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होली में हुड़दंग के साथ हानिकारक रंगों से बचाव भी जरूरी

होली में प्रयोग किये जाने वाले रंगों में केमिकल होता है जो त्‍वचा और आंखों के लिए बहुत नुकसानदेह है, इसलिए ईको फ्रेंडली होली खेलें।

त्‍यौहार स्‍पेशल By Nachiketa Sharma / Mar 14, 2014

होली और रंग

होली रंगों का त्‍योहार है, ऐसे में रंगों के साथ हूड़दंग न हो ऐसा कैसे हो सकता है। लोग होली को रंगीन बनाने के लिए कई तरह के रंगों का प्रयोग करते हैं। लेकिन क्‍या आपको पता है बाजार में मिलने वाले रंगों में केमिकल होता है जो आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि ये रंग आंखों में चले जांयें तो जलन भी हो सकती है। आगे के स्‍लाइडशो में जानिए होली में इन हानिकारक रंगों से कैसे बचें।

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हानि‍कारक रंग

बाजार में जो रंग मिलते हैं उनमें कई प्रकार के हानिकारक केमिकल होते हैं जो त्‍वचा और स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से सही नहीं हैं। इन रंगों में उपयोग में लाए जाने वाले पदार्थ ऑक्सीकृत धातुओं से बने होते हैं। हरा रंग कॉपर सल्फेट से बनाया जाता है, जिसे आम भाषा में तूतिया कहा जाता है। इसे नंगे हाथों से छूने से लोग हिचकिचाते हैं, लाल रंग पारे के सल्फाइड में बनता है तो काला रंग शीशे के ऑक्साइड से, इसके अलावा इन रंगों में मिलाए जाते हैं एस्बेस्टस, खड़िया पावडर या सिलिका जो आपको बीमारी बनाते हैं।

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ईको फ्रेंडली होली

आपने हर बार हानिकारक रंगों का प्रयोग होली में किया है तो इस बार ईको फ्रेंडली होली मनाइए। ईको फ्रेंडली होली खेलकर आप पानी की बर्बादी को रोकते हैं। साथ ही खतरनाक और एलर्जी पैदा करने वाले केमिकलयुक्‍त रंगों से खुद को भी बचाते हैं।

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नैचुरल रंग

इस होली में आप अपने घर पर ही प्राकृतिक रंग बनाइए। नैचुरल जड़ी-बूटियों से बना रंग सुगंधित तो है ही साथ ही यह आपको हानिकारक रंगों से बचाता भी है। आप आसानी से फूलों और जड़ी बूटियों के प्रयोग से पीली, नीला, हरा, लाल रंग अपने घर में बना सकते हैं।

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बालों को बचायें

होली के हानिकारक रंग अगर बालों में चले गये तो आसानी से नहीं छूटते हैं, इसलिए होली में बालों को रंगों से बचाना बहुत जरूरी है। इसलिए यदि आप रंगों से नहीं बच स‍कते तो होली खेलने से पहले बालों में बादाम या जैतून का तेल लगा लें। इससे बाद में बालों को धोने से रंग छूट जाते हैं।

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मॉइश्‍चराइजर का प्रयोग

केमिकलयुक्‍त रंगों का सबसे ज्‍यादा असर त्‍वचा पर पड़ता है। हानिकारक रंगों से त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते हैं, जिसे अरटिकेरिया कहते हैं। ज्यादा मिलावट की वजह से एलर्जिक डर्मेटाइटिस हो जाती है। यदि इसका सही समय पर इलाज न हुआ तो एक्जिमा एवं कैंसर का रूप ले सकता है। यदि आप रंगों के संपर्क में आने से पहले माइश्‍चराइजर लगा लेंगे तो कुछ हद तक इससे बचाव संभव होगा।

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आंखों को बचायें

आपकी आंखें अनमोल हैं, इनको होली में प्रयोग होने वाले हानिकारक रंगों से बचाना बहुत जरूरी है। आंखों में हानिकारक रंगों के दुष्प्रभाव से जलन, खुजली व पानी आता है और आंख लाल हो जाती है, कार्निया में अल्सर तक पड़ जाता है, आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

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मुंह पर रंग न मलें

होली खेल रहे हैं तो त्‍वचा का खयाल भी रखें। शरीर के अन्‍य जगह की त्‍वचा की तुलना में चेहरे की त्‍वचा नाजुक होती है, इसलिए मुंह पर यदि कोई रंग मलता हो तो उसे मना कर दें।

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हल्‍के रंग का प्रयोग

जरूरी नहीं कि आप होली ऐसे रंगों से खेलें जिसका रंग कई दिनों तक न छूटे। तो इस बार गुलाल एवं हल्के रंग से होली खेलें। यह आपके लिए और आपकी त्‍वचा दोनों के लिए अच्‍छा है।

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इन जगहों पर न जायें

होली पर ऐसी जगहों पर जाने से बचें जिसके बारे में आपको न पता हो कि वहां किस तरह का रंग प्रयोग हो रहा है। ऐसी जगहों पर लोग सूखे रंग आपकी त्‍वचा पर मल सकते हैं जो कि हानिकारक हो सकता है।

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बच्‍चों का ध्‍यान

बच्‍चों की त्‍वचा बहुत नाजुक होती है, ऐसे में बच्‍चों को होली के हानिकारक रंगों से बचाना जरूरी है। बच्‍चों को ऐसा रंग न दें जो हानिकारक हो, बच्‍चों को ईको फ्रेंडली होली के बारे में समझाइए, इन रंगों के खतरनाक दुष्‍प्रभाव के बारे में बच्‍चों को बताइए जिससे कि वे इससे दूर रहें और ज्‍यादा हुड़दंग न करें।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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