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जीवन शैली से जुड़े तत्‍व जो देते हैं आपको अवसाद

अवसाद यूं तो मानसिक बीमारी है, लेकिन इसके पीछे लाहफस्‍टाइल से जुड़े कई तत्‍व काम करते हैं। हमारा जीवन जीने का अंदाज ही यह तय करता है कि हम अवसाद के शिकार होंगे या नहीं।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Bharat MalhotraSep 22, 2014

जीवनशैली और अवसाद

हमारी जीवनशैली ही जीवनस्‍तर तय करती है। और यदि हम अपनी जीवनशैली को सही न रखें तो इसके कारण हमें कई परेशानियां हो सकती हैं। अवसाद भी इनमें से एक है। अवसाद यूं तो एक मानसिक बीमारी है, लेकिन इसके पीछे हमारी जीवनशैली संबंधी कारण भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं।

अकेलापन

एक शोध के अनुसार सामाजिक जुड़ाव तनाव और अवसाद को दूर करने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है। हालांकि, अवसादग्रस्‍त व्‍यक्ति को लगता है कि उसके सा‍थ कोई खुश नहीं रह सकता। और इससे वे और अधिक अकेलेपन में चले जाते हैं। इस तरह के विचार आपको और परेशानी में डाल सकते हैं। तो, बेहतर है कि ऐसे नकारात्‍मक विचारों से दूर ही रहा जाए। अकेलेपन को दूर करने के लिए किसी समूह के सदस्‍य बनें, पुराने दोस्‍तों से मिलिये।

क्षोभ

कोई ऐसा नहीं जिसके जीवन में कभी तकलीफ न आए। किसी का दिल टूटता है, तो किसी की नौकरी चली जाती है। कोई परिजन के जाने से दुखी होता है, तो किसी को कोई अन्‍य चिंता सताती है। ये सब परिस्थितियां कहीं न कहीं दुख और क्षोभ का कारण बनती हैं। अगर आपके जीवन के बीते एक बरस में ऐसी कोई घटना घटित हुई है, तो संभव हे कि आपके अवसाद के पीछे इनमें से ही कोई कारण हो। क्षोभ अवसाद को जन्‍म देता है, आप प्रेरणाहीन महसूस रकते हैं, आपको चिड़चिड़ेपन का अहसास होता है। जो चीजें कभी आपको उत्‍साहित करती थीं, उनसे आपके तार टूटे हुए महसूस होते हैं। आपका ध्‍यान बंटा जाता है और इसका असर आपकी नींद और खानपान पर भी पड़ता है।

रूठ जाए निंदिया

कभी आपने महसूस किया है कि जिस रात आप अच्‍छी तरह नहीं सोते अगली सुबह आपको कितनी परेशानी होती है। आप सारा दिन थके-थके महसूस करते हैं। आपका मूड बिगड़ा हुआ रहता है और ऊर्जा का स्‍तर भी सामान्‍य से कम रहता है। आपका शरीर सही प्रकार काम नहीं करता। अवसाद का असर आपकी नींद पर भी पड़ता है। इससे आपके शरीर का सामान्‍य चक्र भी प्रभावित होता है। आप इस बारे में अपने डॉक्‍टर से जरूर बात करें। उससे जानें कि कैसे आप अपनी नींद की समस्‍या को काबू कर सकते हैं। और आप चाहें तो किसी विशेषज्ञ की सहायता भी ले सकते हैं।

समझ न आना

खुशी के लिए आपको अपने जीवन के मायने मालूम होने चाहिये। रिश्‍ते, काम, दूसरों की मदद करने, सीखने, और रचनात्‍मकता से हम अपने जीवन को नये मायने दे सकते हैं। अध्‍यात्‍म भी हमारे जीवन को दिशा देने का काम करता है। अगर आपका करियर पटरी से उतर रहा हो, या फिर आप खोये-खोये महसूस करें, तो आपको अवसाद हो सकता है। वास्‍तव में यह अवसाद आपको इशारा करता है कि आप जिस तरह से जीवन जी रहे हैं, वह सही नहीं है। आपके मूल्‍यों के साथ उन तरीकों का सामंजस्‍य नहीं बैठता। इसे सकारात्‍मक रूप में लें। ये लक्षण आपको बताते हैं कि आपको अपने जीवन में क्‍या बदलने की जरूरत है। और यह संकेत वास्‍तव में आपको जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण अपनाने की ओर प्रेरित करता है।

