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हर बात पर माफी मांगने की आदत करें दूर

क्या आपकी जान पहचान में कोई इंसान कोई इंसान ऐसा है जिसको देखकर आपको ऐसा लगता है कि वो अकसर बेवजह ही मांफी मांगता है? ये आदत शायद आपके अंदर भी हो सकती है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Dec 18, 2014

हर बात पर क्‍यों मांगते हैं माफी

यूं तो अपनी गलती पर माफी मांग लेना अच्‍छी आदत है, लेकिन हर बात पर माफी मांगना नहीं। आपके जान-पहचान में भी कोई ऐसा हो सकता है जो बात-बात में माफी मांगता है। यह भी संभव है कि आप खुद ऐसे ही हों कि जो माफी मांगकर बात खत्‍म करने में विश्‍वास रखते हों। लेकिन, यह आदत बुरी है। इससे लोग आपके आत्‍मसम्‍मान को ज्‍यादा तवज्‍जो नहीं देते और आपकी बातों को नजरंदाज करने लगते हैं। तो चलिये जानें कि हर बात पर माफी मांगने की आदत को क्यों और कैसे दूर किया जा सकता है।
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ध्यान से सुनें

हर समय माफी मांग की आदत को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि आप कब, क्या, कैसे, क्यूं और किससे बोल रहे हैं। ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि माफी मांगने लायक कोई बात हुई है। अपन आस-पास की जगह और परिस्थितियों व घटनाओं का ध्यान रख कर आप इस आदत से बच सकते हैं।
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अपनी भावनाओं को स्वीकारें

हर बात पर माफी मांगने की आदत को छोड़ने के एक और तरीका यह भी है कि आप माफी मांगने के बाद कैसा महसूस करते हैं। इसके बाद होने वाली भावनाओं को स्वीकार कर पाते हैं या नहीं। जब आप हर बात पर माफी मांगते हैं तो यह आदत समय के साथ आपके आत्मसम्मान को कम कर सकती है। साथ ही इससे लोगों को यह संदेश जा सकता है कि आप आत्मनिर्भर नहीं हैं और जो भी करते हैं उसके लिए आपको दूसरों की अनुमति की जरूरत होती है।   
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ईमानदार बनें

खुद के साथ ईमानदार होना बार-बार माफी मांगने की आदत को दूर करने की दिशा में अहम कदमों में से है। ये समझने की कोशिश करें कि क्या जिन छोटी-छोटी बेवजह की बातों के लिए आप माफी मांग रहे हैं, क्या वास्तव में आपको उनके लिये क्षमा-प्रार्थी होना चाहिए? कहीं ऐसा तो नहीं कि हर बात पर माफी मांगने की आपकी ये आदत आपकी वास्तविक भावनाओं को बाहर आने से रोक रही हो।  
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ना कहें

हर बात पर माफी मांगने की आदत को छोड़ने के लिए आपको 'ना' कहना भी सीखना होगा। इस बात को समझें कि आप सभी को खुश नहीं रख सकते। और इंसानों के लिए ऐसा संभव है भी नहीं। तो ऐसे कामों के लिए हामी न भरें जिन्हें करना आपके लिये संभव नहीं है।

पहचानें की माफी कब मांगनी है

हालांकि हम हर समय माफी मांगने की आदत को दूर करने की बात कर रहे हैं, लेकिन माफी मांगने का एक निश्चित समय और अपनी जगह होती है। जिन्हें पहचानना और इनका ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। तो इस बात का ध्‍यान रखें कि आपने कब और कहां सॉरी कहना है।
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पहचानें की माफी कब नहीं मांगनी है

कभी भी माफी मांगते रहने की आदत को दूर करने के मौलिक तरीकों में से एक है कि आप पहचानें की माफी कब नहीं मांगनी है। जी हां, यदि आप जिम से एक्सरसाइज करके लौटे हैं और पसीने से तर हैं, या निकलते वक्त मेज से आपका पेट हल्का सा टकरा गया तो इसमें सॉरी बोलने जैसा कुछ भी नहीं है।     
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अपनी रोजमर्रा की शब्दावली को बदलें

अपनी रोजमर्रा की शब्दावली को बदलने से बात बात कर माफी मांगने की आदत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सॉरी और थैक्यू को बेहद औपचारिक शब्द बनाने के बजाय प्रभावी भावनाएं बनाएं और सौहार्द्र पैदा करें।
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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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