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जानें महिलाओं की गर्दन में क्यों होता है दर्द, बचाव के तरीके भी हैं बेहद आसान

आपके बगल में बैठी महिला कर्मचारी को गर्दन में दर्द की समस्या हो गई है तो ये ना सोचें कि वो बहाने बना रही है, बल्कि महिलाओं में गर्दन दर्द क समस्‍या अधिक होती है, इस स्‍लाइडशो में जानें ऐसा क्‍यों है।

दर्द का प्रबंधन By Rashmi UpadhyayMar 04, 2019

महिलाओं में गर्दन का दर्द

ऑफिस में बैठे-बैठे या लगातार काफी देर तक पढ़ने से गर्दन में दर्द होना स्‍वाभाविक है। दरअसल लगातार गर्दन झुकाकर या गर्दन सीधी करके कंप्यूटर के सामने बैठने से रीढ़ की हड्डियों में कड़ापन आ जाता है। ऐसे में इन हडडियों की जोड़ों में जब दवाब पड़ता है तो बहुत अधिक तकलीफ होती है। ये एक तरह की बीमारी है जिसमें गर्दन एवं कंधों में दर्द तथा जकड़न के साथ-साथ सिर में पीड़ा तथा तनाव बना रहता है।

झेलना पड़ता है महिलाओं को अधिक

हाल ही में हुए शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि गर्दन का दर्द महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक झेलना पड़ता है। इस शोध में पता के परिणामों के अनुसार गर्दना के दर्द की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 1.38 फीसदी अधिक पाई गई है।

शोध में हुई पुष्टि

यह शोध हाल ही में लोयोला यूनिवर्सिटी शिकागो स्ट्रिच स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा पूरी की गई है जिसमें भारतीय मूल के शोधार्थी राघवेंद्र और जोसेफ होल्टमैन ने 3,337 मरीजों पर अध्ययन किया। ये सारे के सारे मरीज उस अस्पताल में अपने गर्दन के दर्द का इलाज करा रहे थे। शोधार्थियों ने इस शोध के परिणाम में यह निष्कर्ष निकाला की इस दर्द से महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक पीड़ित हैं। इस शोध को ‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेन मेडिसिन इन पाल्म स्प्रिंग्स’ की वार्षिक बैठक में शामिल  कर प्रस्तुत किया गया।

ये हैं कारण

सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क रोग गर्दन में होने वाले दर्द का सबसे मुख्य और आम कारण है। इस रोग में गर्दन में काफी दर्द होता है। साथ ही गर्दन में खिंचाव, स्तब्धता, जलन और झुनझुनी का एहसास होता है। इस बीमारी में गर्दन और सिर को हिलाने पर काफी दर्द होता है जो बहुत ही असहनीय होता है।

सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क रोग

ये बीमारी गर्दन में दर्द का कारण बनती है। इसमें गर्दन में कड़ापन महसूस होता है। इसमें गर्दन में दर्द होता है जो कंधों तक में रहता है। इसमें गर्दन में जकड़न आ जाती है जिससे सिर हिलाने में दर्द होता है। कई बार इस बीमारी के घातक होने पर चक्कर और उल्टियां भी होती हैं। ये सब गर्दन की  डी-जेनरेशन वाली नसों पर दबाव पड़ने के कारण होता है।

इसका उपचार

इस दर्द को ठीक करने के लिए कैस्टर ऑयल थेरैपी या हॉट व कोल्ड थेरैपी लें। इन थैरेपियों से गर्दन की मांसपेशियों व अन्य ऊतकों को लचीला बनाया जाता है जिससे असामान्यन्य ऊतकों का एलाइनमेंट किया जाता है। ज्यादातर रोगियों को एक या दो उपचारों के बाद डिस्क के नर्व पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है। जिससे में पहले की तरह लचीलापन आ जाता है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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