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झुर्रियों से ​सिर्फ 2 दिन में छुटकारा दिखाता है प्लेटलेट रिच प्लाज्मा

पीआरपी थेरैपी को बालों और झुर्रियों की समस्याओं को दूर करने की एक क्रांतिकारी पद्धति के रूप में देखा जा रहा है। इसके साइडइफेक्ट नहीं होते है।

फैशन और सौंदर्य By Atul ModiMar 01, 2018

बढ़ती उम्र में अपनाएं पीआरपी थेरेपी

दमकती त्वचा और लंबे घने बाल महिलाओं और पुरूषों दोनो की पहली चाहत होती है। लेकिन बदलती जीवनशैली की वजह से शरीर में आवश्यक और पोषक तत्वों की कमी हो रही है।  पूरी नींद न लेने व बढ़ते प्रदूषण आदि के कारण भी बाल झडऩे व कम उम्र में ही उम्रदराज दिखने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बढ़ती उम्र के साथ कोलेजन की कमी त्वचा में झुर्रियों की समस्या को बढ़ा देती है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो पीआरपी थेरेपी को अपनाएं ये आपकी सारी परेशानियों को दूर कर देगी।
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क्या होती है पीआरपी थेरेपी

पीआरपी को प्लैटलेट्स रिच प्लाज्मा थेरैपी के नाम से जाना जाता है। यह झड़ते बाल और त्वचा की उम्र से संबंधित परेशानियों के इलाज की तकनीक है। समें मरीज के शरीर से 20 से 30 मिलिलीटर खून निकाला जाता है। फिर इस खून को प्लाज्मा में बदलकर इंजेक्शन की सहायता से त्वचा में जरूरत की जगह इंजेक्ट किया जाता है। प्लाज्मा में वृद्धिकारक तत्त्व अत्यधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे बालों की जड़ों में इंजेक्ट करने से जड़ों को जरूरी पोषक तत्त्व मिल जाते हैं और उनको ताकत मिलने से बाल बढऩे लगते हैं।

पीआरपी थैरेपी की प्रकिया

सामान्य एनेस्थीसिया से प्रभावित क्षेत्र को सुन्न कर दिया जाता है। फिर विशेष माइक्रो सुई की सहायता से पीआरपी को सिर, भौंहे या दाढ़ी के उन क्षेत्रों में इंजैक्ट किया जाता है जहां उपचार किया जाना है। पीआरपी को प्रभावित क्षेत्र पर डर्मारोलर के द्वारा भी इन्फ्यूज किया जाता है। डर्मारोलर का प्रयोग करने से पहले त्वचा पर सुन्न करने वाली सामान्य क्रीम लगा दी जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने के लिए कई सिटिंग्स की जरूरत होती है।
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पीआरपी थेरेपी के लाभ

यह वृद्धिकारक तत्त्व चेहरे की त्वचा में मौजूद कोलेजन नामक प्रोटीन को भी बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे झाइयां, हल्की झुर्रियां और उम्र के साथ होने वाली फाइन लाइन्स की समस्या कम हो जाती हैं। इसके अलावा प्लेटलेट रिच प्लाज्मा की तकनीक से ढीली त्वचा में कसाव भी लाया जा सकता है।झड़ते बालों को रोकने का यह एक नौनसर्जिकल समाधान है। यह एक बायोमैट्रिक्स तकनीक है, जो क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक करती है और उन की पुनर्रचना करती है। यह थेरैपी पतले पड़ चुके बालों के हेयर फौलिकल को शक्तिशाली बना कर उन्हें घना करने में सहायता करती है।
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पीआरपी थैरेपी अन्य फायदे

इस तकनीक को ठीक न होने वाले घाव (नॉन हीलिंग अल्सर) और मधुमेह के कारण होने वाले अल्सर के इलाज में भी प्रयोग किया जाता है। चेहरे के लिए की जाने वाली पीआरपी थेरैपी को वैंपायर फेसलिफ्ट कहा जाता है। बालों के प्रत्यारोपण के बाद भी इस तकनीक का उपयोग प्रत्यारोपित बालों को शक्ति देने और उन्हें विकसित करने के लिए किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक बाल झड़ने की समस्या से पीडि़त महिलाओं के लिए यह तकनीकि कारगर है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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