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तकनीक की लत के नकारात्मक प्रभाव और इससे बचने के उपाय

तकनीक ने हमारे जीवन को एक तरफ जहां आसान बना दिया है तो दूसरी तरफ इसे कुछ नुकसान भी हैं। आइए जानें उनके बारे में।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Anubha Tripathi / Jun 20, 2014

तकनीक का असर

आजकल हमारा जीवन पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर हो गया है। इन तकनीक के फायदे होने के साथ-साथ कुछ नुकसान भी है जिनकी तरफ हमारा ध्यान कम ही जाता है। यह तकनीक ना सिर्फ हमारे निजी जीवन पर असर डालती है बल्कि आपकी बॉडी इमेज भी खराब कर सकती है। आइए जानें तकनीक से जुड़ी उन चीजों के बारें में जो आप पर नकारात्मक असर डालती हैं।

मोबाइल फोन

आजकल लोगों का जीवन मोबाइल फोन के इर्द गिर्द ही घूमता है। लोगों को मोबाइल की ऐसी आदत हो गयी है कि इसके बिना लोगों को कुछ खालीपन महसूस होता है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक मोबाइल का प्रयोग करने वाले में ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप इस खतरे से बचना चाहते हैं तो मोबाइल फोन पर संक्षिप्त बात करें या कोशिश करें मैसेज के जरिए अपनी बात कहें।

आंखों पर असर

मोबाइल फोन का ज्यादा प्रयोग करने वाले लोगों में आंखों की समस्या होना लाजमी है। रात को अंधेरे में भी फोन का इस्तेमाल करना आपकी आंखों के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकता है। इससे आंखों में जलन, धुंधला दिखायी देना आदि शामिल है। लोग घंटों मोबाइल पर चैटिंग या गेम खलते हैं जिसकी वजह से ये समस्याएं होती हैं। इससे बचने के लिए कोशिश करें पूरी रोशनी में ही मोबाइल का प्रयोग करें।

बच्चों को दूर रखें मोबाइल से

आजकल बच्चे में खुलकर मोबाइल का प्रयोग करते हैं जो कि बहुत हानिकारक हो सकता है।  दस साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल का इस्तेमाल न करने दें। उनकी  खोपड़ी की हड्डियां नर्म होती हैं। चूंकि उनका मस्तिष्क ज्यादा विकसित नहीं होता है, इसलिए रेडिएशन का प्रभाव ज्यादा हो सकता है। मोबाइल पर ज्यादा समय चैट करने वाले किशोर-किशोरियों को इसके खतरे के बारे में बताएं। उन्हें बताएं कि मोबाइल का इस्तेमाल आवश्यक काम के लिए करें।

याद्दाशत कम होना

मोबाइल के प्रयोग से आपको कुछ भी याद रखने की जरूरत नहीं है। नोट्स और अलार्म कैलेंडर आपके फोन में समा चुके हैं। ऐसे लोगों का भी बड़ा तबका है जिसने जरूरी पासवर्ड तक याद करना छोड़ दिया है। हार्वर्ड, कोलंबिया और विस्किंसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स ने भी एक शोध से खुलासा किया था कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से दिमाग और उसके याद करने की क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने दिमाग को एक्टिव बनाए रखे और जिससे मोबाइल पर आपकी निर्भरता कम हो जाए।

सोशल मीडिया

शोध के मुताबिक सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले लोगों में ब्रेकअप और डिवोर्स जैसी चीजें ज्यादा होती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि सक्रिय टि्वटर उपयोगकर्ताओं का उनके प्रेमी-प्रेमियों से टि्वटर को लेकर विवाद होने की संभावना अधिक है। अच्छा होगा कि आप अपने निजी जीवन को सोशल मीडिया से दूर रखें।

नींद में खलल

जो लोग सोशल मीडिया से जुड़े होते हैं उनकी नींद पर भी इसका गहरा असर होता है। जब आपको नींद आती है फिर भी आप सोने की बजाय सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। इससे आप अनिद्रा, थकान और चिड़चिड़ेपन का जल्दी शिकार हो जाते हैं। साथ ही शरीर की बॉयोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ जाती है। ऐसे में सोने के समय खुद को मोबाइल या लैपटॉप से दूर रखें और अपना सोने का समय निर्धारित करें।

पीठ और गर्दन में दर्द

दिन भर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले लोगों के पीठ और गर्दन में दर्द होना लाजमी है। अगर लगातार कई घंटों तक कंप्यूटर पर बैठकर चैट करेंगे तो आपके शरीर पर इसका असर तो होगा ही। आपकी यह लत आपको बीमार बना सकती है। इसलिए कंप्यूटर या मोबािल पर काम करते समय सही पॉश्चर में बैठें जिससे आपकी पीठ और गर्दन को कोई तकलीफ ना हो।

प्राइवेसी की कमी

सोशल मीडिया आपकी प्राइवेसी को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। आप जितनी भी कोशिश कर लें लेकिन अपनी जानकारियों को सुरक्षित नहीं रख पाते हैं। फिशिंग और हैकर्स के कारण आपकी निजी सूचनाएं सार्वजनिक भी हो सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें और इसके बारे में किसी से जिक्र ना करें।

लोगों की नजरों में आना

टेक्नोलॉजी के साथ यह बीमारी भी आती है। इसे आप 'एफबी अटेंशन सिंड्रोम' कह सकते हैं। लोगों के पास नई टेक्नोलॉजी आती नहीं कि वे हर वक्त, हर किसी से सिर्फ उसकी ही बात करते नजर आते हैं। अटेंशन पाने की होड़ में वे इस कदर जुट जाते हैं कि उनके दिमाग में सिर्फ फेसबुक स्टेटस, फोटो और कमेंट का ही खयाल बना रहता है। ऐसे में आपको कुछ दिन बिना तकनीक के भी गुजारना चाहिए क्योंकि यह लत ठीक नहीं है।

दोस्ती हुई दूर

जिंदगी में वर्चुअल दोस्तों से काम नहीं चलता। फेसबुक, याहू, ट्विटर और गूगल ने हमें एक आकर्षक वर्चुअल दुनिया से तो रूबरू कराया है, लेकिन हमारे स्कूल-कॉलेज और ऑफिस के दोस्त महज यादों और एफबी वॉल पर ही रह गए हैं। चैट से ही हम अपने हिस्से की दोस्ती निभा लेते हैं। ऐसे में आपके पास मौका है कि खुद को मोबाइल और लैपटॉप जैसी तकनीक से दूर करें और उनसे मिलने का प्लान बनाएं।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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