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ऑस्टियोमाइलाइटिस के कारण और लक्षण के बारे में जानें

यह बीमारी सुनने में ही नहीं बल्कि वास्‍तव में इतनी ही खतरनाक है, यह कितनी खतरनाक बीमारी है, इसके बारे में इस स्‍लाइडशो में हम आपको विस्‍तार से बता रहे हैं।

दर्द का प्रबंधन By Gayatree Verma / Sep 18, 2015

ऑस्टियोमाइलाइटिस

नाम जितना सुनने में मुश्किल और अनसुना सा लग रहा है ये मेडिकल साइंस में उतना ही असामान्य नाम भी है। इस बीमारी में हड्डियों में इंफेक्शन हो जाता है। हड्डियों का एक हिस्सा प्रभाव में आ जाने के बाद ये शरीर की पूरी हड्डियों में फैलने लगता है। यह 10,000 में से दो लोगों को होता है। यह बच्चों और वयस्क, दोनों में होता है। कभी-कभार मधुमेह जैसी बीमारी इस के खतरों को और अधिक बढ़ा देती है।

एक संक्रामक रोग

ऑस्टियोमाइलाइटिस हड्डियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर पॉयोजेनिक बैक्टीरिया या माइकोबैक्टिरियम के कारण होता है। यह बैक्टीरिया शरीर के एक हिस्से के हड्डी को प्रभाव में लेकर पूरे शरीर की हड्डियों को इसकी चपेट में ले लेता है।

कारण

बच्चों में यह बैक्टीरिया नाक या आंक के जरिए शरीर के अंदर जाकर खून में मिल जाता है और हड्डी के भागों में बस जाता है। शरीर में अगर कोई हड्डी पहले से टूटी हुई है या क्षतिग्रस्त है तो वहां जाकर मवाद बनाता है और धीरे-धीरे कर हड्डी को निगल लेता है, विद्रधि का रूप ले लेता है और फिर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है। फ्रैक्चर के बाद बैक्टीरिया सीधे घाव में प्रवेश करते हैं और द्वगुणित होकर, मवाद बनाता हैं और घाव के माध्यम से जो अंततः स्राव बन कर निकलते हैं।

मधुमेह के मरीजों को ज्यादा खतरा

मधुमेह में तो ऐसे ही कोई भी घाव सूखने में समय लगता है फिर इस संक्रमण का तो खतरा बढ़ान लाजिमी ही है। पैर की छोटी उंगुली पर भी एक अल्सर होता ह तो इस बैक्टीरिया के शरीर के अंदर घुसने की संभावना होती है। जिस हिस्से में ये घुसते हैं वहां हल्की सूजन आ जाती है जो जिसका पता कई बार नहीं चलता। बच्चों या नवजात में खून की जांच के समय या ड्रॉप देते समय बैक्टीरिया खून में प्रवेश कर सकते हैं।

लक्षण

हड्डियों में दर्द, हड्डियों में सूजन, बुखार, मांसपेशियों की ऐंठन, जोड़ों में दर्द स्थानीय लालिमा, पीठ के दर्द का बढ़ना, खून का थक्का बनना, प्रभावित हिस्से में मवाद, हड्डियों में सूजन, आदि इसके लक्षण हैं।

इसका उपचार

ऑस्टियोमाइलाइटिस में कुछ दिनों के लिए जैसे एक हफ्ते या एक महीने के लिए एंटीबायोटिक चिकित्सा दी जाती है। एक पीआईसीसी लाइन या सेंट्रल अन्तः शिरा कैथिटर अक्सर इस प्रयोजन के लिए लगाया जाता है। इसमें संक्रमित टीशूज़ को हटाकर ही इस बीमारी का पूरा इलाज संभव है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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