पिता बनने जा रहे पुरुषों को सताते हैं ये 10 डर

हर संभावित पिता को कुछ भय, जैसे सुरक्षा का डर, वैवाहिक जीवन पर बच्चे का प्रभाव, काम और परिवार के बीच सामंजस आदि सताते हैं।

परवरिश के तरीके By Rahul Sharma / Jan 28, 2014
संभावित पिता और डर

संभावित पिता और डर

हर संभावित पिता को यह भय सताता है कि पिता बनने के बाद की जिम्मेदारियों से निपटने के लिए वह अपने आप को कैसे तैयार कर पाएगा। आमतौर पर मां को ही बच्चे के जन्म के लिए सारा श्रेय दे दिया जाता है, लेकिन देखा जाए तो पिता की भी उतनी ही जिम्मेदारियां होती हैं, जितना कि मां की। इसी के चलते संभावित पिता को बच्चे के जन्म व उसके पालन पोषण से जुड़े कई भय सताने लगते हैं। हो सकता है कि वह किसी और के साथ ये बात  साझा न करे लेकिन ऐसा होना स्वभाविक है। जलिए जानते हैं कि वे कौंन से दस डर हैं जो हर संभावित पिता को सताते हैं।

सुरक्षा का भय

सुरक्षा का भय

संभावित पिता के लिए बच्चे को लेकर कुछ भय जैसे कि, वह बच्चे को ठीक तरह से पकड़ पाएगा या नहीं, उसके डाइप कैसे बदलने होंगे, बच्चा सुरक्षित कैसे रहेगा, वह घर को बच्चे के लिए कैसे सुरक्षित बना पाएगा, आदि ऐसी आशंका होना पूरी तरह सामान्य हैं। लेकिन इन बातों को लेकर बहुत ज्यादा भयभीत न होना ही अच्छा है।

काम और परिवार के बीच सामंजस

काम और परिवार के बीच सामंजस

किसी भी संभावित पिता के लिए काम और परिवार के बीच सामंजस बिठा पाना महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है। अपने परिवार के साथ श्रेष्ठ समय बिताने का कोई विकल्प नहीं होता है। संभावित पिता को इस बात का भय हमेशा सताता है कि वह काम की व्यस्थता के चलते अपने परिवार को समय देने में असमर्थ तो नहीं रहेगा। उसे इस बात की चिंता भी सताती है कि परिवार की बच्चे और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वह अपना काम उतनी लगन और मेहनत से नहीं कर पाएगा, जितना की वह पहले किया करता था। और कहीं व्यस्थता के चलते वह बच्चे के जीवन के कुछ विशेष क्षणों में  उसके साथ होगा या नहीं।

वैवाहिक जीवन पर बच्चे का प्रभाव

वैवाहिक जीवन पर बच्चे का प्रभाव

बच्चा होने पर निश्चित रूप से एक पिता के जीवन में कई चीजें बदल जाती हैं। और यह बदलाव साथी की गर्भावस्था के दौरान ही देखा जा सकता है। शुरुआत में जब बच्चे को समय और ध्यान की पूरी जरूरत होती है, तब यह संभव है कि थका होने के कारण वह आपके साथ बहुत अंतरंग पाल न बिता पाए। लेकिन यह समय के साथ बदल जाता है, इसलिए आपको ऐसे में पूरे संयम और धैर्य के साथ काम लेना चाहिए।

सामाजिक जीवन के प्रभावित होने का भय

सामाजिक जीवन के प्रभावित होने का भय

क्योंकि पेरेटिंग काफी व्यस्थता का काम है, इसलिए संभावित पिताओं को डर होता है कि बच्चे के जन्म के बाद उनके सामाजिक जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी डर होता है कि वे इस वजह से अपने सभी दोस्तों और सामाजिक जीवन को खो सकते हैं।

संबंधों को लेकर भय

संबंधों को लेकर भय

कुछ पुरुषों को इस बात की बहुत चिंता होती है कि मां बनने के बाद उनकी पत्नी पहले की तरह खुश मिजाज और रोमेंटिक नहीं रह पाएगी। संभावित पिता को इस बात का भय होता है कि बच्चे के जन्म के बाद पत्नी, बच्चे को ही सबसे ज्यादा चाहेगी और उसे दरकिनार कर दिया जाएगा, और वे पहले की तरह का हसीन जीवन लहीं जी पाएंगे। रिप्लेसमेंट का यह भय पिता के लिए स्वभाविक है।

क्या वे मदद कर पाएंगे

क्या वे मदद कर पाएंगे

संभावित पिताओं को डर होता है कि, उनके साथी के प्रसव के समय वे सही समर्थन प्रदान करने में सक्षम नहीं होंगे। उन्हें डर होता है कि प्रसव के समय, जबकि उसके साछी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वे उनका साथ नहीं दे पाएंगे।

जीवन में नीरसता

जीवन में नीरसता

बच्चे के जन्म के साथ या पहले संभावित पिताओं को अक्सर वे बात सताती है कि वे अब युवा नहीं रहे और उनका विकल्प आ गया है। उन्हें यह भय होता है कि एक पिता बनने का मतलब अपने बच्चे और परिवार की जरूरतों को पूरा करना हो जाता है, और उनके जीवन में कुछ कुछ खास नहीं बचा है।

अपने साथी या बच्चे के स्वास्थ्य के लिए डर

अपने साथी या बच्चे के स्वास्थ्य के लिए डर

संभावित पिता अक्सर इस डर के साये में रहता है कि किसी वह अपने साथी या बच्चे को खो तो नहीं देगा। और कहीं उसे अपने बच्चे का पालन-पोषण खुद ही तो नहीं करना पड़े।

अच्छा पिता न बन पाने का खतरा

अच्छा पिता न बन पाने का खतरा

संभावित पिताओं के डर में सबसे आम डर होता है, उसका एक अच्छा पिता ना बन पाने का डर। उसे इस बात का भय होता है कि वह अपने परिवार और बच्चे को सभी आवश्यक सुविधाएं, पर्याप्त समय और प्यार देने में सक्षम नहीं होगा।

वित्तीय आशंकाएं और भय

वित्तीय आशंकाएं और भय

किसी भी संभावित पिता के लिए सबसे बड़ा भय वित्त से जुड़ी समस्याओं का होता है। वह इस बात को लेकर भयभीत रहता है कि कहीं वित्तीय समस्याओं के चलते वह अपने परिवार और बच्चे की जरूरतों को पूरा करने में फेल न हो जाए। उसे भय होता है कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी पत्नी के काम छोड़ देने की स्थिति में वह अपने परिवार को वित्तीय रूप से सभांल पाएगा या नहीं।

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