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जानें शारीरिक रसायनों से कैसे प्रभावित होता है प्यार

प्यार जताने के पीछे जो विज्ञान है उसमें शारीरिक संबंधों का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां एक बात यह भी है कि अगर कोई तनाव या अवसादग्रस्त है तो वह सही तरीके से शारीरिक तालमेल भी नहीं बैठा पाता है। इस स्लाइडशो में यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर

डेटिंग टिप्स By Devendra Tiwari Jul 26, 2016

शारीरिक रसायन और लव

हम सभी जानते हैं और यह सामान्य सी बात भी है कि प्यार को जवां रखने में पार्टनर के साथ बिस्तर पर बेहतर तालमेल का होना बहुत जरूरी है। आदमी का एक-दूसरे के प्रति झुकाव उतना सामान्य नहीं है जितना हम समझते हैं, हम जो भी करते हैं चाहे वह शरीर से हो दिमाग से एक-दूसरे से संबंधित हैं। यानी प्यार जताने के पीछे जो विज्ञान है उसमें शारीरिक संबंधों का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां एक बात यह भी है कि अगर कोई तनाव या अवसादग्रस्त है तो वह सही तरीके से शारीरिक तालमेल भी नहीं बैठा पाता है। इस स्लाइडशो में यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कैसे शारीरिक रसायन से प्या र प्रभावित होता है।

रसायनों का प्यार पर पड़ने वाला प्रभाव

हम सबने पढ़ा होगा कि दिमाग में केमिकल प्रोसेस होता है जिसके जरिये डोपामाइन जैसे हार्मोन का स्राव कम और ज्यादा होता है। यह हार्मोन प्यार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। जब हम किसी के नजदीक आते हैं तबसे ही दिमाग के ये केमिकल प्रभावी होने लगते हैं और जैसे-जैसे हम और करीब आते हैं ये अधिक प्रभावी हो जाते हैं। विज्ञानी इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले केमिकल लोचे को कोकीन जैसे मादक से अधिक खतरनाक भी मानते हैं।

प्यार और आकर्षण के विभिन्न चरण

दिमागी हलचल तभी शुरू हो जाती है जब हमारा झुकाव किसी की तरफ होने लगता है और हम किसी को पसंद करने लगते हैं। क्योंकि टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन हार्मोन दिमाग पर प्रभावी हो जाते हैं। जब किसी के प्रति हम सम्‍मोहित हो जाते हैं तब हमारे दिमाग के कुछ हिस्सो से एड्रेनेलाइन, डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव होता है और आप उसके प्रति आशक्त हो जाते हैं। इसी दौरान उस इंसान के प्रति अच्छे विचार भी आने लगते हैं।

प्यार मिल जाने के बाद

अंततोगत्वा हमें जब प्यार हो जाता है तब इन सारे हार्मोन का स्राव एक साथ होने लगता है। इस दौरान ऑक्सीटोसिन हार्मोन हमारे दिमाग में रोमांस भरता है। यह ऐसा हार्मोन है जिसके कारण पार्टनर के प्रति झुकाव के साथ एक तरह का मानसिक संबंध भी विकसित हो जाता है। यानी यह ऐसा पल होता है जहां दिमाग में ये भावनायें आती हैं कि ये आपका ‘’सच्चा  प्यार’’ है। यहीं पर ऐसा एहसास भी होता है कि आप एक-दूसरे के लिए बने हैं और आपको कोई जुदा नहीं कर सकता।

कामोत्तेजना और प्यार

इसके बाद का जो चरण होता है वह कामोत्तेजना। यानी इस स्टेज में आप प्यार से आगे बढ़ना चाहते हैं और एक-दूसरे के बहुत करीब आना चाहते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है। लेकिन ऐसा टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन हार्मोन के स्राव के कारण होता है और इसके कारण ही पुरुष और महिला एक-दसरे के साथ यौन सुख की कामना करने लगते हैं।

दिल टूटने के बाद

प्यार मिलने के बाद रसायन के कारण अच्छे विचार आते हैं तो दिल टूटने के बाद बुरे विचार भी आते हैं। ब्रेकअप के बाद क्रोध, गुस्सा, तनाव, अवसाद जैसी स्थिति सामने आती है। यह तब होता है दिमाग में डोपामाइन का स्तर गिरने लगता है। यह इंसान के बुरे दिनों में से एक हो सकता है। इस दौरान आदमी अच्‍छे और बुरे में फर्क नहीं कर पाता। कुछ लोग तो अधिक तनाव के कारण गलत कदम भी उठा लेते हैं। कुछ दिनों बाद जब स्थिति सामान्य हो जाती है तब इंसान कि सामान्य दिनचर्या शुरू होती है और सब पहले के जैसा सामान्य हो जाता है। इसके बाद दिमाग में दोबारा से प्यार में पड़ने के विचार आते हैं और फिर वही होता है जो पहले हो चुका होता है।
Image Source : Getty

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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