गर्भावस्‍था से जुड़ी सामान्‍य किंदवतियां

हम सबने गर्भावस्‍था और प्रसव से जुड़े आम बातों के बारे में सुना होगा- आइए भ्रम और उनकी सच्‍चाई के बारे में पता लगाये।

गर्भावस्‍था By Pooja Sinha / Nov 04, 2014
गर्भावस्‍था से जुड़े तथ्‍य

गर्भावस्‍था से जुड़े तथ्‍य

मां बनना हर महिला के लिए एक सुखद सपने की तरह होता है। किसी भी महिला के गर्भवती होने या पहली बार मां बनने पर घर वाले, रिश्‍तेदार, पड़ोसी और यहां तक कि दूर-दराज के जानने वाले भी तरह-तरह की सलाह देने लग जाते हैं। लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार ये सब बातें परेशानी का सबब बन जाती है। हम सबने गर्भावस्‍था और प्रसव से जुड़े आम बातों के बारे में सुना होगा- आइए भ्रम और उनकी सच्‍चाई के बारे में पता लगाये। image courtesy : getty images

भ्रम - तरल पदार्थ के साथ प्रसव की शुरूआत।

भ्रम - तरल पदार्थ के साथ प्रसव की शुरूआत।

तथ्‍य - यह फिल्‍मों का परिचित दृश्‍य है, महिला के तरल पदार्थ निकलने के साथ ही उसे अस्‍पताल की ओर ले जाया जाता है। हालांकि वास्‍तविकता इससे अलग है। लेबर को शुरू होने में 24 घंटे या इससे अधिक समय लगता है। कैलिफोर्निया में प्रोविडेंस सेंट जॉन्स हेल्थ सेंटर में ओबी/गयनेकोलॉजिस्ट डॉक्‍टर शेरिल रॉस, सैंटा मोनिका के अनुसार, इसका मतलब डिलीवरी होने वाली है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि डिलीवरी हो ही जाये। इसके अलावा, सिर्फ 10 प्रतिशत महिलाओं की झिल्‍ली प्रसव शुरू होने से पहले टूटती है। तरल निकलने के साथ संकुचन होने और मजबूत हरे और खूनी एमनियोटिक द्रव के निकलने पर प्रसव की शुरुआत होती है। image courtesy : getty images

भ्रम - गर्भावस्‍था में घी खाने से प्रसव आराम से हो जाता है।

भ्रम - गर्भावस्‍था में घी खाने से प्रसव आराम से हो जाता है।

तथ्‍य - घी अच्छा ल्यूब्रिकेंट माना जाता है। लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि इसका सेवन प्रसव पीड़ा को कम कर सकता है। घी खाने का प्रसव से कोई संबंध नहीं है। हां, अधिक घी खाने से ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था में संतुलित मात्रा में ही घी खाएं। यह पेट साफ रखने में जरूर सहायक सिद्ध होता है। image courtesy : getty images

भ्रम - गर्भावस्था के दौरान दो लोगों के हिसाब से भोजन करना चाहिए।

भ्रम - गर्भावस्था के दौरान दो लोगों के हिसाब से भोजन करना चाहिए।

तथ्‍य –  गर्भावस्‍था के दौरान अक्‍सर महिलाएं दो लोगों के हिसाब खाने लगती हैं। वे अपने भोजन में कैलोरी की मात्रा बढ़ा देती हैं। लेकिन फेयरफील्ड यूनिवर्सिटी स्‍कूल ऑफ नर्सिग प्रमाणित नर्स, मिडवाइफ और सहायक प्रोफेसर जेना लोग्‍यूडिस के अनुसार, इस समय गर्भवती को केवल 300 अतिरिक्त कैलोरी की आवश्‍यकता होती है। इसके अलावा ज्‍यादा भोजन लेने से प्रसव के बाद बढ़े हुए वजन को कम करने में आपको काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। इसलिए बेहतर है कि पौष्टिक और संतुलित भोजन करें। image courtesy : getty images

मिथ - गर्भावस्था के दौरान सेक्‍स से बचना चाहिए।

मिथ - गर्भावस्था के दौरान सेक्‍स से बचना चाहिए।

तथ्‍य - गर्भावस्‍था के दौरान रक्त की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत बढ़ जाती है, क्लाइटॉरिस में अधिक रक्त प्रवाह के बढ़ने का मतलब आर्गेंज्‍म में मजबूती होता है। लोग्‍यूडिस के अनुसार, महिलाएं गर्भावस्‍था के दौरान सामान्‍य से बेहतर सेक्‍स कर सकती हैं। image courtesy : getty images

