• shareIcon

बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं ये दो प्रमुख हार्मोन

स्‍वस्‍थ और हेल्‍दी बच्‍चा होने के बाद अगर उसका विकास सही तरीके से नहीं हो रहा है तो इसके लिए दो हार्मोन जिम्‍मेदार होते हैं, इस स्‍लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं कैसे ये हार्मोन बच्‍चे के शरीर को प्रभावित करते हैं।

परवरिश के तरीके By Devendra Tiwari / Feb 15, 2016

बच्चे का विकास और हार्मोन

दुनिया में आने के बाद नवजात का स्वास्य अच्‍छा हो और उसका संपूर्ण विकास हो, शायद यह संभव भी नहीं है। क्योंकि कुछ समस्यायें और बीमारियां जन्मजात होती हैं और उनका असर बच्चे के विकास पर दिखाई देता है। बच्चे की लंबाई कम होने के अलावा बच्चे का मानसिक विकास ठीक से न हो पाने के लिए प्रमुख रूप से हर्मोंस ही जिम्मेदार होते हैं। बच्चे को यह कमी जन्म से होती है जो कि जीवनभर उनको झेलनी भी पड़ती है। इस स्लाइडशो में इन दो प्रमुख हार्मोन और उनसे होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

थायरॉइड हार्मोन

यह हार्मोन शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं, ये मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखते हैं। जन्म के बाद इस हार्मोन की कमी होती है तो बच्चे का दिमागी विकास ठीक से नहीं हो पाता है, वह मंदबुद्धि हो सकता है। सामान्यतया पैदा होने के 2 साल के भीतर बच्चे का दिमागी विकास हो जाता है, लेकिन 3 साल की उम्र के बाद अगर उसमें हार्मोन की कमी होती है तो उसके मानसिक विकास की बजाय शारीरिक विकास जैसे लंबाई व वजन प्रभावित होने लगते हैं।

लक्षण, जांच और उपचार

जन्म के समय यदि बच्चा स्वस्थ है लेकिन उसके शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी है तो इसके लक्षण 2-3 महीने में ही दिखने लगते हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म में बच्चे को अंबलाइकल हर्निया (नाभि का फूलना), कब्ज, लंबे समय तक पीलिया जैसी बीमारी होने लगती हैं और वह शारीरिक रूप से कम सक्रिय भी रहता है। इसके लिए टी-3, टी-4, टीएसएच जांचों के अलावा जरूरत पड़ने पर स्कैन और सोनोग्राफी भी की जाती है। हार्मोंस की इस कमी को दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। चिकित्सक की सलाह पर बच्चे की देखभाल और परवरिश करें।

ग्रोथ हार्मोस

यह ऐसा हार्मोन है जिसकी कमी जन्मजात होती है। इसमें जन्म के बाद पिट्यूटरी ग्रंथि की बनावट में विकृति से हार्मोन कम बनते हैं। इसके लक्षण हैं – ब्लड में शुगर की कमी, लंबे समय तक पीलिया, कम लंबाई और बच्चा अपनी वास्तसविक उम्र से छोटा दिखता है।

जांच और उपचार

ग्रोथ हार्मोन लेवल ब्लड से बेसिल एंड स्टीम्यूलेटेड, एमआरआई व म्यूटेशन एनालिसिस की जांच की जाती है। इसके उपचार के लिए इंजेक्शन लगाए जाते हैं। कई बार चोट लगने, ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन, रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी व पिट्यूटरी ग्रंथि के क्षतिग्रस्त होने से भी हार्मोंस की कमी होती है।
Image Source : Getty

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK