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बच्चों पर ना डालें पढ़ाई का ज्यादा दबाव, झेलना पड़ सकता है ये नुकसान

बच्चों की परवरिश करना आसान काम नहीं होता, क्‍योंकि आप जो सिखाते हैं बच्‍चे वही सीखते हैं, इसलिए कुछ बातों से बच्‍चों को दूर रखना चाहिए, यहां विस्‍तार से जानिये ऐसी कौन सी बाते हैं जो बच्‍चों से शेयर नहीं करना चाहिए।

परवरिश के तरीके By Rashmi UpadhyayFeb 16, 2018

सोच समझ कर कहें बात

बच्चों की परवरिश करने में मां-बाप कोई कमी नहीं रखते पर फिर भी जाने-अनजाने कुछ ऐसी बातें बोल जाते है जो सही नहीं होती है। मां-बाप गुस्से में कभी कुछ गलत बोल देते हैं तो कभी-कभी अनजाने में बच्चों के बीच तुलना कर बैठते हैं। इस तरह की बातें बच्चों के दिमाग में घर कर जाती है। बच्चे संवेदनशील होते हैं। छोटी उम्र में अगर उनके दिमाग में इस तरह की बात बैठ जाएं तो इसका दूरगामी परिणाम हो सकता है। इस स्लाइडशो में पढ़ें कि मां-बाप को अपने बच्चों से कौन सी बातें नहीं करनी चाहिए।

खुद से ना करें तुलना

पढाई के लिए बच्चों पर प्रेशर नहीं डालना चाहिए। पर इसका मतलब ये भी नहीं होता कि आप बच्चों के साथ लापरवाही भरा व्यवहार करें। बच्चों से ये कहना कि मैं भी पढ़ाई में अच्छा नहीं था, उनकी मानसिकता पर गलत प्रभाव डाल सकता है। वो पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेगें। जो शायद आपको आगे चलकर अच्छा ना लगे। तो कभी भी अपने बच्चे को ये कहकर रिलैक्स भी मत कराइए। 

मेरी नहीं सुनोगे तो ऐसा ही होगा

बच्चे शैतान होते हैं। आपके कई बार कहने के बावजूद वो शरारतें करना नहीं बंद करते। नतीजन चोट का भी शिकार हो जाते। ऐसे समय पर मां-बाप को उन्हें ये याद नहीं दिलाना चाहिए कि वो इस तरह के काम के लिए कितनी बार टोक चुके है। इस समय बच्चे का मन परेशान होता है। वो डर जाता है पर जो सावधानी का पाठ आप उसे पढ़ाना चाहते है वो नहीं सीखता।
ImageCourtesy@gettyimages

आने दो तुम्हारे पापा को

आम भारतीय घरों मे पापा के नाम की ये धमकी अक्सर ही सुनने को मिल जाती है। घर में पापा के नाम पर जो अनुशासन सिखाने की कोशिश होती हो वो बच्चों को उद्दंड या फिर डरपोक बना देती हैं। इससे बच्चों के मन में पापा के प्रति प्यार की जगह खौफ बस जाता है। इसलिए बच्चों को कभी भी इस तरह धमकी ना दें।

आई एम ऑन डाइट

अगर आप अपना वजन कम कर रहे तो बच्चों को ये बात ना बताएं। अघर बच्चा रोज आपको वजन की बात करते , वजन मापते आदि देखे गा तो उसमें भी वजन को लेकर चिंता हो सकती है। वो बेवजह ही खुद को मोटा मान लेते है। ये बातें उनमें गलत आदतों को बढ़ावा देती है। इसलिए बच्चों को कुछ चीजों से अलग रखना चाहिए या फिर उन्हें उसके बारे में सकारात्मक बात बतानी चाहिए।
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तुम स्मार्ट हो पर तुम्हारी बहन सुंदर

बच्चों के बीच किसी भी प्रकार की तुलना उनमें अंहकार या हीनभावना ला सकती है। इसलिए कभी भी दो बच्चों के बीच तुलना ना करें। हर बच्चा अपने मे खास होता है। सिर्फ उसके गुणो के बारे मे ही बात करें। अगर आप उसके दूसरे भाई-बहन से तुलना करेंगी वो आपस में प्यार की जगह अंहकार या हीनभावना आ जाएगी। जो उनके आपसी रिश्तो को भी प्रभावित करती है।

हर समय़ ताना

मां-बाप अपने बच्चों को सिखाने के लिए हमेशा ताने मारते रहते है। ये आदत गलत है। ताने बच्चों को गुस्सैल बना देते है। बार-बार एक ही बात को बोलते रहने से वो उसकी अहमियत नहीं करते। वैसे भी बच्चों को डांटने की बजाय प्यार से समझाना चाहिए। बार-बार उन्हें ये ताना देना कि वो कोई भी काम ठीक से नहीं कर सकते उनमे जिद और गुस्सा पैदा करता है।
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अरे इसे करने में कैसा डर

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए अक्सर हम उन्हे बोल देते है। अरे ये काम करने में कैसा डर, इसको बड़ी आसानी से किया सकता है या फिर इसको करने में कुछ नहीं होगा। ये गलत तरीका है अपने बच्चों के डर को दूर भगानें का। अपने बच्चे के डर को सुने, उसे समझे और प्यार से उस डर को दूर करने की कोशिश करें। 

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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