मिथ - कॉफी पीना, गर्भपात का कारण बनता है।

मिथ - कॉफी पीना, गर्भपात का कारण बनता है।

तथ्‍य - गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कॉफी न पीने के लिए कहा जाता है। इसलिए क्‍योंकि माना जाता है कि इससे भ्रूण को नुकसान पहुंचता है और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होता है। लेकिन महिलाएं कॉफी का आनंद ले सकती हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि हर रोज सुबह एक प्याला कॉफी लेने से गर्भवती महिलाओं के बच्चे पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। शोधकर्ताओं के अनुसार, कैफीन की 200 मिलीग्राम गर्भवस्‍था के दौरान सुरक्षित होती है। image courtesy : getty images

मिथ - गर्भवती में आये बदलाव से लिंग की जांच।

मिथ - गर्भवती में आये बदलाव से लिंग की जांच।

तथ्‍य - गर्भावस्‍था में पेट के आगे बढ़ने से लड़का होता है और ज्‍यादा सोने से लड़की होती है। यह धारणा बिल्कुल गलत है। क्‍योंकि गर्भावस्‍था में महिला का पेट का बढ़ना बच्चे के विकास पर निर्भर करता है, इसका बच्चे के लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता। कई बार मोटापे से ग्रसित महिलाओं का पेट भी इस दौरान काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को थकान या नींद ज्यादा आती है, इसका लड़के या लड़की होने से कोई संबंध नहीं होता। image courtesy : getty images

मिथ - मछली का अधिक सेवन से बच्‍चों की विषाक्‍त पदार्थों से रक्षा होती है।

मिथ - मछली का अधिक सेवन से बच्‍चों की विषाक्‍त पदार्थों से रक्षा होती है।

तथ्‍य - मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है और इसमें प्रोटीन भी खूब पाया जाता है। इसलिए महिलाओं को लगता है कि मछली के भरपूर सेवन से उनके बच्‍चे को सभी आवश्‍यक पोषक तत्‍व मिल जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है, क्‍योंकि कुछ मछलियों में मौजूद पोषक तत्‍व बच्‍चे के‍ लिए आवश्‍यक नहीं है और उनसे बच्‍चे के विकास पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। आजकल मछलियां, गंदे समुद्री पानी में रहती हैं, जहां कई औद्योगिक कम्‍पनियों का कचरा जाता है और मछलियों में जहरीले पोषक तत्‍व समा जाते है। इसलिए मछली का सेवन सप्‍ताह में सिर्फ एक बार ही कम मात्रा में करें और मछली को स्‍थानीय लोगों से खरीदें जो रोज पकड़ कर लाते हो। image courtesy : getty images

मिथ -  गर्भवती महिलाओं को अपने बाल नहीं रंगने चाहिए।

मिथ - गर्भवती महिलाओं को अपने बाल नहीं रंगने चाहिए।

तथ्‍य - आजकल अधिकांश सैलून वेजिटेबल हेयर ड्राई का इस्‍तेमाल करने लगे हैं, और अध्‍ययन के अनुसार, बाल के रंगने के दौरान आने वाले धुएं में सांस लेना आपके बच्‍चे के लिए हानिकारक नहीं है। लेकिन इस बात को सुनिश्चित करें कि मॉर्निग सिकनेस की समस्‍या होने पर सैलून अच्‍छी तरह से हवादार होना चाहिए। image courtesy : getty images

मिथ - इस दौरान महिला को करवट से लेटना चाहिए?

मिथ - इस दौरान महिला को करवट से लेटना चाहिए?

तथ्‍य - इस दौरान महिला को बायीं करवट से लेटना चाहिए इससे आपके बच्चे को फायदा होता है। इससे रक्त एवं पोषक तत्वों का प्रवाह अधिकतम होता है। इससे आपकी किडनी को भी अपशिष्ट पदार्थों और द्रवों को शरीर से अधिक कुशलतापूर्वक बाहर निकालने में मदद मिलती है, जो आगे एडि़यों, पांव और हाथों में सूजन को कम करता है। image courtesy : getty images

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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