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इन गंभीर बीमारियों से बच्‍चों को बचायेंगे ये टीके

छः गंभीर जानलेवा संक्रामक बीमारियों जैसे खसरा, टेटनस, पोलियो, क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी तथा हेपेटाईटिस "B" से बचाव के लिए अपने बच्‍चों को सही समय पर टीके जरूर लगवाने चाहिये।

परवरिश के तरीके By Rahul SharmaMar 13, 2015

बच्‍चों को बीमारियों से बचाने के टीके

बच्‍चों के शरीर मे रोग प्रतिरक्षण के लिये टीके लगवाना बेहद जरूरी होता है, जिससे बच्‍चों के शरीर की रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। टीकाकरण से बच्‍चों मे कई सक्रांमक बीमारियों की भी रोकथाम होती है। छः गंभीर जानलेवा संक्रामक बीमारियों जैसे खसरा, टेटनस, पोलियो, क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी तथा हेपेटाईटिस "B" से बचाव के लिए अपने बच्‍चों को सही समय पर टीके जरूर लगवाने चाहिये। वहीं गर्भवती महिलाओं को भी टेटनस के टीके लगाकर उन्‍हें व नवजात शिशुओं को टेटनस से बचाया जाता है। तो चलिये जानें कि गंभीर बीमारियों से बच्‍चों को बचाने के लिये कौंन से टीके कब-कब लगवाएं।
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गर्भावस्‍था में जितनी जल्‍दी हो सके

गर्भव‍ती महिला एंव गर्भ मे पल रहे शिशु को टिटेनस की बीमारी से बचाने के लियेटिटेनसटाक्‍साइड 1 / बूस्‍टर टीका द्वितीय टीका एक महिने के अंतर पर लगवाएं। लेकिन यदि पिछले तीन वर्ष मे दो टीके लगे हों तो केवल एक टीका लगवा लेना ही काफी होता है।
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पोलियो वेक्सीन

पोलियो वेक्सीन अर्थात पोलियो का टीका पोलियो नामक बीमारी (जिसमें बच्चे अपंग हो जाते हैं) से सुरक्षा प्रदान करता है। ये टीका भी बच्चों को अनिवार्य रूप से दिया जाता है।
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बी.सी.जी

बच्‍चे को टी.बी से प्रतिरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से बी सी जी का टीका दिया जाता है। बी.सी.जी. का टीका लग जाने पर यह शिशु को टी.बी की बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है।
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हिपेटाइटिस बी

हीपेटाटिस बी वायरस के संक्रमण से लीवर की सूजन आ जाती है, पीलिया हो जाता है व लंबे समय तक संक्रमण के बाद लीवर कैंसर का भी खतरा हो सकता है। हिपेटाइटिस बी का यह टीका हिपेटाइटिस बी के संक्रमण से बचाव करता है।
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डी.पी.टी.

डीपीटी (डीटीपी और DTwP) संयोजित टीकों की एक श्रेणी होती है, जो इंसानो को होने वाले तीन संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए दिए जाते हैं। यह टीका डिप्थीरिया (गलघोटू), कुकर खांसी व टिटनेस जैसे गंभीर संक्रमणों से बचाव करता है।
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हिब वेक्सीन

हिब वेक्सीन का टीका बच्चों को गलघोटू, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी और एच इन्फलांजी-बी से सुरक्षित करता है। यह वेक्सीन नवजात टीकाकरण के अंतर्गत दी जाती है। हिब बेक्टीरिया के संक्रमण से न्यूयोनिया एवं मष्तिष्क ज्वर (मेनिनजाइटिस) जैसी घातक स्थिति हो सकती हैं।
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एमएमआर

एमएमआर वेक्सीन नीचे लिखी इन तीन बीमारियों से बचाता है।-

  • खसरा मीमल्स
  • कनफेड़ गम्स
  • रुबेला (जर्मन मीजल्स)

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कुछ वैकल्पिक टीके

टायफाइड का टीका - दो वर्ष के बाद
हेमोफिलस हंफलुएन्जी टाइप बी का टीका - 3, 4, 5 एवं 15 वें महिने पर
हेपेटाईटिस ए का टीका -  12 वें तथा 18 वें महिने पर
चिकिन पाक्स (छोटी माता का टीका) -  12 वें महिने के बाद  
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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