सुनें जो दिल कहे

अगर आपके दोस्‍त, साथी या फिर माता-पिता हर समय आपमें खोट ही निकालते रहें, तो आपको कैसा लगेगा। जी, कई लोग आपकी आलोचना करेंगे। आपके कामों को गलत ठहरायेंगे। हो सकता है कि इन मौकों पर आपका आत्‍मविश्‍वास डगमगाने लग जाए। लेकिन, यही वह वक्‍त होता है जब आपको अपने दिल की सबसे ज्‍यादा सुनने की जरूरत होती है। अपनी पसंद-नापसंद को महसूस करें। शोधों में यह बात प्रमाणित हुई है कि आत्‍म-संवाद अवसाद से निपटने का कारगर तरीका हो सकता है।

व्‍यायाम न करना

सामाजिक जुड़ाव के साथ ही आपको व्‍यायाम भी ध्‍यान देना चाहिये। अवसाद को दूर करने में व्‍यायाम की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। व्‍यायाम का अर्थ जिम में पसीना बहाना ही नहीं होता। आप कुछ देर की वॉक या जॉगिंग कर सकते हैं। इसके अलावा स्‍विमिंग भी आपको काफी लाभ पहुंचा सकती। रोजाना 20 मिनट तक योग और ध्‍यान करने से भी आपको काफी लाभ मिलता है।

कुदरत से दूर

हाल ही में हुए कई शोध इस बात को प्रमाणित करते हैं कि 'इकोथेरेपी' या 'ग्रीन थेरेपी' से आपको कई लाभ मिल सकते हैं। ये तरीके अवसाद को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इससे मन को शांति मिलती है। आखिर बार कब आप कुदरत के करीब गए थे। कब आपने हरियाली को जी भरकर निहारा था। इसे अपने रोजमर्रा के कामों में शामिल कीजिये। रोजाना सिर्फ पांच मिनट के लिए ही ऐसा करना आपके लिए काफी सुकून भरा हो सकता है। अगर आप किसी महानगर में रहते हैं तो पार्क का रुख कीजिये। रोजाना बस कुछ देर के लिए कुदरत के आंचल में जाना आपके किलए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

बुरी डायट

कई वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि पोषक तत्‍वों की कमी और फूड एलर्जी का संबंध अवसाद से है। उदाहरण के लिए शोध में साबित हुआ है कि भोजन में विटामिन बी और डी की कमी होने से व्‍यक्ति के मूड पर नकारात्‍मक असर पड़ता है, जो आगे चलकर अवसाद का कारण बनता है। यूं तो हर व्‍यक्ति अलग होता है, लेकिन नियमित रक्‍त जांच से आपको मदद मिल सकती है।

सिर्फ काम नो आराम

कई लोग यह सोचते हैं कि एक उम्र के बाद मजे करने का वक्‍त निकल जाता है। या फिर वे यह समझते हैं कि सप्‍ताहांत में काम खत्‍म करने के बाद उन्‍हें मजा करना चाहिये। याद रखिये, काम तो कभी खत्‍म होने का नाम ही नहीं लेता। काम तो चलता रहता है। वह दिन और वह वक्‍त कभी नहीं आता, जब आपके पास कुछ न कुछ काम न हो। तो, अपने रोजमर्रा के काम में से ही अपने लिए कुछ वक्‍त निकालें। वह वक्‍त जब आप अपने लिए कुछ कर सकें। जब आप अपने जीवन का आनंद उठा सकें।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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