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अनिद्रा के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप

नींद ना आना या लंबे समय तक ना सो पाने की समस्या को अनिद्रा अर्थात इंसोमेनिया कहते हैं। अनिद्रा की समस्या लंबे समय तक होने पर यह जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

अन्य़ बीमारियां By Rahul SharmaSep 20, 2014

अनिद्रा क्या है

अनिद्रा स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बड़ी समस्या है, जो हर उम्र के पुरुष और महिलाओं में हो सकती है। नींद ना आना या लंबे समय तक ना सो पाने की समस्या को अनिद्रा अर्थात इंसोमेनिया कहते हैं। अनिद्रा के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे अल्पावधि या तीव्र अनिद्रा, अनिद्रा का एक आम प्रकार है। यदि अनिद्रा की समस्या लंबे समय से है और आपके जीवन को प्रभावित कर रही है तो यह एक गंभीर और चिरकारी समस्या है जिसे सही, पेशेवर चिकित्सक की जरुरत है। इस समस्यासे निपटने के लिए इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी होता है। तो चलिये जानें अनिद्रा के बारे में कुछ नई बातें।
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इंसोम्नियाक्स

यदि किसी व्यक्ति को 30 दिनों से भी अधिक समय तक ठीक से नींद न आए तो इसका मतलब यह है कि वह चिरकालीन अनिद्रा का शिकार है। चिरकालीन अनिद्रा से पीड़ित मरीज़ों को "इंसोम्नियाक्स" भी कहा जाता है।
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थकान के साथ जाग जाना

यदि रात में अच्छी नींद ना आने के कारण अक्सर लोग सुबह की ताजगी नहीं महसूस कर पाते। पर्याप्त नींद की कमी के चलते इसका नुकसान शरीर की चयापचय प्रक्रिया पर पड़ता है। जिससे उठने के बाद खुमारी या सर भारी होने जैसे लक्षणों का अहसास करती है।
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दिन भर सुस्ती

दिन भर सुस्त सा रहना अनिद्रा के कारण लोगों में दिखाई देने वाला एक बेहद आम लक्षण है। और दिन में रहने वाली ये सुस्ती या उनींदापन उस व्यक्ति के कामकाजी और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
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चिड़चिड़ापन और मिजाज में बदलाव

जब किसी व्यक्ति कि रोज की नींद पूरी नहीं होती तो उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आ जाता है। ऐसे लोगों को बहुत जल्दी गुस्सा आता है और वे चिंता या अवसाद का शिकार भी हो सकते हैं। उन्हें चीजों को याद रखने में भी परेशानी होती है।
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अनिद्रा के कारण

अनिद्रा के कई कारण हो सकते हैं। इसके कुथ आम कारणों में मानसिक तनाव, अधिक क्रोध, चिंतन करना, अधिक उत्तेजना, कब्ज, धूम्रपान, चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन, आवश्यकता से कम या अधिक खाना या फिर गरिष्ठ मसालेदार भोजन का सेवन करना आदि शामिल होते हैं।
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अनिंद्रा के पीछे टेस्टोस्टेरॉन जिम्मेदार

मॉनटेयल विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए एक शोध में पाया गया कि टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा 30 वर्ष की आयु होने के बाद प्रतिवर्ष एक प्रतिशत की दर से घटती है। शोध के मुताबिक 50 साल की आयु के बाद यह दर और भी तेजी से घटती है, जो कि अनिंद्रा को बढ़ावा देती है।
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कितनी नींद काफी

चिकित्सकों के अनुसार 18 से 40 वर्ष तक की आयु में आठ घंटे की नींद और 40 से 50 वर्ष तक के स्वस्थ मनुष्य के लिए 6 घंटे की नींद आवश्यक होती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र होने पर नींद कम आने लगती है और आदमी किश्तों में अपनी नींद पूरी करने लगता है।
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मधुमेह और हदयरोगों का खतरा

कई अध्ययनों से पाता चाला है कि अनिद्रा और नींद संबंधी अन्य विकारों के कारण मधुमेह और हदयरोगों का जोखिम भी बढ़ सकता है। इस समस्या का पता न लगने और निदान न होने पर हाइपरटेंश व रक्तचाप बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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