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शादी से जुड़े राज हर मां को अपनी बेटी को बताने चाहिए

शादी के बाद आप ऐसे घर में जाती हैं जहां लगभग सभी लोग आपके लिए अनजान होते हैं और ऐसे में आपके मां द्वारा सिखाये गये टिप्‍स आपके लिए बहुत कारगर होते हैं और शदी के बाद के जीवन के हर कदम पर मदद करते हैं।

डेटिंग टिप्स By Nachiketa SharmaJan 16, 2015

शादी से जुड़े राज

शादी के बाद आप एक ऐसे घर में जाती हैं जहां पर आप सबके लिए सब और सबके लिए आप अजनबी की तरह है। आपकी शादी पर इससे अच्छा उपहार क्या हो सकता है कि एक मां शादी की दहलीज पर खड़ी बेटी को ऐसी बातें बतायें जिससे उसकी जिंदगी सुगम हो जाये। लव मैरेज हो या अरेंज मैरेज, जोडियां स्वर्ग में बनती हैं और यदि आपकी मां जीवन के इस नए दौर में यदि आपका मार्गदर्शन करती है तो आपका जीवन और भी आसान हो जाता है। आपकी सासू मां और आपके पति को प्रभावित करने के लिए हर मां को अपनी बेटी को कुछ राज बताने चाहिए।

रिश्‍ते को बनाये रखें

आप एक नये रिश्‍ते में बंधने जा रही हैं, इस रिश्ते में सही कारणों से प्रवेश करे और उसे बनाये रखें। मां को अपनी बेटी को यह अवश्य सिखाना चाहिए कि स्नेह, निस्वार्थता और कृतज्ञता ही सच्चा प्रेम है। यदि ये गुण किसी रिश्ते में नहीं हैं तो अब वह समय है जब आपको अपने कदमों पर फिर से विचार करना चाहिए। अकेले हो जाने का डर या किसी सामाजिक दबाव के कारण किसी के साथ रहना ठीक नहीं। उसे वास्तविक प्यार से परे प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए।

प्रेम को जांचें नहीं

प्रेम का परीक्षण नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि वह असीम हो सकता है। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो क्या कभी भी आप उसको आग से खेलने के लिए कहेंगे? किसी के प्यार की परीक्षा लेना ऐसा करने के बराबर ही है। अपने बेटी को स्वयं पर, अपने पति पर तथा अपने रिश्ते पर बिना किसी शर्त विश्वास रखने की सीख दीजिए। इससे वह एक स्वस्थ रिश्ते का निर्माण करने के लिए तैयार होगी।

प्‍यार को महसूस कीजिए

प्‍यार का प्रदर्शन करना जरूरी नहीं है, अगर आप किसी को चाहते हैं तो उसका एहसास कीजिए। शादी के बाद भले ही आप अपने सास-ससुर के साथ एक घर में न रहते हों परन्तु फिर भी उनके तथा घर के बड़े सदस्यों के साथ आपके संबंध बहुत महत्व रखते हैं। आपको कुछ चीजें दूसरों के लिए भी करनी पड़ती हैं और कभी-कभी उन्हें स्वयं से अधिक प्राथमिकता भी देनी पड़ती है।

दबाव न डालें

शादी के बाद अपने पति पर अधिक दबाव न डालें, हो सकता है उसके सामने किसी दूसरे तरह की समस्‍या हो और उनकी वजह से वह आपकी बात न मान रहा हो, यह बात भी मां को अपनी बेटी को सिखाना चाहिए। प्रत्येक रिश्ते को खिलने के लिए समय और व्यक्तिगत स्थान की आवश्यकता होती है। अपनी बेटी को याद दिलाएं कि उसे अपने जीवनसाथी को इसे समझने के लिए समय दें। उसे बताएं कि उसकी भावनाएं और आवश्यकता उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर हावी न हों।

स्‍वयं का विकास करते रहें

शादी के बाद कहीं ऐसा न हो कि आप दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में अपनी इच्‍छाओं और भावनाओं को भूल जायें। एक मां को अपनी बेटी को ऐसा आहार देना चाहिए जिसमें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास प्रचुर मात्रा में हो। इससे वह परिवार के विकास के साथ ही अपने विकास पर भी ध्‍यान दे पायेगी।

शादी इच्‍छापूर्ति नहीं है

शादी के बाद भी आपका शरीर सिर्फ इच्छापूर्ति के लिए नहीं है, बल्कि यह दो आत्‍माओं का मिलन है जिसे पूरी जिंदगी साथ चलना है। मां को अपनी बेटी को अपने शरीर से प्यार करना सिखाना चाहिए। यह मात्र उपयोग करने के लिए नहीं है। उसका शरीर केवल इसलिए नहीं है कि उसका जीवनसाथी ही उसे प्यार करे बल्कि उसे स्वयं भी इसक आनंद उठाना चाहिए और इसकी देखभाल करनी चाहिए।

शादी यानी समर्पण और क्षमा

शादी होने के बाद के पहले कुछ महीने बहुत चुनौतीपूर्ण होते हैं। विशेष रूप से तब जब अरेंज मैरिज हो जिसमें लड़की का जीवनसाथी परिवार द्वारा चुना जाता है जिसे लड़की उसके गुण दोषों के साथ स्वीकार करती है। ऐसे में मां अपनी बेटी को सिखाये कि पहले वह अपनी कमियों को स्वीकार करने की आदत डाले। इससे वह अपने पति को आसानी से अपना सकेगी क्योंकि वह यह बात जान जायेगी कोई भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं होता और समर्पण से अच्छा है कि कुछ बातों पर ध्यान न देना ही खुशी की चाबी होती है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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