार शिफ्ट में काम करने, धूम्रपान करने, देर से शादी करने व जरूरत से ज्‍यादा वर्क लोड व तनाव लेने वाली महिलाओं में 33 प्रतिशत महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म की समस्‍या हो जाती है और उन 33 फीसदी में से 80 फीसदी को कंसीव करने में बेहद समस्‍या आती है। जरूरत से ज्‍यादा स्‍ट्रेस लेने वाली महिलाओं में हार्मोनल चेंज होते हैं, उस वजह से भी बांझपन की शिकार होने का खतरा उनमें रहता है।
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मिलावटी रसायन

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 18 फीसदी दंपत्ति शादी की उम्र में ही नपुंसक्‍ता और बांझपन का शिकार हो जाते हैं। इसके पीछे तेजी से हो रहे शहरीकरण, मिलावट की वजह से तमाम रासायनों का शरीर में जाना, तनाव, जरूरत से ज्‍यादा काम, तेज़ लाइफस्‍टाइल और देर से शादी होना बड़े कारण हैं। कैनडा में दो शोध किये गये पहला 1984 में और दूसरा 2010 में। 1984 में 18 से 29 साल की उम्र में 5 फीसदी कपल इनफर्टाइल पाये गये, वहीं 2010 में यह संख्‍या बढ़कर 13.7 फीसदी हो गई।
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अनियमित मासिक धर्म

अनियमित मासिक धर्म यदि किसी स्‍त्री को शादी के पहले से ही या कभी भी अनियमित मासिक धर्म यानी इररेग्‍युलर मेंस्‍ट्युरेशन की समस्‍या है तो वह सावधान हो जायें, क्‍योंकि आगे चलकर यह समस्‍या गर्भाशय में संक्रमण का कारण बन जाती है। गर्भाशय में संक्रमण के कारण कंसीव करने में समस्‍या आती है।
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जरूरत से ज्‍यादा मेकअप

जरूरत से ज्‍यादा मेकअप बढ़ाता है बांझपन यूएस हेल्‍थ एंड न्‍यूट्रीशन सर्वे की रिपोर्ट में पाया गया कि जिन महिलाओं ने जरूरत से ज्‍यादा मेकअप किया वह भी बांझपन का शिकार हुईं। इसके पीछे चिकित्‍सीय कारण वो केमिकल बताये गये जो आम तौर पर क्रीम-पॉवडर में इस्‍तेमाल किये जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ कंपनियां गोरा बनाने व स्किन निखारने वाली क्रीम में ऐसे केमिकल इस्‍तेमाल किये जाते हैं, जो थॉयरॉइड की समस्‍या पैदा कर देते हैं। और जिन महिलाओं को थॉयराइड होता है, उन्‍हें कंसीव करने में काफी दिक्‍कत आती है। यह रिपोर्ट 2010 में आयी थी।
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मोटापा

मोटापा महिलाओं के मां बनने के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा खड़ी कर रहा है। मोटी महिलाएं पहले तो बड़ी मुश्किल से गर्भवती हो पाती हैं। गर्भ ठहर भी गया तो कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि गर्भ धारण करने के बाद भी चर्बी न चढ़ जाए। मोटापा गर्भवती की जान भी ले सकता है। पेट में पल रहे बच्चे को भी हानि पहुंचाता है।महिलाओं में जरूरत से अधिक मोटापा और मधुमेह भी उन्‍हें प्रेगनेंट होने से रोकता है।
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बढ़ती उम्र

उम्र के साथ कम होती है प्रेगनेंट होने की संभावना इंडियन मेडिकल एंड रिसर्च काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में उम्र के साथ-साथ प्रेगनेंट होने की संभावना भी कम होती जाती है। 35 से नीचे यह दर 47.6 प्रतिशत होती है, वहीं 35 से 37 साल की उम्र में 38.9 फीसदी, 38 से 40 साल की उम्र में 30.1 और 41 से 42 साल की उम्र में 20.5 फीसदी महिलाएं ही प्रेगनेंट हो पाती हैं।

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धूम्रपान और शराब का सेवन

जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं या शराब का सेवन करती हैं उन्‍हें कंसीव करने में दिक्‍कत आती है। अक्‍सर देखा गया है कि ऐसी महिलाएं अगर कंसीव भी कर लें तो आगे चलकर मिसकैरेज हो जाता है। शराब के सेवन केकारण महिलाओं में फीटल अल्‍कोहल सिंड्रोम बीमारी हो जाती है, जिसकी वजह से महिलाओं के गर्भाशय में अंडे बनने बंद हो जाते हैं।
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असंतुलित आहार और जीवनशैली

डाइटिंग किसी महिला को प्रेगनेंट होने के लिए प्रॉपर डाइट जरूरी है। जो महिलाएं ठीक से आहार नहीं लेती हैं या फिर फिगर मेनटेन करने के लिये डाइटिंग करती हैं, उनमें आगे चलकर कंसीव होने में समस्‍या आती है। जो महिलाएं नाइट शिफ्ट या समय-समय पर अलग-अलग शिफ्ट में काम करती हैं, उनमें मासिक धर्म अनियमित हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं को कंसीव करने में दिक्‍कत आती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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