जानें क्या होते है भावनात्मक सहानुभूति की कमी के लक्षण

भावनात्मक सहानुभूति का धनी इंसान व्यक्तित्‍व का भी धनी होता है, लेकिन अगर किसी के अंदर इसकी कमी है तो उसमें ये लक्षण हो सकते हैं।

डेटिंग टिप्स By Devendra Tiwari / Aug 22, 2016
क्या है भावनात्मक सहानुभूति

क्या है भावनात्मक सहानुभूति

मानव समाज ऐसा है जहां हर रिश्ता भावनाओं से जुड़ा है और इसी कारण इंसान एक-दूसरे के करीब आता है और दूर भी जाता है। यानी समाज एक तरह से भावनाओं का ताना-बाना बुनता है और इसके कारण लोग एक-दूसरे की सेवा के लिए आगे आते हैं। दूसरे शब्दों में अगर कहा जाये तो भावनायें एक ऐसी परंपरा की तरह हैं जो मानवता को जीवित रखने में अहम योगदान दे रही हैं। लेकिन समाज में हर तरह के इंसान हैं और वे भावनाओं को ज्यायदा अहमियत नहीं देते हैं। अगर आपके अंदर भी भावनात्मक सहानुभूति की कमी है तो आपके अंदर ये लक्षण हो सकते हैं।
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दूसरे पर दोषारोपण करना

दूसरे पर दोषारोपण करना

जब हम कोई काम करते हैं और उसमें गलती करते हैं लेकिन उस काम के लिए एक से अधिक लोग जिम्मेदार होते हैं, लेकिन उस काम में गलती आपकी होती है फिर भी आप उसके लिए दूसरे को जिम्मेदार मानते हैं। यानी भावनाओं को अहमियत न देने वाले लोग दूसरों पर दोषारोपण कर देते हैं। भावनात्मक सहानुभूति की कमी वाले लोगों का यह पहला लक्षण होता है।
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आसानी क्षमा न करना

आसानी क्षमा न करना

ऐसा कहते हैं कि गलती करने वाले से अधिक महान क्षमा करने वाला है। क्योंकि उसने उस इंसान की कमियों को आसानी से क्षमा कर दिया। लेकिन जिन लोगों के अंदर भावनात्मक सहानुभूति की कमी होती है वे दूसरों को आसानी से क्षमा नहीं करते हैं। हालांकि गलती सभी से होती है और लोग क्षमा भी कर देते हैं। फिर भी इस तरह की प्रवृत्ति वाले लोग आसानी से और जल्दी क्षमा नहीं करते हैं।
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दूसरों को अहमियत न देना

दूसरों को अहमियत न देना

जिंदगी के सफर में हर तरह के लोग मिलते हैं और सभी की अहमियत होती है। जो इंसान दूसरे के साथ जुड़ा है उसकी अहमियत भी होना लाजमी है। लेकिन भावनात्मक सहानुभूति की कमी वाले शख्स अपने सामने किसी दूसरे की परवाह नहीं करते हैं और वह अपनी जिंदगी में दूसरों को बिलकुल भी अहमियत नहीं देते हैं।
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लोगों की बातों का कोई मतलब नहीं

लोगों की बातों का कोई मतलब नहीं

हालांकि दूसरे शब्दों में अगर ये कहा जाये कि किसी के बारे में कोई क्या कहता है इसका फर्क न पड़ना अच्छी बात है। लेकिन सामाजिक जीवन में यह सही नहीं है। क्योंकि समाज में हम एक-दूसरे से जुड़े हैं और लोगों के विचार भी पूरी तरह से मायने रखते हैं। इसी से समाज में इंसान के व्यक्तित्व का भी पता चलता है। लेकिन भावनात्मक सहानुभूति की कमी वाले इंसान के ऊपर समाज और सामाजिक जीवनशैली का प्रभाव नहीं पड़ता है।
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