Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

स्‍पांडिलाइटिस से भी हो सकता है गर्दन में दर्द

गलत पोस्‍चर और सोने के गलत तरीके से गर्दन में दर्द होना स्‍वाभाविक है, लेकिन गर्दन में दर्द की समस्‍या सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के कारण भी हो सकती है, तो इससे होने वाले दर्द को पहचानें।

दर्द का प्रबंधन By Rahul SharmaFeb 26, 2015

गर्दन में दर्द अर्थात सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस

प्रतिदिन होने वाली समस्याओं में गर्दन दर्द या सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस भी एक तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍य की तरह है। घंटो टकटकी लगाकर डेस्क पर काम करने वाली जॉब के चलते गर्दन में दर्द होना सामान्‍य हो गया है। वैसे तो यह समस्‍या सामान्‍य होती है लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप भी ले सकती है। तो चलिये जानें कि स्पांडिलाइटिस क्या है और क्यों होता है व इसके उपचार के विकल्‍पों के बारे में भी जानें।
Images courtesy: © Getty Images

गर्दन का दर्द

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस अर्थात गर्दन का दर्द गर्दन की लगभग सात हड्डियों को प्रभावित करता है। इसके कारण गर्दन में लगातार दर्द रहने लगता है और अकड़न भी महसूस होने लगती है तथा इससे रीढ़ का मूवनमेंट भी सीमित हो जाती है। इन हड्डियों की नाड़ियां जिस-जिस स्थान से गुजरती है वहां भी दर्द या झुनझुनाहट महसूस होती है। पहले देखा जाता था कि सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का दर्द उम्र के साथ बढ़ता था, लेकिन अब दिनचर्या के होते बदलावों के कारण यह दर्द कम उम्र के लोगों को भी हो जाता है।
Images courtesy: © Getty Images

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लक्षण

इस रोग की शुरुआत में रोगी को पहले गर्दन में जकड़न होती है, जो बाद में दर्द में बदल जाती है। और फिर गर्दन के दर्द के बाद य ह धीरे-धीरे कंधों, बांहों और हाथ की उंगलियों तक महसूस होने लगता है। गर्दन की सात हड्डियों में से किसी भी हड्डी में गैप बढ़ने के कारण या हड्डी के घिस जाने की वजह से ये दर्द महसूस होता है।
Images courtesy: © Getty Images

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के कराण

अगर चिकित्सा वित्रान की भाषा में समझा जाए तो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस गर्दन के आसपास के मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी और सर्विकल वर्टेब के बीच के कुशनों (जिसे इंटरवर्टेबल डिस्क के नाम से भी जाना जाता है) में कैल्शियम का डी-जनरेशन, बहिःक्षेपण और अपने स्थान से सरक जाने के कारण होता है। लगातार काफी समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठे रहने, मोबाइल फोन पर गर्दन झुकाकर काफी समय तक बात करने और खआन-पान के अव्यवस्थित होने से ये समस्या अधिक होती है।
Images courtesy: © Getty Images

गलत पोस्चर के कारण

ज्यादातर मामलों में यह दर्द गलत पोस्चर के कारण होता है। उदाहरण के तौर पर कंप्यूटर पर लगातार काम करने से, कई घंटों तक टीवी लेट कर या बैठकर देखने से, कई सालों से लगातार डेस्क जॉब करने वालों को, अधिक देर तक सिलाई का काम करने पर, बिस्तर पर बैठकर या लेटकर पढ़ाई करते समय, अधिक ड्राइविंग करने पर, सिर आगे की ओर झुकाकर काम करने पर, रात में गलत पोस्चर में सोने से, गर्दन को झटके व मोडने पर ये होता है।
Images courtesy: © Getty Images

चोट या ऑस्टियोअर्थराइटिस के कारण

खेलते समय या किसी दूसरे कारण से रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर भी स्पांडिलाइटिस होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा ज्यादा देर तक गर्दन झुका कर काम करने, भारी बोझ उठाने और ज्यदा ऊंचे तकिए पर सोने के कारण भी स्पांडिलाइसिस हो सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण भी स्पांडिलाइटिस हो सकता है।
Images courtesy: © Getty Images

क्या करें

यदि एक दिन गर्दन में दर्द होता है और रात को आराम के बाद दर्द ठीक हो जाता है तो घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन अगर दर्द लगातार दो तीन दिन तक  रहे या चक्कर आएं तो पेन किलर ले सकते हैं। लेकिन यदि फिर भी दर्द में खास फायदा न मिले तो डाक्टर से संपर्क करें। इस रोग का होम्योपैथी इलाज भी है।
Images courtesy: © Getty Images

इससे बचाव

सोते वक्त गर्दन के नीचे तकिया न लगाएं। अगर बहुत जरूरी हो तो पतला तकिये का ही प्रयोग करें। दर्द वाले दिनों में हार्ड बेंड का प्रयोग करें। खड़े रहते वक्त व कुर्सी पर बैठते समय रीढ़ को सीधा ही रखें। आस-पास या ऊपर-नीचे देखने के लिए गर्दन को झटके से न घुमाएं। गर्दन की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से काफी फायदा होता है, लेकिन एक्सरसाइज विशेषज्ञ की निगरानी में ही करें।
Images courtesy: © Getty Images

क्या न करें

डेस्क जॉब करने वाले लोग एक घंटे के अंतराल में उठकर एक छोटा-सा चक्कर लगा लें और यदि यह संभव न हो तो गर्दन के हल्के-फुल्के व्यायाम करें।  लंबी दूरी की ड्राइविंग से बचें। य दि बहुत जरूरी हो तो बीच में थोड़ा आराम जरूर कर लें। लगातार न तो सिलाई मशीन पर काम करें और न ही टीवी अधिक समय तक देखें। इसके अलावा सोते समय टेढ़े-मेढ़े न सोएं।
Images courtesy: © Getty Images

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK