• shareIcon

इन कारणों से ब्राह्मण नहीं खाते प्याज और लहसुन

कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन धार्मिक मान्यता के चलते नहीं करते है, तो कुछ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण बताते हैं। चलिये आज इस बात से जुड़े सभी पहलुओं को जानने और समझने की कोशिश करते हैं।

तन मन By Rahul Sharma / Mar 28, 2017

ब्राह्मण नहीं खाते प्याज़ और लहसुन

ब्राह्मण अक्सर प्याज और लहसुन आदि से परहेज करते देखे जा सकता है। भला इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? इस संबंध में लोगों के अलग अलग मत और कारण हैं। कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन धार्मिक मान्यता के चलते नहीं करते है, तो कुछ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण बताते हैं। चलिये आज इस बात से जुड़े सभी पहलुओं को जानने और समझने की कोशिश करते हैं।
Images source : © Getty Images

खाद्य वर्गीकरण

आयुर्वेद के अनुसार खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है, - सात्विक (sattvic), राजसिक (rajasic) और तामसिक (tamasic) अतः क्रमशः अच्छाई, जुनून और अज्ञान वाले खाद्य। ये दरअसल मानसिक स्थितियां है जिन्हें निम्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है।

सत्वा (Satva) : शांति, संयम, पवित्रता और मन की शांति जैसे गुण
राजस (Rajas) : जुनून और खुशी जैसे गुण
तामस (Tamas) : क्रोध, जुनून, अहंकार और विनाश जैसे गुण
Images source : © Getty Images

अहिंसा के चलते

प्याज और लहसुन तथा अन्य ऐलीएशस (लशुनी) पौधों को राजसिक और तामसिक रूप में वर्गीकृत किया गया है। जिसका मतलब है कि ये जुनून और अज्ञानता में वृद्धि करते हैं। अहिंसा - हिंदू धर्म में, हत्या (रोगाणुओं की भी) निषिद्ध है। तो जमीन भोजन में समुचित सफाई की जरूरत है, जो सूक्ष्मजीवों की मौत का कारण बनता है। अतः ये मान्यता भी प्याज़ और लहसुन को ब्राह्मणों के लिये निषेध बनाती है।
Images source : © Getty Images

अशुद्ध खाद्य की श्रेणी में आते हैं

कुछ लोगों का ये भी कहना है कि मांस, प्याज और लहसुन का अधिक मात्रा में सेवन व्यवहार में बदलाव का कारण बन सकता है। शास्त्र के अनुसार लहसुन, प्याज और मशरूम ब्राह्मणों के लिए निषिद्ध हैं, क्योंकि आमतौर पर ये अशुद्धता बढ़ाते हैं और अशुद्ध खाद्य की श्रेणी में आते हैं। ब्राह्मणों को पवित्रता बनाए रखने की जरूरत होती है, क्योंकि वे देवताओं की पूजा करते हैं जोकि प्रकृति में सात्विक (शुद्ध) होते हैं।
Images source : © Getty Images

सनातन धर्म के अनुसार

सनातन धर्म के वेद शास्त्रों के अनुसार प्याज और लहसुन जैसी सब्जियां प्रकृति प्रदत्त भावनाओं में सबसे निचले दर्जे की भावनाओं जैसे जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देती हैं, जिस कारण अध्यात्मक के मार्ग पर चलने में बाधा उत्पन्न होती हैं और व्यक्ति की चेतना प्रभावित होती है। इस कराण इनका सेवन नहीं करना चाहिेए।
Images source : © Getty Images

यह मान्यताओं पर आधारित है

इन बातों को अब कम महत्व है, क्योंकि शहरी जीवन में तो जाति व्यवस्था विलुप्त होने के कगार पर है और बेहद कम लोग ही इस नियमों का पालन करते हैं। क्योंकि आज के दौर के अधिकांश लोग, खासतौर पर युवा पीढ़ी इसे अंधविश्वास से जोड़ कर देखते हैं या यह वर्तमान जीवन शैली के कारण इनका पालन नहीं कर सकते हैं।
Images source : © Getty Images

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK