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अवसाद के ये लक्षण नजर आने पर करें डॉक्‍टर से संपर्क

हम सब जीवन में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन अर्थात अवसाद उससे कहीं अधिक गहरा, लंबा और दुखद होता है। इसलिए इसका सही समय पर निदान बेहद आवश्यक है।

अवसाद By Rahul SharmaOct 06, 2014

अवसाद के लक्षण

हम सब जीवन में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन अर्थात अवसाद उससे कहीं अधिक गहरा, लंबा और दुखद होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष जो दस लाख लोग आत्महत्याएं करते हैं, उसके मूल में मानसिक तनाव अहम कारक है। अवसाद के चलते कई तरह के मनोरोग विकसित होते हैं। कोई असामान्य परिस्थिति दिखाई देने पर यदि समय रहते अवसादग्रस्त व्यक्ति का इलाज किया जाये तो वह ठीक हो सकता है लेकिन जागरूकता के अभाव में ऐसा नहीं हो पा रहा है। इसलिए अवसाद के लक्षणों को पहचानना और समय रहते डॉक्टर के पास जाना बेहद जरूरी होता है।
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अवसाद के प्रकार

विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन मुख्यतः चार, क्लिनिकल और मेजर डिप्रेशन, बाइपोलर या मैनिक-डिप्रेसिव विकार, पोस्टपार्टम डिप्रेशन (बच्चे को जन्म देने के बाद होने वाला अवसाद) तथा सीजनल अफेक्टिव विकार (इससे भारतीय जल-वायु में रहने वाले लोग कम ही प्रभावित होते हैं।) का होता है।
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बाइपोलर या मैनिक-डिप्रेसिव विकार

बाइपोलर विकार की दो अवस्थाएं होती हैं। पहली उन्मत्त (उन्मुक्तता का चरम) व दूसरी अवसादग्रस्तता। पहले चरण में मरीज को भव्यता का भ्रम होता है, और वह अति आत्मविश्वास हो जाता है। रोगी हर पल खुद को उड़ता हुआ जैसा महसूस करता है। यही नहीं उसकी सेक्स की इच्छा भी बढ़ जाती है। इसके बाद दूसरा चरण अवसादग्रस्तता का होता है। इसके लक्षण अवसाद जैसे ही होते हैं।  
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दुखी रहना

यदि किसी खुशी के मौके पर कोई व्यक्ति खुश नहीं हो पाए और बेहद गमगीन मौके पर भी वह बहुत ज्यादा दुखी न हो ता हो तो  सतर्क होने की ज़रूरत होती है। डॉक्टर कहते हैं ये अवसाद का ही एक मुख्य लक्षण होता है।  
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मिज़ाज में बदलाव

मूड यानी मिज़ाज. सामान्य उदासी इसमें नहीं आती लेकिन किसी भी काम या चीज़ में मन न लगना, कोई रुचि न होना, किसी बात से कोई खुशी न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद का लक्ष्ण है.
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नींद ना आना या बहुत आना

शारीरिक बदलाव, जैसे नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना भी एक लक्षण होता है। वहीं बीच रात को नींद खुल जाना, खासतौर पर यदि यह दो सप्ताह से अधिक चले तो अवसाद का लक्षण होता है।
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भूख में बदलाव

भूख में बदलाव होना भी अवसाद का लक्षण हो सकता है। अचानक बहुत खाना खाने लगना या फिर बहुत कम भूख लगना भी इसके संकेत हो सकते हैं। वहीं इसमें लगातार थकान और ऊर्जा की कमी भी महसूस होती है।
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दर्द होना

शरीर में लगातार अगल-अलग प्रकार के दर्द महसूस होना, जैसे सिरदर्द, पेट में मरोड या ऐंठन होना, खाना न पचना, इलाज के बावजूद अपच की समस्या दूर न होना आदि भी अवसाद के लक्षण हो सकते हैं।
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बड़े मानसिक लक्षण

लगातार उदासी, बैचैनी या रिक्तता का एहसास, निरंतर निराश रहना या निराशावादी होना, शर्मिंदगी, अपराधबोध, मूल्यहीनता, अयोग्यता और लाचारी का भाव, कामों में दिलचस्पी न लेना तथा एकाग्रता की कमी, बातें भूल जाना, निर्णय न ले पाना आदि भी अवसाद के लक्षण हो सकते हैं।  
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आत्महत्या का विचार या कोशिश

अवसाद बहुत अध्क होने के गंभीर लक्षणों के रूप में मन में आत्महत्या का विचार आ सकता है या कोई व्यक्ति अवसाद में आत्महत्या की कोशिश भी कर सकता है। ऐसा कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।  
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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