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बेमतलब लगते हैं भारतीय पैरेंट्स के ये 7 लॉजिक

बच्‍चों को लेकर भारतीय माता-पिता कई ऐसी बातें भी करते हैं जिनमें किसी तरह का तर्क नहीं होता है और वे केवल बेमतलब के लॉजिक होते हैं, लेकिन भारतीय पैरेंट्स उनको मानते हैं।

परवरिश के तरीके By Nachiketa Sharma / Jan 23, 2015

भारतीय पैरेंट्स के लॉजिक

ऐसा न सिर्फ माना जाता है बल्कि सच भी है कि बच्‍चे की हर एक बात का खयाल मां-बाप करते हैं। बच्‍चे की जरूरत हो या फिर स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल पैरेंट्स कभी पीछे नहीं होते हैं। लेकिन बच्‍चों को लेकर पैरेंट्स की कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो जिनमें कोई तर्क नहीं होता है और वे बेमतलब की होती हैं। लेकिन पैरेंट्स ये मानते हैं कि इन बेमतलब की बातों का असर बच्‍चे पर पड़ता और उसका व्‍यक्तित्‍व भी इससे निखर जाता है। पैरेंट्स की इन बेमतलब के लॉजिक को आप भी जानें।

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शादी के बाद बदल जायेगा

अगर किसी का बच्‍चा बिगड़ैल स्‍वभाव का है और अपनी आदतों को नहीं छोड़ पा रहा है तो उसके पैरेंट्स को लगता है कि शादी ही इस समस्‍या का हल है। 'बेटा शादी कर लेगा तो आवारा नहीं रहेगा' जबकि क्‍या पता शादी के बाद भी बच्‍चे का स्‍वभाव जैसा था वैसा ही रहे। लेकिन पैरेंट्स को लगता है कि शादी के बाद उनका बच्‍चा अच्‍छा बन जायेगा।

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पड़ोसी के बच्‍चे से तुलना

भारतीय पैरेंट्स जब भी अपने बच्‍चे की कोई गलती देखते हैं तो उसकी तुलना सीधे पड़ोसी से करते हैं। आपने भी अक्‍सर सुना होगा 'पड़ोसी का बेटा अपने बेटे से समझदार है।' भले वे पड़ोसी के बच्‍चे को अच्‍छे से न जानते हो लेकिन उसे हमेशा आपसे बढ़कर ही मानेंगे।

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पैसे से तुलना

'लड़का अच्‍छा कमाता है तो अच्‍छा ही होगा' यह बात भले ही आपको अजीब लगे लेकिन भारतीय पैरेंट्स बच्‍चे की कमाई से उसका चरित्र-चित्रण करते हैं। जब भी वे अपनी बेटी के लिए कहीं भी रिश्‍ता देखने जाते हैं तो उसकी कमाई देखते हैं न कि उसका स्‍वभाव या आदतें। अच्‍छा कमाता है इसका मतलब वह अच्‍छा ही होगा।

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बच्‍चे ही रहोगे

'बेटा तुम कितने भी बड़े हो जाओ मेरे लिए बच्‍चे ही रहोगे' यही मानते हैं भारतीय पैरेंट्स। भले ही उनका बेटा 2 बच्‍चों का पिता बन जाये वे उसे हमेशा बच्‍चा ही मानते हैं।

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पढ़ाई के सीमित विकल्‍प

बच्‍चे के पैदा होने के साथ ही उसके माता-पिता उसके करियर को निर्धारित कर देते हैं, और उनकी तमन्‍ना यही होती है कि उनका बेटा या तो इंजीनियर होगा या डॉक्‍टर। इन दो पेशों के अलावा उनके करियर को कोई दूसरा विकल्‍प उज्ज्‍वल नहीं कर सकता है। डॉक्‍टर और इंजीनियर का पेशा ही उनको दुनिया का सबसे बेहतरीन पेशा लगता है।

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चार लोग क्‍या कहेंगे

आपसे कोई भी गलती हो जाये या आपने कुछ ऐसा काम कर दिया जिससे उनकी बदनामी हो रही हो या फिर आपके रिजल्‍ट अच्‍छे न आयें हों तो वे यही कहेंगे, 'बेटा चार लोग क्‍या कहेंगे।' उनको खुद से अधिक उन चार लोगों की चिंता है। जबकि दुनिया क्‍या कहेगी इससे कहीं अधिक महत्‍वपूर्ण है कि आप उस बारे में क्‍या सोचते हैं।

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संस्‍कार नहीं मिले

अगर आप दुनिया को अपने नजरिये से देखना चाहते हैं, अपने तरीके से जीना चाहते हैं तो आपके पैरेंट्स इसके लिए आपको कुछ इस तरह से रोकेंगे, 'लोग तो यही कहेंगे न कि मां-बाप ने क्‍या संस्‍कार दिये हैं।' जबकि वास्‍तविकता यह है कि आप चीजों को अच्‍छी तरीके से समझ सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं।

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