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ट्रे‍वलिंग के दीवाने हैं और दुनियादारी छोड़कर घूमना चाहते हैं तो फिर ये कैसा डर!

अगर आप दिल से खुद के प्रति ईमानदार हैं तो, आपकी अंतरमन आपको न सिर्फ सही रास्ता दिखाता है, बल्कि उस रास्ते पर चलने की ताकत और हिम्मत भी देता है। ट्रे‍वेलिंग के दीवाने इस सत्य का ही अनुसरण करते हैं।

तन मन By Rahul SharmaJan 18, 2016

ट्रे‍वलिंग के दीवानों को कैसा डर

"अगर आप दिल से खुद के प्रति ईमानदार हैं तो, आपका अंतरमन आपको न सिर्फ सही रास्ता दिखाता है, बल्कि उस रास्ते पर चलने की ताकत और हिम्मत भी देता है।"
पुरानी यादों में जाऊं तो किताब का एक अध्याय याद आता है, "अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा"। राहुल संकृत्यायन ने दुनिया के अनेक महापुरूषों की सफलता का रहस्य घुमक्कड़ी को बताया और कोलंबो, डार्विन, वास्कोडिगामा, बुद्ध, महावीर, शंकराचार्य, रामानुज, गुरू नानक आदि का उदाहरण सभी क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिये दिया। लेकिन जब बात व्यवहारिक जीवन की आती है तो हम व्यवहारिक लोग घूमने के लिये नौकरी छोड़ने की बात सोचकर भी घबरा जाते हैं, और अनयास ही कई सारे डर उन्हें आ घेरते हैं। आज हम ऐसे ही कुछ कमाल के ट्रेवलर्स की बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने घुमक्कड़ी के लिये सब कुछ छोड़ बड़े फैंसले लिये और जिनकी भावनाओं को सुन और समझ शायद आप भी अपने यात्रा पर जाने के फैंसले को और मजबूत बना पाएं - 

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माइकल ने घूमे 30 से ज्यादा देश


अपनी नौकरी से थक और परेशान हो चुके माइकल बलांगर (Mikhael Belanger) का जीवन पूरी तरह निराशाजनक हो चुका था, तब उनकी माम ने उन्हें कहा, तुम्हें घूमना चाहिये, "तुम यूरोप जाओ"। मां के इन तीन शब्दों ने माइकल की जिंदगी बदल कर रख दी। आज माइकल 30 से ज्यादा देश घूम चुके हैं। हालांकि माइकल के अनुसार, सब कुछ छोड़ कर घूमने निकल पड़ने का निर्णय बेहद मुश्किल है। लेकिन वो लोगों को घूमने के लिये उत्साहित करते हैं।
Image Source: fotografer.net

गौरव ने साइकल पर घूमे चार राज्य


साइकलिस्ट गौरव जैन (Gaurav Jain)एक बड़े अंग्रेजी अखबार में काम करते थे, और साइकलिंग का शोक रखते हैं। राष्ट्रीय चुनाव के दौरान गौरव ने नौकरी छोड़ साइकिल पर राज्यों को घूमने का फैंसला किया। गौरव के अनुसार उन्हें उस वक्त लगा कि उनकी घूमने और चीज़ों को नजदीक से देखने की भावना इतनी प्रबल और सच्ची थी के वे खुद को रोक न पाए। गौरव को उनके ट्रेवल के तजुर्बे के आधार पर कई बड़ी पत्रिकाओं ने लिखने के लिये आमंत्रिक किया और कई में गौरव ने लिखा भी। गौरव आज भी साल के ज्यादातर वक्त नई जगहों पर घूम रहे होते हैं।

मैगन यंगमि के लिये सबसे अच्छा फैंसला



30 साल की मैगन यंगमि (Megan Youngmee) के लिये कॉर्पोरेट और स्टार्टअप दुनिया को छोड़कर घूमने निकल पड़ना एक बेहद डर और घबराहट वाला फैंसला था। मैगन ने 4 महाद्वीपों और 6 देशों की यात्रा की है। मैगन के अनुसार, "यह मरे जीवम में किये निवेशों में सबसे अच्छा निवेश है, ये फैंसला मैनें खुद को और अपनी खुद की खुशी के लिये किया था।"
Image Source: wanderlust.co.uk

क्रिस्चियन वरगा के दिल की आवाज़


एक वेब डव्लपिंग कंपनी चलाने के बाद, क्रिस्चियन वरगा (Christian Varga) को अपनी घुमक्कड़ी की चाहत का पता चला। साल 2012 के अगस्त महीने में क्रिस्चियन ने मैलबर्न से लदंन का एक तरफा टिकट लेकर मैलबर्न छोड़ दिया। आज वो एक नैट कनेक्शन वाले लैपटॉप से ही काम करते हैं। क्रिस्चियन के अनुसार, "जिंदगी में अपनी पसंद की चीज़ें करना और पाना आसान नहीं, लेकिन अगर आप में माद्दा है तो आपके लिये कुछ भी असंभव नहीं"।  
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