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गुर्दे का डायलिसिस कराने से हो सकती हैं ये समस्‍यायें

किडनी शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को निकालकर शरीर को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है, अगर यह बीमार हो जाये तो लोग डायलिसिस कराते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कितना नुकसानदेह है, आइए हम आपको बताते हैं।

किडनी फेल्योर By Aditi Singh Jul 22, 2015

किडनी का डायलिसिस

किडनी की समस्या बेहद गंभीर होती है। किडनी काम करना बंद कर दे तो शरीर में कई तरह की जटिलताएं पैदा होने लगती हैं और फिर जीना दुश्वार हो जाता है। किडनी की समस्याओं से निपटने के लिए डायलिसिस का सहारा लिया जाता है। लंबे समय तक चलने वाले डायलिसिस से कई बार शरीर को अन्य बीमारी होने का खतरा रहता है।
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लो ब्लड प्रेशर

ब्लड प्रेशर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकता है। किडनी का लंबे समय तक डायलिसिस कराने से ये  समस्या हो सकती है। वैसे लो ब्लड प्रेशर अपने आपमें कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर में पल रही किसी गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
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दिल की समस्या

एक खास प्रकार का रक्त शुध्द करने वाला घोल कैथेटर द्वारा पेरिटोनियम में प्रवाहित किया जाता है। यह घोल गंदे व विषैले पदार्थों को सोख लेता है। यह प्रक्रिया दिन में 3-4 बार करनी पड़ती है। पुराना घोल निकाल कर नया घोल पेट में डाल दिया जाता है। इसको दिल  के मरीज सहन नहीं कर  पाते है।
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मधुमेह

किडनी की बीमारी से ग्रस्त एक तिहाई लोग मधुमेह से पीड़ित हो जाते हैं। गुर्दे की यह प्रगतिशील बीमारी गुर्दे की ग्लोमेरुली की कोशिकाओं में वाहिकारुग्णता (एंजियोपैथी) की वजह से होती है। यह नेफ्रोटिक सिंड्रोम तथा फैली हुई ग्लोमेरुलोस्केलेरोसिस द्वारा पहचानी जाती है। यह दीर्घकालिक मधुमेह के कारण उत्पन्न हो सकती है और पश्चिमी देशों में इसे गुर्दे के मरीजों को बड़ी संख्या में डायलिसिस तक लाने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है।
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एनीमिया

हमारे गुर्दे एरथ्रोपॉइटिन नामक हार्मोन का उत्पादन करते हैं जो ऑक्सीजन को ले जाने में लाल रक्त कोशिकाओं की मदद करता है। गर्दे की बीमारी एरथ्रोपॉइटिन के स्तर को कम करती है जिसके कारण आपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है, परिणामस्वरूप यह बीमारी एनीमिया का कारण बन जाती है। कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी के कारण आपको सामान्यीकृत कमजोरी एवं अत्यधिक थकान महसूस होती है।
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सांस लेने में तकलीफ

गुर्दे की बीमारी के कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ इकट्ठा हो जाते हैं। साथ ही, गुर्दे की बीमारी के कारण होती रक्तहीनता शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पैदा करते हैं। इन कारकों की वजह से आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। गुर्दे की बीमारी के कारण आपके खून में इकट्ठा होता गंद मतली एवं उल्टी का कारण बन सकता है।
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शरीर में दर्द

गुर्दे की बीमारी के कारण आपको कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। अगर आपके गुर्दे में पत्थरी है तो आपको पीठ से लेकर कमर तक एक तीक्षण दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द पॉलीसिस्टिक गुर्दे की बीमारी से भी संबंधित हो सकता है, एक आनुवंशिक गुर्दे की बीमारी, जो गुर्दे में कई तरल पदार्थ से भरे अल्सर का कारण बनती है। मध्य मूत्राशयशोध, मूत्राशय की दीवार पर होती सूजन दर्द व बेचैनी का कारण बनती है।
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मुंह से बू तथा धातु का स्वाद आना

गुर्दे के फेल हो जाने से रक्त में यूरिया का स्तर बढ़ जाता है। यह यूरिया लार में अमोनिया के रुप में उत्पन्न होता है जो मुंह में अमोनिया ब्रेथ नामक बू का कारण बनता है। साथ ही यह मुंह में अप्रिय धातु के स्वाद (डिस्गुसिया) का भी कारण बनता है। गुर्दे के फेल हो जाने से रक्त में गंद का निर्माण प्रारंभ होता है। इसके कारण आपकी त्वचा पर चकत्ते और खुजली हो सकती है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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