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आपके लिये हेल्दी नहीं हैं ये हेल्थ ट्रेंड्स

कुछ उच्च तीव्रता आहार और वर्कआउट या कहिये हेल्थ ट्रेंड्स, पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकते हैं या आपको बीमार भी कर सकते हैं।

विभिन्न By Rahul Sharma / Dec 26, 2014

अनहेल्दी हेल्थ ट्रेंड्स

स्वस्थ रहना सभी के लिये बेहद जरूरी है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसके लिए सभी हेल्थ ट्रेंड्स ही आपके लिये बेहतर हों। कुछ उच्च तीव्रता आहार और वर्कआउट या कहिये हेल्थ ट्रेंड्स, पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकते हैं या आपको बीमार भी कर सकते हैं। आज हम ऐसे ही कुछ प्रचलित हेल्थ ट्रेंड्स की बात कर रहे हैं जो वास्तव में आपके लिये हेल्दी नहीं होते हैं।
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लस मुक्त (ग्लूटन मुक्त) आहार

वैंकूवर स्थित आहार विशेषज्ञ डेसिरी नीलसन के अनुसार ग्लूटन फ्री आहार कुछ लोगों के लिये स्वस्थ हो सकता है। लेकिन बहुत से लोगों को बिना इसके लिए परीक्षण कराये लगता है कि उन्हें ग्लूटन से एलर्जी है और इसका मतलब है कि वे इस भ्रम के चलते अपनी कुछ वास्तविक स्वास्थ्यों जैसे इर्रिटेबले बाउल सिंड्रोम को नज़रअंदाज कर सकते हैं। तो ग्लूटन मुक्त आहार लेना शुरु करने से पहले अपने डॉक्टर से जांच कराएं और उसकी सलाह पर ही ऐसा करें।
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कच्चे खाद्य आहार

रौ फूडिस्ट अर्थात कच्चे खाद्य पदार्थ खाने वाले लोग अक्सर तर्क देते हैं कि खाना पकाने की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से होने वाले  एंजाइमों, विटामिन और खनिज को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन हमारा पेट में मौजूद एसिड भी ठीक इसी प्रकार से एंजाइमों को नष्ट करते हैं व कुछ पोषक तत्वों जैसे गाजर में मौजूद कैरोटीन वास्तव में हमारे शरीर को अवशोषित करने में आसानी पैदा करते हैं। क्योंकि गर्मी विटामिन की बाहरी परत को तोड़ देती है। हालांकि यह सच है कि कई फलों और सब्जियां बिना पकाए अधिक से भरे होते हैं।
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सब कुछ फैट फ्री

90 के दशक में, बहुत से अमेरिकियों के आहार में वसा लेने से परहेज शुरू कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि कम वासा वाला भोजन वजन कम करने, हृदय रोग और विभिन्न तरह के कैंसर से बचाव में लाभप्रद होता है। लेकि सच तो यह है कि संतुलित मात्रा में फैट भी पौष्टिक आहार का अभिन्न अंग होता है। गौरतलब है कि यूएसडीए के 2010 की डाइटरी गाइडलाइन्स फॉर अमेरिकन्स के अनुसार बहुत कम वसा का सेवन भी कई प्रकार की समस्याओं जैसे पोषक तत्वों की कमी, स्मृति समस्याओं, त्वचा की समस्याओं और थकान का कारण बन सकता है।
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जूस के साथ उपवास से डिटॉक्सीफिकेशन

जूस के साथ उपवास रख कर विषाक्त पदार्थों को दूर करना आपके लिये हानिकारक हो सकता है।   डीटॉक्स आहार समर्थकों दावा करते हैं कि ठोस खाद्य पदार्थों का सेवन न करने, कुछ खास प्रकार के जूस पीने व डेटॉक्सीफीइंग सप्लीमेंट्स लेने से पाचन तंत्र को विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद मिलती है और पूरा स्वास्थ्य बेहतर बनता है। हालांकि इन धारणाओं को विज्ञान द्वारा समर्थन नहीं मिला है। लेकिन शरीर के लिये डिटॉक्सीफिकेशन भी आवश्यक होता है।
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हार्मोन इंजेक्शन

एचसीजी डाइट में ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान उत्पादित होने वाला हार्मोन) के इंजेक्शन तथा 500 कैलोरी की दैनिक खपत शामिल होती है। लेकिन यह कॉम्बो (जोकि तेजी से वजन घटाने के लिए होता है), गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। इसके कई गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं।
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चरम कैलोरी कटिंग

वजन कम करने के लिये आमतौर पर कैलोरी में कमी करने की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि आपको अपने द्वारा ली गयी कौलोरी से अधिक को बर्न करना होता है। लेकिन आहार विशेषज्ञ डिलन का मानना है कि जल्द से जल्द पतला होने के लिये एक्सट्रीम लो कैलोरी एक्शन प्लान का पालन करना अस्वस्थ और अप्रभावी होता है। डिलन के अनुसार इस प्रकार से आपकी भुखमरी की मुहीम प्रतिक्रिया कर चयापचय को धीमा कर देती है।
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प्लास्टिक में पसीना बहाना

आपने अक्सर टीवी व रेडियो आदि पर विज्ञापन देखते व सुनते होंगे कि सोना स्लिम बेल्ट या फलाना मशीन या डिवाइस की मदद से आपके शरीर की चर्बी (खासतौर पर पैट की) पसीने के माध्यम से होकर निकल जाती है और आप स्लिम व फिट बनते हैं। यही नहीं लोग बढ़-चढ़ कर इन अत्पादों का प्रयोग भी करते हैं। लेकिन वास्तव में ये चीजें वजन कम नहीं करती। क्योंकि एक्सरसाइज को इस तरह के डिवाइस कभी भी रिप्लेस नहीं कर सकते हैं।
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कार्बोहाइड्रेट में भारी कटौती

लो-नुट्रिएंट कार्बोहाइड्रेट चीजों जैसे कुकीज़ और प्रेट्ज़ेल को डाइट से हटाते समय ध्यान रखें कि सभी कार्बोहाइड्रेट को डाइट से कम करना अनावश्यक हो सकता है। न्यूयॉर्क और हवाई के सर्टिफाइड नुट्रिशन कोच व मनोचिकित्सक जेनी गिबलिन के अनुसार, लोगों के बीच कार्ब्स के खराब होने का एक बहुत बड़ा मिथक है। इसलिये उन्हें बिल्कुल लेना बंद करने के बजाए सही कार्बोहाइड्रेट का चयन करें।
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कोलोनिक हीड्रोथेरपी

कोलोनिक इरीगेशन जिसे कोलोनिक हीड्रोथेरपी भी कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग मेड स्पा और वैकल्पिक स्वास्थ्य केन्द्रों में शरीर को डीटॉक्सीफाई करने तथा क्रोनिक थकान और कब्ज आदि समस्याओं के इलाज में किया जाता है। इसमें एक रबर ट्यूब आपके बृहदान्त्र में और फिर अपने मलाशय में डाला जाता है, जिसकी मदद से 20 गैलन पानी और कुछ योजक जैसे साबुन, कॉफी या एंजाइमों को भीतर डाला जाता है। फिर एक तकनीशियन विषाक्त पदार्थों को मल में मिलाकर ढीला कर बाहर निकालने के लिये आपके पेट की मसाज करता है। और फिर वेस्ट को इसी ट्यूब के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। लेकिन जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार इस अभ्यास पर अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है और इसे विज्ञान के आधआर पर भी मान्यता नहीं मिली है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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