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बुढ़ापे से जुड़े ये 5 मिथ लोगों को लगते हैं सच

वृद्धावस्था को लेकर मन में पहले से बनी नकारात्‍मक धारणाएं लोगों को डराती हैं। शोधकर्ताओं ने शोध कर इस विषय से जुड़ी कुछ सच्चाइयों को सामने लाया है, ताकि हमारी बुढ़ापे को लेकर ये नकारात्मक सोच बदल सके और हम सच से रूबरू हो सकें।

तन मन By Rahul SharmaMar 28, 2016

वृद्धावस्था से जुड़े मिथ और सच


हम लोगों में बढ़ती उम्र को लेकर एक अजीब सी बेचैनी और डर होता है। इसका कारण हैं वृद्धावस्था को लेकर मन में पहले से बनी नकारात्‍मक धारणाएं।
बुढ़ापे को लेकर मन में एक आम सोच होती है कि बुढ़ापे में उन्‍हें दूसरों पर आश्रित रहना पड़ेगा, शरीर और दिमाग साथ छोड़ देगा, बीमारियां घेर लेंगी आदि। सौभाग्‍य से हम लोगों की इस गलत धारणां को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने शोध कर इस विषय से जुड़ी कुछ सच्चाइयों को सामने लाया है, ताकि हमारी बुढ़ापे को लेकर ये नकारात्मक सोच बदल सके और हम सच से रूबरू हो सकें। देखिये ज्यादा फर्क उम्र से नहीं बल्कि सिर्फ हमारे सोचने के तरीके से पड़ता है। तो चलिये जानते हैं वृद्धावस्था से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ और इनके पीछे के साच को -
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वृद्धावस्था मतलब हमेशा बीमार रहना


वृद्धावस्था का मतलब बीमारियां होना बिल्‍कुल नहीं है। इस बात में कोई शक नहीं कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की क्षमता में थोड़ी गिरावट आती है, लेकिन अगर यदि जवानी से लेकर वृद्धावस्था तक पोषक तत्‍वों पौष्टिक भोजन खाएं और नियमित व्यायाम और योग आदि करें तो बढ़ती उम्र में भी बीमारियां नहीं होती हैं।
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बढ़ती उम्र के साथ बदल जाती हैं सारी आदतें


एक आम धारणा है कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों कि जिंदगी नियम कायदों में बंध जाती है। और एक उम्र के बाद लोगों के स्‍वभाव में ज्‍यादा परिवर्तन आ जाता है। हालांकि वास्तव में उम्र के साथ लोग और भी ज्यादा बेहतर बन पाते हैं और जीवन को बेहतर ढ़ंग से जीना और इसका आनंद लेना सीख पाते हैं। यहां तक कि यदि स्वस्थ जीवनशैली का पालन किया जाए तो खाने-पीने की आदतों को बदलने की भी जरूरत नहीं होती है।
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जोड़ों और शरीर में हमेशा दर्द रहता है


हम अकसर लोगों को कहते सुनते हैं कि वृद्धावस्था में हड्डियां कमजोर हो जाती है और जोड़ों में हमेशा दर्द रहता है। लेकिन ऐसा सच नहीं है, यदि युवावस्था से ही शरीर का ध्यान रखा जाए और नियमित व्यायाम और स्वस्थ खान-पान का पालन किया जाए तो इस उम्र में भी हड्डियों से सम्‍बंधित कोई समस्‍या नहीं होती है और आप चुस्त-दुरुस्त रहते हैं।
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सभी क्षमताएं और इच्छाएं खतम हो जाती हैं


एक सबसे बड़ा डर लोगों में देखा जाता है कि वे मानते हैं कि 30-40 की उम्र पार करते ही कामेक्षा खतम हो जाती है। हालांकि ये सच नहीं है, देखिये 70 साल की उम्र के बाद कामेच्‍छा में कमी आ सकती है, लेकिन इस समय तक आप स्वस्थ जीवनशैली और नियमित योग और व्यायाम कर दांपत्य जीवन का आनंद ले सकते हैं।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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