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इमर्जेंसी गर्भनिरोधक से जुड़ी इन अफवाहों का सच जरूर जानें

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कितना सही है और कितना गलत, इसके बारे में इस स्लाइडशो में पढ़ें।

सभी By Devendra Tiwari / Oct 17, 2016

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां

गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग अनचाहे गर्भ से बचने के लिए है। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों (ईसीपी) को लेकर चिकित्सा विज्ञान पिछले 50 से अधिक सालों से अनुसंधान कर रहा है। लेकिन इसे लेकर अब भी लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ महिलायें इसका प्रयोग इसलिए नहीं करती हैं, क्यों कि उनको लगता है कि इससे पेट की दूसरी समस्यायें होने लगेंगी और कुछ महिलायें इसकी आड़ में बार-बार असुरक्षित यौन संबंध बनाने से परहेज नहीं करती हैं। इस स्लाइडशो में हम आपको आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़े मिथकों के बारे में बता रहे हैं।

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मिथ – इससे असुरक्षित यौन संबंध की संभावना बढ़ती है

सच – आपातकालीन गोलियों के बाजार में आने से ऐसी अफवाह उड़ी है कि इनके कारण असुरक्षित यौन संबंध की संभावना बहुत बढ़ गई है। क्योंकि महिलायें यौन संबंध के बाद इनका सेवन कर लेती हैं और इसकी वजह से वे बार-बार असुरक्षित यौन संबंध बनाने से पीछे नहीं हटती हैं। हालांकि दुनियाभर में की गयी कई रिसर्च ये अवश्य दर्शाती हैं की इन दवाओं के आसानी से उपलब्ध होने के बावजूद भी सामान्य गर्भ निरोधन तरीकों की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं देखी गयी है। यानी ये गोलियां पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
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मिथ – बार-बार लेने से फर्टिलिटी प्रभावित होती है

सच – किसी चीज की अति बुरी होती है, लेकिन दवाओं के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है जब तक कि मेडिकल साइंस इसको प्रमाणित न कर दे। र्इसीपी का सेवन बार-बार करने से फर्टिलिटी प्रभावित होती है इसका कोई साक्ष्य नहीं है। ये सामान्य गर्भ नियंत्रण गोलियों की ही तरह निर्मित होती हैं, इनमें केवल हार्मोन्स की मात्रा अधिक होती है। हालांकि इनके अधिक सेवन से माहवारी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है। लेकिन अगले महीने में ये असर समाप्त हो जाता है।
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मिथ – आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अगली सुबह लेना सही

सच – इसीपी को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि इनका सेवन यौन संबंध बनाने के अगले दिन करना सही है। जबकि सच्चाई यह है कि यौन संबंध बनाने के जितनी जल्दी हो सके इनका सेवन करें। लेकिन आमतौर पर ये सेक्स के 72 घंटे बाद भी प्रभावी हो सकती है। इसके बाद गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ जाती है और यह निष्क्रिय हो सकती है। इसीपी 24 घंट के भीतर लिया जाये तो ये 95 फीसदी तक असरदार है, 24 से 48 घंटों के बीच 85 फीसदी और 49 से 72 घंटों के बीच 58 फीसदी तक यह असर करती है।
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मिथ – आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां असुरक्षित हैं

सच – कुछ महिलायें इस गोली का प्रयोग इसलिए नहीं करती हैं, क्योंकि उनको लगता है कि ये असुरक्षित हैं। जबकि इसका प्रयोग 1960 हो रहा है। ये सामान्य गर्भ नियंत्रण दवाओं की तरह ही काम करती हैं। लेकिन अगर किसी तरह की स्वास्य समस्या से आप गुजर रही हैं तो बिना चिकित्सक के निर्देश के इन गोलियों का सेवन न करें। लेकिन देखा जाये तो इसे दूसरी दवाओं के साथ लेना गलत नहीं है, क्योंकि इसका दूसरी दवाओं के साथ साइड-इफेक्ट नहीं होता है। हालांकि इसका कुछ हद तक असर हो सकता है जैसे – जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और थकान, आदि।
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मिथ – आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों से मिसकैरेज होता है

सच - इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स उन महिलाओं के लिए फायदेममंद नहीं है जो गर्भवती हो चुकी हैं। यानी इसका प्रयोग यौन संबंध बनाने के एक निश्चित समय के अंदर किया जाये तभी ये प्रभावी हैं। दरअसल ये गोली हार्मोन्स अण्डोत्सर्ग को विलम्बित करने का काम करती है, गर्भाशय नाल में विसर्जित शुक्राणु को अण्डों से मिलने से रोक दिया जाता है और गर्भ नहीं ठहरता। ये गोलियां उर्वरता को निषेधित करके या उर्वर अंडे को गर्भाशय की दीवार से चिपकने से रोक कर भी गर्भ निरोधन का काम करता है।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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