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संकेत जो बताते हैं कि आपके आत्मसम्मान में आ रही है कमी

आत्मसम्मान एक सफल और सुखी जीवन का आधारभूत तत्व होता है, लेकिन कई बार कुछ बाहरी कारणों के चलते हमारा आत्मविश्वास कमजोर भी पड़ सकता है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Oct 10, 2014

आत्मसम्मान में कमी

आत्मसम्मान एक सफल और सुखी जीवन का आधारभूत तत्व होता है। कोई इंसान आत्मसम्मान के अभाव में सफल तो हो सकता है, और बाहरी उपलब्धियों भरा जीवन भी जी सकता है, लेकिन ऐसे में वह अंदर से सुखी, संतुष्ट और संतृप्त नहीं रह पाता। आत्मविश्वास  सहज स्वीकृति, स्व-प्रेम और स्व-सम्मान की व्यक्तिगत अनुभूति होती है, जो दूसरों की प्रशंसा, निंदा और मूल्यांकन आदि चीजों से आज़ाद होती है। इसलिए अपना आत्मविश्वास बनाये रखना बेहद जरूरी होता है। लेकिन कई बार कुछ बाहरी कारणों के चलते हमारा आत्मविश्वास कमजोर भी पड़ सकता है। जिसके लक्षम कुछ इस प्रकार से होते हैं।  
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अपने बजाए लोगों की चिंता

आत्मसम्मान में कमी अक्सर तब भी आती है जब आप अपने लिए कुछ करते हैं, लेकिन यह सोचने लगते हैं कि और लोग इस बारे में क्या सोचते हैं। तो आपकी और लोगों की सोच के बीच ये विसंगति कई बार आत्मसम्मान में कमी का कारण बन जाती है।  
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दुविधा में पड़ा होने के नाते

छोटे-छोटे और सरल से निर्णय लेने, जैसे सुबह में आप क्या पहने या क्या आप पर ज्यादा सूट करेगा आदि लेने में भी परेशानी होना आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। निर्णय लेने में सक्षम में कमजोरी आपके जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित करता है।
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पूर्णतावादी होना

परफैक्शन अर्थात हर काम को चोटी के दर्जे तक सही करने की लत आपके आत्मसम्मान को चोट पहुंचा सकती है। क्योंकि जब कोई काम गलत हो जाता है या काम नहीं करता तो आप खुद को इसके लिए दोषी ठहराने लगते हैं।
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आलोचना सहने में असमर्थता

हर बार जब कोई आपकी आलोचना करता है, तो यह अपने आत्मसम्मान को कम करता है। लेकिन औरों की निंदा से विचलित होने या आत्मसम्मान खोने के बजाये आपको अपनी आत्मा की आवाज सुननी चाहिए।
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नकारात्मक सोच

लगातार नकारात्मक उपलब्धियों और अपने काम कमतर आंकना आत्मसम्मान में कमी के लिए नेतृत्व कर सकता है। इसलिए अपनी मेहनत के मूल्य को समझना चाहिए और कुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए।  
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भविष्य की चिंता

लगातार भविष्य के बारे में चिंता करना और अपने आप को इसके तनाव में रखना, आत्मविश्वास में कमी का कारण बनता है। यह संकेत होता है कि आप खुद पर भरोसा नहीं करते हैं और आपका आत्मसम्मान कम हो सहा है।
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शारीरिक उपस्थिति

जब आप अपनी शारीरिक उपस्थिति के बारे में देखभाल बंद कर देते हैं, तो यह यह कम आत्मसम्मान की निशानी होती है। अपनी देख-भाल करने व ठीक तरह से तैयार होने आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद मिलती है।
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बहाने बनाना या दोषारोपण

यदि आप पाते हैं कि जब आपसे कुछ करने के लिए कहा जाता है, या जब आपसे कोई खाम खराब हो जाता है तो आप बहाने बनाने लगते हैं या लोगों पर इसका दोष लगाने लगते हैं, तो यह संभवतः आपके कमजोर होते आत्मसम्मान की निशानी होता है।
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अधिक निर्भरता और सीमा तय कर पाना

अगर आप लगातार हर काम के लिए दूसरे लोगों की मंजूरी का इंतज़ार करते हैं और उन पर निर्भर रहते हैं तो इस आदत को बदल डालें। अगर किसी भी काम को करने के लिए आपको किसी की मंजूरी की जरूरत है, तो वो हैं खुद आप। वहीं खुद के लिए सीमाएं तय करने में असमर्थता भी आत्मसम्मान की कमी की निशानी है।  
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निराशावादी होना

नकारात्मक विचारों से सब कुछ मुश्किल लगने लगता है और जीवन के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण बनने लगता है। निराशा की भावना किसी व्यक्ति को अवसाद की ओर धकेल देती है। यह आत्मसम्मान की कमी की निशानी है। वहीं बदलाव के प्रति मन में भय की भावना भी आपके भीतर की कमजोरी को दर्शाती है।  
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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