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सात आदतें जो दिल को रखें स्वस्थ और बढ़ायें आपकी उम्र

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार कुछ स्वस्थ आदतें किसी व्यक्ति और उसके दिल को तो स्वस्थ रखती ही हैं, बल्कि उसकी उम्र भी बढ़ाती हैं। ये आदतें हर व्यक्ति को अपनानी चाहिए।

हृदय स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul SharmaSep 25, 2014

दिल के लिए स्वस्थ आदतें बढ़ाएंगी आयु

अमेरिका में 44,959 (20 साल व इससे ऊपर के) वयस्कों के व्यवहार की जांच पर किए एक अध्ययन के परिणामों तथा स्टेण्डफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार कुछ स्वस्थ आदतें व्यक्ति और उसके दिल को स्वस्थ तो रखती ही हैं, बल्कि उनकी उम्र भी बढ़ाती हैं। शोधों में पाया गया कि जो व्यक्ति नियमित व्यायाम करते हैं, धूम्रपान नहीं करते, आलसी नहीं होते और पौष्टिक आहार समय से हैं, वे अन्य व्यक्तियों की तुलना में लंबी आयु जीते हैं और उन्हें स्वास्थ्य और दिल संबंधी परेशानियां भी कम होती हैं। तो चलिये जानें सात आदतें जो दिल को स्वस्थ रखती हैं और उम्र भी बढ़ाती हैं।
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सिगरेट को कहें ना

अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक, बहुत ज्यादा धूम्रपान करने वाले लोगों का जीवनकाल आठ साल तक घट सकता है। वहीं सिगरेट अधिक पीने कैंसर, दिल के रोग, याद्दाश्त संबंधी समस्याएं, झुर्रियां और बाल सफेद होने जैसी समस्याएं होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
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खुद को एक्टिव रखें

दिनभर टीवी के सामने बैठे रहने, सोफे या पलंग पर लेटे-लेटे कंप्यूटर पर काम करना आदि कुछ ऐसी अनहेल्दी आदतों हैं जो न सिर्फ आपको हृदय रोग होने का जोखिम काफी बढ़ा देती हैं, बल्कि आयु को भी कम करती हैं। यदि आप एक्टिव रहेंगे तो उम्र ढलने के बाद गठिया, डायबिटीज व ऐसे ही कई अन्य रोगों की आशंका कम होगी।
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रक्तचाप के स्तर को सामान्य बनाए रखना

रक्तचाप के स्तर को सामान्य बनाए रखना भी दिल और सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। रक्तचाप माप डायस्टोलिक व सिस्टोलिक के संदर्भ में लिखे जाते हैं। नेश्नल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ के अनुसार, सिस्टोलिक प्रेशर हार्ट बीट्स को कहा जाता है, वहीं डायस्टोलिक प्रेशर धड़कनों के बीच दिल द्वारा लिया गया विराम होता है। सामान्य रक्त चाप वाले किसी व्यक्ति का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर पारे का 120 मिलीमीटर या कम तथा डायस्टोलिक बल्ड प्रेशर पारे का 80 मिलीमीटर या कम होना चाहिए।
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बल्ड ग्लूकोज़ लेवल सामान्य बनाए रखना

रक्तचाप के अलावा बल्ड ग्लूकोज़ लेवल सामान्य बनाए रखना भी एक अच्छी आदत है। वेबएमडी साइट के अनुसार, रक्त में लंबे समय तक ग्लूकोज का उच्च स्तर (शुगर का एक प्रकार) गुर्दे और रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए नियमित रूप से बल्ड ग्लूकोज़ लेवल की जांच कर इसे सामान्य बनाए रखना चाहिए। खाली पेट अर्थात फास्टिंग शुगर 100 तक और खाना खाने के बाद अर्थात पीपी 140 तक होना चाहिए।
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कॉलेस्ट्राल का स्तर सामान्य बनाए रखना

कालेस्ट्राल का अच्च स्तर हृदय संबंधी रोगों का मिखाय कारण होता है। इसलिए इसके स्तर पर नियंत्रण बना कर रखें। इसके लिए ऐसे आहार खाएं जिनसे शरीर में कालेस्ट्राल का स्तर नियंत्रित में रहे। क्योंकि कालेस्ट्राल का स्तर हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। सेब और संतरे जैसे फल, प्याज़, ब्रोकोली जैसी सब्जियां और मछली आदि का सेवन नियमित करें।
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वजन निंयत्रित रखना

हृदय की बीमारी और आयु कम होने का एक बड़ा कारण कमर पर जमा अतिरिक्त वसा भी होता है। वजन हमेशा आपकी लंबाई के हिसाब से होना चाहिए जो पूरी तरह फिट होने का मापदंड होता है। इसके लिए जरूरी है आपके बॉडी मास इंडेस्क अर्थात बीएमआई स्तर की जानकारी रखें। बीएमआई, आपके शरीर का वजन और लंबाई का रेशियो होता है। इसे जांचने का फार्मुला है- बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में))।
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हेल्दी खाना खाएं

न्यूट्रीशस और हेल्दी डाइट लें और वो भी समय से। संतुलित आहार का मतलब ऐसे आहार से है, जिसमें काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन आदि की पर्याप्त मात्रा हों। अधिक तेलीय औॉर चटपटा न खाएं। साथ ही तेलों का सही बैलेंस भी जरूरी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं। ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल बेहतर होता है। इससे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। इसके अलावा फाइवर फूड और औमेगा 3 फैटा एसिज वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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