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बच्‍चों को अकेला सुलाने के लिए आजमायें ये तरीके

अगर आप भी अपने बच्‍चे को अकेला सुलाने के उपायों की खोज कर रहे हैं तो इस स्‍लाइड शो में दिये उपाय आपके लिए मददगार हो सकते है।

परवरिश के तरीके By Pooja SinhaNov 05, 2015

बच्‍चे को अकेला सुलाने के उपाय

बच्‍चा चाहे जितना भी बड़ा हो जाये उसका अकेले सोने का मन नही करता, क्‍योंकि उसे आपके प्‍यार और अपनत्‍व की जरूरत ज्‍यादा होती है। साथ ही उसे आपके साथ सोने में सुरक्षा का भी अनुभव होता है। लेकिन बढ़ते बच्‍चे को अकेले सोने की आदत डालनी चाहिए क्‍योंकि छोटे बच्‍चे के सोने का तरीका बिल्‍कुल अलग होता है और बड़े होने पर उसके सोने की आदतों में बहुत बदलाव आने लगता है। इसके अलावा साथ सोने से उसके आत्‍मविश्‍वास में भी कमी आने लगती है। हालांकि शुरूआत में शायद आप और आपके बच्‍चे दोनों के लिए अकेले सोना थोड़ा खराब हो सकता है। लेकिन आप उसे बताये कि सोना भी उनकी लाइफ का एक अहम हिस्‍सा है। अगर आप भी अपने बच्‍चे को अकेला सुलाने के उपायों की खोज कर रहे हैं तो यह स्‍लाइड शो आपके लिए मददगार हो सकता है।

एकदम से अलग न सुलाये

अपने बच्‍चे को तुरंत ही अलग सोने के लिए न कहें। अकेले सुलाने की कोशिश धीरे-धीरे करें। जैसे पहले बच्‍चे को दिन में उसके कमरे में अकेले सुलाएं और बाद में धीरे-धीरे रात में अलग सोने के लिए कहें। ऐसा करने से उसे अकेले सोने की आदत हो जायेगी।

सोने की जगह और रूटीन सेट करें

बढ़ते बच्‍चे को हर जगह नींद नहीं आती है। इसलिए उसके लिए एक अच्‍छी सी जगह या कमरे का निर्धारण करें। साथ ही बच्‍चे को हर समय सुलाने का प्रयास न करें। उसे समय पर ही सुलाएं, ताकि वह रात में जागकर परेशान न हों। इसके अलावा बच्‍चे के सोने का रूटीन बनाये कि वह दोपहर और रात में कितनी देर सोएगा। इससे उसकी आदत में उस समय नींद आना शामिल हो जाएगा।

शांत वातावरण

बच्‍चों को जहां भी सुलाएं, वहां का वातावरण शांत होना चाहिए। ज्‍यादा शोर-शराबे में भी बच्‍चे नहीं सो पाते है। इसके अलावा बच्‍चे का ध्‍यान अक्‍सर किसी खास तरह की आवाज या लाइट से आकर्षित होता है। इसलिए कमरे से निकलने समय इस बात का ध्‍यान रखें कि वहां पर कोई ऐसी आवाज, लाइट या अन्‍य चीज आपके बच्‍चे का ध्‍यान तो नहीं खींच रही हैं। अगर ऐसा है तो कमरे से उन चीजों को हटा दें, नहीं तो बच्‍चे का ध्‍यान उसी में लगा रहेगा।

सुरक्षा की भावना दें

बच्‍चे को एकदम अंधेरे में न सुलाएं। उन्‍हें हल्‍की रोशनी में सुलाएं ताकि वो डरें नहीं। साथ ही बच्‍चे को अकेले होने के अहसास से ही डर लगने लगता है इसलिए अपने बच्‍चे को कभी अकेले होने का एहसास न होने दें, उसके यकीन दिलाएं कि जब भी वह आपको पुकारेगा तो आप उसके पास तुरंत आ जाएंगी।
Image Source : Getty

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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