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पीएमस के कारण उच्‍च रक्‍तचाप के अलावा हो सकती हैं ये दूसरी समस्‍यायें

महिलाओं को होने वाले पीएमएस से कई अन्य तरह की समस्यायें भी हो जाती है। इन परेशानियों के बारें में विस्तार से जानने के लिए इस स्लाइडशो को पढ़े।

महिला स्‍वास्थ्‍य By Aditi Singh / Dec 17, 2015

हाई ब्लडप्रेशर की समस्या

पीरियड्स के दौरान या पहले महिलाओं को कुछ शारीरिक और भावनात्मक बदलाव महसूस होते है जिन्हे प्री मेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम या PMS कहते है। माहवारी से पूर्व सिरदर्द, थकान और कमजोरी आदि जैसे लक्षण भविष्य में आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या दे सकता है। एमहर्स्‍ट स्थित मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी की शोध के अनुसार पीएमएस के कारण भविष्य में कई गंभीर बीमारियां हो सकती है। जिसमें हाई ब्लडप्रेशर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। पीएमएस के कारण होने वाली अन्य बीमारियों के बारे में इस स्लाइडशो में पढ़े।
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व्याकुलता संबधित विकार

थोड़ी बहुत व्याकुलता सभी कभी न कभी महसूस करते हैं, यही व्याकुलता जब बहुत बढ़ जाती है तो एक मनोविकार का रूप ले लेती है जिसे व्याकुलता संबधित विकार  कहते हैं। इस मनोविकार से पीड़ित व्यक्ति अत्यधिक मनन, चिंता और शंकाओं से घिरा रहने के कारण बेचैनी और घबराहट महसूस करता है। वह भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण कुछ सत्य कुछ काल्पनिक डरों को मन में बिठा लेता है। बढ़ती उम्र की महिलाओं में यह समस्या बहुत देखी जाती है।
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बायपोलर डिस्‍ऑर्डर

बायपोलर डिस्‍ऑर्डर एक मानसिक रोग है। इस बीमारी में रोगी के मस्तिष्क का नियंत्रण बिगड़ जाता है। जब व्यक्ति ज्यादा खुश रहता है तो उसे 'मेनिया' कहते हैं। 'मेनिया' में मरीज ज्यादा प्रसन्न होने के कारण वह खुद को बढ़ा-चढ़ाकर देखता है। अधिक सजना-संवरना, नई-नई चीजें खरीदना, नए काम शुरू कर देना, खुद को शक्तिशाली या अधिक धनवान मानने लगना आदि इसके कुछ प्रमुख लक्षण हैं। जब मरीज को ऐसा करने से रोका जाता है तो वह बेहद गुस्सा हो जाता है या मारपीट भी करने लगता है।
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मानसिक रोग

बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में मानसिक विकार जैसे धैर्य का अभाव होना, क्रोधी और चिड़चिडे़ स्वभाव से बुखार बढ़ता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार शरीर में खून की कमी, हृदय रोग, हिस्टीरिया, स्नायु की दुर्बलता, वीर्य दोष यहां तक कि लकवा और टी.बी. जैसी खतरनाक बीमारियों के उत्पन्न होने का मूल कारण मानसिक विकार ही होते हैं। यह एक सच्चाई है कि हमारे शरीर के लगभग 90 प्रतिशत रोग केवल मानसिक विकार के कारण होते हैं।
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ईटिंग डिसऑर्डर

ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की खाने-पीने की आदतें असामान्य-सी हो जाती हैं (जैसे कि बहुत कम या ज्यादा खाना खाने लगना) और इसकी वजह से उसे शारीरिक और मानसिक क्षति पहुंचती है।यह बीमारी महिलाओं में, खासकर टीनएजर्स में आम है। लोगों में अक्सर एनोरेक्सिया नाम का ईटिंग डिसऑर्डर पाया जाता है। इससे पीडित व्यक्ति हमेशा तनाव से घिरा रहता है। वह कम से कम मात्रा में भोजन करता है। उसे लगता है कि वह थोड़ा भी खाएगा, तो मोटा हो जाएगा। लोग अच्छा फिगर पाने की चाहत में ही नहीं, बल्कि कई बार तनाव में आकर भी ऐसा करते हैं। बुलीमिया भी ऐसा ही एक ईटिंग डिसऑर्डर है। इसमें पीडित व्यक्ति थोड़े समय में बहुत ज्यादा खा लेता है और बाद में जान-बूझकर उल्टी करके सारा खाना निकाल देता है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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