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डिलीवरी के बाद किडनी इंफेक्‍शन के लक्षण और इसका उपचार

डिलीवरी अर्थात प्रसव होने के पश्चात, महिलाओं में संक्रमण होने की आशंका अधिक होती हैं। चलिये डिलीवरी के बाद गुर्दे के संक्रमण के लक्षण और इसके उपचार के बारे में विस्तार से जानते हैं।

महिला स्‍वास्थ्‍य By Rahul Sharma / Apr 18, 2016

डिलीवरी के बाद गुर्दे का संक्रमण

डिलीवरी अर्थात प्रसव होने के पश्चात, महिलाओं में संक्रमण होने की आशंका अधिक होती हैं। इस दौरान गुर्दे का संक्रमण होने का जोखिम भी होता है। प्रसव के बाद, यदि किसी कारण से महिल को मूत्र संक्रमण होने की स्थिति में ये संक्रमण मूत्रमार्ग से मूत्राशय और फिर गुर्दों तक भी फैल सकता है। इस संक्रमण के होने की अशंका उन महिलाओं में अधिक होती है, जिनमें प्रसव के दौरान या इसके बाद, मूत्राशय को खाली करने के लिए कैथेटर का इस्तेमाल किया गया होता है। इसके अलावा प्रसव पश्चात जननागों की ठीक प्रकार से साफ-सफाई न होने की स्थिति में भी यह समस्या हो सकती है। चलिये विस्तार से जानें डिलिवरी के बाद गुर्दे के संक्रमण के लक्षण और इसका उपचार क्या है। -
Images source : © Getty Images

कैसे होता है ये संक्रमण

यदि किसी महिला को प्रसव पश्चात, खुद में कुछ असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हों, तो उसे तत्काल प्रभाव से डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये, क्योंकि यदि संक्रमण यदि बढ़ जाए तो गंभार रूप ले सकता है और शरीर को हानि पहुंचा सकता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन मूत्रमार्ग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं। ऐसे में प्रोजेस्टीरोन मूत्रवाहिनियों की मांसपेशियों को शिथिल कर देता है। जिससे गुर्दों से मूत्राशय में जाने वाला पेशाब का प्रवाह बाधित होता है। बढ़ते हुए गर्भाशय का भी यही असर होता है। और इसके चलते जीवाणुओं को बाहर निकलने से पहले ही वहां बढ़ने का समय मिल जाता है और संक्रमण हो जाता है।

गुर्दे के संक्रमण के लक्षण


यदि किसी महिला को प्रसव पश्चात, निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो उसे गुर्दे के संक्रमण संबंध में डॉक्टर से अपनी जांच अवश्य करानी चाहिए। गुर्दे के संक्रमण के लक्षण निम्न प्रकार से हो सकते हैं -

  • अगर जल्दी-जल्दी पेशान जाना पड़े।
  • अगर पेशाब को रोक पाने में दिक्कत महसूस होती है।
  • यदि तेज बुखार आए और दवाएं लेने पर भी ठीक न हो रहा हो तो।   
  • अगर बहुत कमजोर आने लगे और बीमार होने जैसा महसूस हो रहा हो।
  • अगर पीठ के निचले हिस्से या कमर के ऊपरी भाग में दर्द हो रहा हो।  
  • कब्ज की शिकायद लंबे समय तक रहे।
  • पेशाब करते समय दर्द या जलन हो तो।
  • पेशाब से तेज गंध या इसका रंग भूरा, धुंधला, रक्तरंजित या तेज दुर्गंध आना।
  • अगर पेट में दर्द हो तो।

 

गुर्दे के संक्रमण का उपचार

प्रसव के बाद इस प्रकार के लक्षणों के नजर आने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर मूत्र परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। अगर जांच में इस संक्रमण की पुष्टि होती है, तो आमतौर पर डॉक्टर इंजैक्शन या ओरल दवाई देकर उपचार करते हैं। इसके अलावा रोगी को अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। दवाइयां देने के बाद, भी डॉक्टर बीच-बीच में यूरिन टेस्ट की मदद से संक्रमण की स्थिति की जांच करते हैं।

एंटिबायटिक्स दवाओं का इस्तेमाल

कोई अंतर्निहित संक्रमण जैसे, गुर्दे का गंभीर संक्रमण, जिसे पायालाइटिस कहा जाता है, होने की स्थिति में रोगी को अस्पताल में भर्ती होकर नसों में एंटिबायटिक्स (इंट्रावेनस) दवाएं देनी पड़ सकती हैं। नसों के माध्यम से दी गई दवाई की आवश्यक खुराक सीधे शरीर में पहुंचती है और संक्रमण को ठीक करने की दिशा में तत्काल प्रभाव से असर करती है। लेकिन यदि बार-बार मूत्रमार्ग का संक्रमण हो रहा है, तो एंटिबायटिक्स दवाओं की छोटी खुराक लंबे समय के लिए दी जाती है।  
अगर एंटिबायटिक्स से आराम ना मिले तो ऐसे में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन कर सकता है, ताकि आपके मूत्राशय और गुर्दों को ठीक से देखा जा सके।
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