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इन 9 सप्‍लीमेंट की मदद से रखें अपने दिल को स्‍वस्‍थ

खान-पान में सुधार और एक्‍सरसाइज के द्वारा आप लंबे समय तक खुद को फिट रखने के साथ हृदय संबंधी रोगों से हमेशा के लिए दूर रह सकते है। इसके साथ ही आप कुछ सप्‍लीमेंट को अपनी दिनचर्या में शामिल कर खुद को दिल से जुड़ी बीमारियों से बचा सकते हैं।

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By Pooja SinhaFeb 25, 2015

दिल को स्‍वस्‍थ रखने के उपाय

वैसे तो शरीर के सभी अंगों का अपना महत्‍व होता है लेकिन दिल की सबसे ज्‍यादा अहमियत होती है। हाई कोलेस्‍ट्रॉल होने से दिल के तमाम रोगों की शुरूआत होती है।  कोलेस्‍ट्राल की ज्‍यादा मात्रा के कारण लोगों को हृदय से जुड़ी बीमारियां होती है। आपको आगे चलकर हार्ट से जुड़ी किसी दिक्‍कत का सामना न करना पड़े और आपका दिल हमेशा स्‍वस्‍थ रहे इसके लिए आपको अभी से सतर्क रहना पड़ेगा। खान-पान में सुधार और एक्‍सरसाइज के द्वारा आप लंबे समय तक खुद को फिट रखने के साथ  हृदय संबंधी रोगों से हमेशा के लिए दूर रह सकते है। लेकिन इसके साथ ही आप कुछ सप्‍लीमेंट लेकर भी खुद को दिल से जुड़ी बीमारियों से बचा सकते हैं। आइए ऐसे ही कुछ सप्‍लीमेंट के बारे में जानकारी लेते हैं जो आपको हृदय रोग से बचाने में खास भूमिका निभाते हैं।
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विटामिन डी

शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम होने पर कार्डियोवैस्कुलर संबंधी रोग का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक की इससे आपका हार्ट फेल भी हो सकता है और आपको हार्ट अटैक हो सकता है। जिनके शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम होती है उन्‍हें हृदय से संबंधित बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज, मोटोपे की समस्‍या, हाई ब्‍लड प्रेशर और हाई कोलेस्‍ट्रॉल की परेशानी होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। इसलिए आपको विटामिन डी के सप्‍लीमेंट को अपने दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
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मैग्नीशियम

कुछ अध्‍ययनों के अनुसार मैग्‍नीशियम की कमी से उच्‍च रक्‍तचाप का खतरा बढ़ा जाता है। जबकि कुछ अन्‍य अध्‍ययनों से पता चला है कि मैग्‍न‍ीशियम सप्‍लीमेंट लेने से दिल की बीमारी से होने वाले मौत का जोखिम कम हो जाता है। मैग्‍नीशियम दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। कोरोनरी हार्ट डिजीज से बचाव के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन कीजिए। यदि शरीर में मैग्‍नीशियम की कमी हो जाये तो दिल के दौरे का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिल को मजबूत बनाने के लिए मैग्‍नीशियम का सेवन भरपूर मात्रा में कीजिए।
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नेसिन यानी विटामिन बी3

एक अध्‍ययन के अनुसार नेसिन यानी विटामिन बी3 शरीर में बैड कोलेस्‍ट्राल की मात्रा को कम करता है। विटामिन बी3 के लिए आप बाजार में मिलने वाली 'इजेटिमिबे' का सेवन कर सकते हैं। इजेटिमिबे के सेवन से बैड कोलेस्‍ट्राल को कम किया जा सकता है, जिससे शरीर में एलडीएल की मात्रा कम हो जाती है। बैड कोलेस्ट्राल अथवा एलडीएल के शरीर में बढ़ने से कार्डियोवैस्कुलर संबंधित बीमारी हो सकती हैं। जब एलडीएल की खून में मात्रा बढ़ जाती है तो यह हृदय और मस्तिष्क की धमनियों को ब्लॉक कर देता है। ऐसे में दिल का दौरा, धमनियों में रुकावट या स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती है।
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ओमेगा 3 फैटी एसिड

मछली के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड सबसे ज्‍यादा मात्रा में पाया जाता है और यह दिल के लिए बहुत ही गुणकारी होता है। जो व्‍यक्ति अपने खाने में फैटी एसिड का इस्‍तेमाल करते हैं वे स्‍वस्‍थ रहते हैं और उन्‍हें कार्डियोवैस्कुलर से संबंधित रोगों का सामना न के बराबर करना पड़ता है। कई शोध और अध्‍ययन से भी यह बात स्‍पष्‍ट हो चुकी है कि ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है। इसके साथ ही यह शरीर में ट्राइग्लिसराइड लेवल को भी कम करता है। इसके सेवन से ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या भी कम होती है।
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लहसुन

खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ लहसुन एक औषधि का भी काम करता है। लहसुन आपके दिल के लिए अत्‍यंत लाभकारी होता है। लहसुन आपके शरीर में बैड कोलेस्‍ट्रोल का स्‍तर कम करता है। इससे आपका दिल हमेशा सेहतमंद रहता है। लहसुन शरीर में गुड कोलेस्‍ट्रोल के स्‍तर को बढ़ाने का भी काम करता है। उच्‍च रक्‍तचाप को दूर करने में भी लहसुन काफी फायदेमंद होता है। हाई बीपी के मरीज अगर नियमित रूप से लहसुन का सेवन करते रहें तो इससे उनका बीपी नॉर्मल रखने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद एलिसिन नामक तत्व हाई बीपी को सामान्य करने में मददगार है।
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कोएंजाइम क्‍यू 10

कोएंजाइम क्‍यू 10 दिल संबंधी बीमारियों से बचाव और इनके उपचार में बहुत ही लाभदायक है। कोएंजाइम क्‍यू 10 कोशिकाओं में रक्‍त के धक्‍के जमने से रोकता है। इसके साथ ही यह मानव शरीर के लिए एंटीऑक्‍सीडेंट का काम भी करता है। अध्‍ययनों के अनुसार जो लोग प्रत्‍येक तीन दिन में कोएंजाइम क्‍यू 10 सप्‍लीमेंट की खुराक लेते हैं उन्‍हें दूसरे लोगों की तुलना में हार्टअटैक का खतरा बहुत कम होता है। इसके साथ ही उन्‍हें सीने में होने वाली दर्द की शिकायत भी नहीं होती। इसके अलावा कोएंजाइम क्‍यू 10 लेने वाले लोग सप्‍लीमेंट न लेने वाले लोगों की तुलना में हृदय रोग से मृत्‍यु की संभावना बहुत कम होती है।
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गुग्गुल

गुग्गुल एक वृक्ष का नाम है। इससे प्राप्त लार जैसे पदार्थ को भी 'गुग्गल' कहते है। इसकी महक मीठी होती है और आग में डालने पर वह स्थान सुंगध से भर जाता है। इसका स्‍वाद कड़वा और कसैला होता है और इसकी प्रवृत्ति गर्म होती है। गुग्‍गुल कफ, वात, कृमि और अर्श नाशक होता है। इसके अलावा इसमें सूजन और जलन को कम करने के गुण भी होते हैं। रक्तचाप के स्तर को कम और सामान्य स्तर पर बनाए रखने में गुग्‍गुल बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा गुग्‍गुल दिल को मजबूत रखता है और दिल के टॉनिक के रूप में जाना जाता है।
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आर्गीनाइन

आर्गीनाइन एक प्राकृतिक अमीनो एसिड है। इसमें मौजूद नाइट्रिक ऑक्‍साइड नामक शक्तिशाली तत्‍व, जो रक्‍त वाहिकाओं के फैलाव बढ़ाकर दिल को दुरुस्‍त रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह रक्‍तचाप को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। एक ताजा अध्‍ययन के अनुसार, आर्गीनाइन सप्‍लीमेंट फैट से भरपूर आहार के कारण होने वाले वैस्‍कुलर डिस्फंगक्शन को रोकने में मदद करता है।   
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लाइकोपीन

लाइकोपीन कई फलों और सब्जियों में पाया जाता है, लेकिन टमाटर लाइकोपीन का मुख्य स्रोत हैं। लाइकोपीन मजबूत एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण भी जाना जाता है। अध्ययनों के अनुसार जिन लोगों के रक्त में लाइकोपीन का उच्च स्तर पाया जाता है उन लोगों को हृदय रोग का जोखिम अन्‍य लोगों से कम होता है। एक ताजा अध्ययन में लाइकोपीन के निम्नतम स्तर वाले पुरुषों में कोरोनरी या स्ट्रोक की समस्‍या का जोखिम अन्‍य पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होता है।  कोरोनरी हृदय रोग की रोकथाम में लाइकोपीन की अहम भूमिका होती है। जबकि लाइकोपीन का कम प्‍लाज्‍मा स्‍तर धमनियों की दीवारों पर प्‍लॉक की मोटाई को बढ़ा देता है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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