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फेफड़ों के लिए खतरनाक है बारिश के बाद उड़ने वाली धूल, ऐसे करें बचाव

अगर फेफड़े स्‍वस्‍थ हों तो शरीर भी स्‍वस्‍थ रहता है, क्‍योंकि यह शरीर की सफाई करता है, लेकिन वर्तमान में फेफड़ों की बीमारियों की समस्‍या बढ़ती जा रही है, इसके लिए कुछ अजीब कारक जिम्‍मेदार हो सकते हैं।

अन्य़ बीमारियां By Atul ModiJul 25, 2018

फेफड़ों की समस्या बढ़ाने वाले कारक

जीवित रहने के लिए सांस लेना जरूरी है। लेकिन जिन लोगों को फेफड़ों अर्थात लंग की बीमारी है उनको अस्थमा जैसी बीमारी होने की आशंका भी अधिक रहती है। उनको सांस लेने में भी तकलीफ होती है। आज की जीवनशैली में फेफड़ों की बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं और इसके पीछे कुछ ऐसे कारक भी हैं जिनकी वजह से फेफड़ों की समस्या बढ़ रही है। चलिये जानें कि फेफड़ों की समस्या बढ़ाने वाले ये अजीब कारक कौन से हैं -

प्रदूषण और आनुवंशिक कारण

अस्थमा श्वास संबंधी एक रोग है। इससे श्वासन नलियों में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इसके लिए पर्यावरण प्रदूषण और आनुवंशिक कारण प्रमुख रूप से जिम्मेदार होते हैं। साथ ही उन लोगों को भी विशेष सावधानी रखनी चाहिए, जिन्हें धूल, धुआं, पालतू जानवरों और किसी दवा आदि से एलर्जी होती है।

तंबाकू का सेवन से फेफडों का कैंसर

एक या दोनों फेफडों में असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से विकासित होने पर वायुमार्ग के अंदर परत बन जाती है। ये बहुत तेजी से विभाजित होती हैं और टय़ूमर का रूप ले लेती हैं। फेफडों के कैंसर के 10 में से 9 मामले में तंबाकू का सेवन ही कारण होता है। वातावरण में एसबेस्टस घुला होने के कारण भी ये समस्या होती है।

हृदय से संबंधित समस्याओं से

पल्मोनरी इडेमा एक ऐसी स्थिति है, जो फेफड़ों में तरल पदार्थ भरने के कारण हो जाती है। इससे सांस लेने में तकलीफ होती है। इसका सबसे प्रमुख कारण हृदय से संबंधित समस्याएं होती हैं। इसके अलावा न्युमोनिया तथा विषैले तत्वों से संपर्क में आने व कुछ दवाओं से भी यह हो सकता है। इसके अलावा धूम्रपान इसका सबसे प्रमुख कारण होता है।

कुछ चीजों से एलर्जी के कारण

अनेक लोगों में एलर्जी के कारण अस्थमा का अटैक आ सकता है। यह एलर्जी मौसम, खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ इत्र, परफ्यूम जैसी खुशबू और कुछ अन्य प्रकार के पदार्थों से हो सकती हैं। वहीं कुछ लोगों को रुई के बारीक रेशों, आटे की धूल, कागज की धूल, कुछ फूलों के पराग, पशुओं के बाल, फफूंद और कॉकरोज जैसे कीड़ों के प्रति एलर्जित होते हैं।

बरसात के बाद

बरसात होने के बाद नमी बनी रहती है। लेकिन तब भी खुली जगहों के अलावा घर व दफ्तर आदि में धूल के कुछ कण वातारण में तैरते रहते हैं। जो नमी के साथ ही वायु मंडल में एक परत के रूप में जम जाते हैं। इससे लोगों के सीने में जलन, कफ जमने एवं इंफेक्शन की परेशानी हो सकती है।

भावनात्मक मनोभाव के कारण

मजबूत भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। जी हां, सिर्फ पदार्थ ही नहीं बल्कि भावनाओं से भी दमे का दौरा शुरू हो सकता है। जैसे क्रोध, रोना व विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाएं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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