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गर्भावस्‍था के इन दस लक्षणों को भी जानना है जरूरी

गर्भावस्‍था के कई ऐसे लक्षण हैं जिनके बारे में जानकर आप आसानी से प्रेग्‍नेंसी का पता लगा सकती हैं, ये लक्षण सामान्‍य जरूर हैं लेकिन प्रेग्‍नेंसी से जुड़े हो सकते हैं।

गर्भावस्‍था By Nachiketa SharmaOct 21, 2014

गर्भधारण करना

मां बनना प्रत्‍येक महिला का सपना होता है और हर महिला इस सुख से गुजरना चाहती है। लेकिन गर्भधारण करने के कई सामान्‍य लक्षण हैं जिन्‍हें वह नजरअंदाज कर देती हैं। गर्भधारण के लक्षणों पर नित नये शोध भी आ रहे हैं, केवल मासिक धर्म का रुकना और पेट में ऐंठन होना ही गर्भधारण के लक्षण नहीं हैं। दरअसल जब अंडे गर्भाशय में प्रवेश करते हैं तब हार्मोन में बदलाव आता है और यह कई तरह के लक्षण दिखाता है।

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मासिक धर्म का रुकना

गर्भावस्‍था के शुरुआती आठ हफ्तों के भीतर सिर्फ एक बार हल्की ब्लीडिंग भी गर्भावस्‍था के संकेत देती है। आमतौर पर प्रगेनेंसी के शुरुआती दिनों में पीरियड्स भी रुक जाते हैं। हालांकि सिर्फ इस आधार पर किसी महिला का गर्भावती होना नहीं माना जा सकता है क्योंकि मासिक धर्म रुकने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

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बदलती भावनायें

गर्भावस्‍था के दौरान हार्मोन के बदलाव के कारण मन में कई तरह की इच्‍छायें पैदा होती हैं, इस दौरान महिला की भावनायें बेकाबू हो सकती हैं। किसी पल उसे खूशी मिलती है तो अगले ही पल वह सोचने लगती है। कभी जी मिचलाता है तो अगले ही पल खाने का मन करता है। अगर यह लक्षण दिख रहे हैं तो प्रेग्‍नेंसी की जांच करायें।

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ब्रेस्ट में बदलाव

गर्भावस्‍था के शुरुआती दौर में ब्रेस्ट में भी परिवर्तन होता है। दूसरे या तीसरे सप्ताह तक ब्रेस्ट में सूजन या कड़ापन महसूस होता है। शरीर में हार्मोनल बदलाव की वजह से आपके स्‍तनों की त्‍वचा में भी बदलाव हो सकता है।

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बहुत अधिक थकान लगना

प्रेग्‍नेंसी के पहले हफ्ते से ही बहुत अधिक थकान होना, खासतौर पर सुबह के समय थकान, गर्भधारण करने का एक प्रमुख लक्षण है। इस अवस्था में शरीर में प्रोजेस्टोरॉन हार्मोन बनता है जिससे शरीर बहुत जल्दी थक जाता है।

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जी मचलना और उल्टियां होना

जी मचलाना और उल्टियों की शिकायत होना भी गर्भधारण का प्रमुख लक्षण है। 99 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को पीरयड्स रुकने के आठ सप्ताह के भीतर उल्टियां या जी मचलने जैसी समस्या जरूर होती हैं।

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पाचन से संबंधी समस्याएं

गर्भ धारण के छठें हफ्ते में कई बार पाचन से संबंधी समस्याएं होती हैं जिसमें सीने में दर्द, गैस्ट्रिक, एसिडिटी आदि प्रमुख हैं। इसका कारण भी शरीर में होने वाला हार्मोनल बदलाव हो सकता है। इन लक्षणों को देखकर गर्भावस्‍था की पुष्टि के लिए जांच करायें।

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पसंद में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का मूड बड़ी आसानी से बदल जाता है। खाने की पसंद-नापसंद, महक आदि में भी बदलाव होते हैं। कई बार सिर्फ पसंद ही नहीं बदलती बल्कि पसंदीदा भोजन या महक से शरीर को भी एलर्जी हो सकती है। खट्टा खाने का मन अधिक करता है।

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विशेष खाने की इच्‍छा

गर्भधारण के बाद महिलायें खाने के प्रति अधिक सचेत हो जाती हैं। इस दौरान उन्‍हें कुछ विशेष खाने की इच्‍छा होने लगती है। इसके अलावा कुछ गंध के प्रति उनका आकर्षण भी होने लगता है।

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त्‍वचा में बदलाव

त्‍वचा में बदलाव होना विशेषकर त्‍वचा में सूजन, एक्‍ने की समस्‍या भी गर्भधारण के समय होती है। यह आपको किशोरावस्‍था की याद दिला सकती है, लेकिन वास्‍तव में हार्मोन बदलने के कारण यह समस्‍या होती है।

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सिरदर्द होना

गर्भावस्‍था के दिनों में सिरदर्द और तनाव की समस्‍या सामान्‍य हो जाती है। लेकिन गर्भधारण के बाद से ही सिरदर्द की समस्‍या शुरू होती है, क्‍योंकि बदलते हार्मोन के कारण तनाव होता है और यह सिरदर्द का कारण बनता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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