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एंजियोग्राफी से जुड़ी ये 5 जरूरी बातें, जानें

एंजियोग्राफी बंद और संकुचित शिराओं को खोलने व अन्य जटिल बीमारियों का पता लगाने में मददगार है। ऐसे में इस तकनीक से जुड़ी जरूरी बातें आपको जरूरी जाननी चाहिए।

तन मन By Gayatree Verma / Oct 19, 2016

क्या है एंजियोग्राफी

रक्त वाहिनी नलिकाओं धमनी व शिराओं का एक्स-रे लेकर उसका चिकित्सकीय अध्ययन करना एंजियोग्राफी कहलाता है। एंजियोग्राफी का प्रयोग दिल की बीमारियों, किडनी संक्रमण, ट्यूमर एवं खून का थक्का जमने व अन्य बीमारियों की जांच करने में किया जाता है। एंजियोग्राफी में एक्स-रे के दौरान रेडियोधर्मी तत्व या डाई का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे की शरीर की रक्त वाहिनी नलिकाओं को एक्स-रे के जरिये साफ-साफ देखा जा सके। लेकिन इस एक्स-रे के पहले और बाद में कुछ जरूरी बातों को मानना हर इंसान के लिए काफी जरूरी होता है। तो आइए इस स्लाइडशो में एंजियोग्राफी से जुड़ी इन 5 बातों को जानें जो आपके लिए जरूरी हैं।

मधुमेह की दवाइयों का सेवन रोकें

अधिकतर लोग इस एक्स-रे के दौरान दवाइयों का सेवन करने और ना करने के बीच में कशमकश में रहते हैं। कई लोगों का मुख्य सवाल होता है कि एंजियोग्राफी से पहले उन्हें किस प्रकार की दवाइयों का सेवन रोक देना चाहिए? अगर आपका भी यही सवाल है तो इसका जवाब है मधुमेह की दवाइयां। अगर आप मधुमेह की कोई भी दवा खा रहे हैं तो आप एंजियोग्राफी वाले दिन उन्हें ना खाएं। वहीं खून को पतला करने की कोई दवा खाते हैं तो उन्हें खाते रहें।

भारी नाश्ता ना करें

एंजियोग्राफी के लिए सबसे जरूरी है कि आपके शरीर में कोई अनावश्यक चीज ना हो जिससे एक्स-रे साफ-साफ हो जाए। ऐसे में एंजियोग्राफी वाले दिन एंजियोग्राफी से तीन घंटे पहले कुछ भी ना खाएं। और अगर एंजियोग्राफी शाम या दिन के समय है तो सुबह हल्का ही नाश्ता करें।

दिया जाता है एनेस्थिसिया

सामान्य तौर पर एंजियोंग्राफी में 15 से 20 मिनट का समय लगता है इसलिए डॉक्टर एंजियोग्राफी के दौरान मरीज को लोकल एनेस्थिसिया देते हैं। इसमें मरीज केवल बेसुध होता है लेकिन उसको पता होता है कि उसके आसपास क्या हो रहा है। जबकि प्योर एनेस्थिसिया में मरीज को पता नहीं चलता कि उसके साथ क्या हो रहा है। इसलिए अगर आप एंजियोग्राफी के बाद जरूरी काम करने वाले हैं तो तब तक डॉक्टर से एंजियोग्राफी के लिए न कहें जब तक कि आप उसके लिए पूरी तरह तैयार न हों।

उसी दिन करायें एंजियोप्लास्टी

एंजियोप्लास्टी सामान्य तौर पर संकुचित या बाधित हुई रक्त वाहिकाओं को यांत्रिक रूप से चौड़ा करने की एक ट्रीटमेंट है जो एंजियोग्राफी के बाद कराई जाती है। अगर डॉक्टर एक बार एंजियोग्राफी हो जाने के बाद एंजियोप्लास्टी करवाने की सलाह देता है तो एंजियोप्लास्टी करा लेना बेहतर होता है। एंजियोप्लास्टी में एक गाइड वायर को संकुचित स्थान में ले जाकर उसके बाहर वाले सिरे पर एक खाली और पिचक हुआ गुब्बारा रखा जाता है, जिसे बैलून कैथेटर कहा जाता है। फिर इसे सामान्य रक्तचाप (6 से 20 वायुमण्डल) से 75-500 गुना अधिक जल दवाब का उपयोग करते हुए एक निश्चित आकार में फुलाया जाता है और एंजियोग्राफी में भी वायर डाला जाता है। ऐसे में दोनों बार वायर डालने से अच्छा है एक ही बार शरीर में वायर डाला जाए।

चिंता की बात नहीं

एंजियोग्राफी की तकनीक अब ज्यादा सरल और सुगम हो गई है क्योंकि पहले एंजियोग्राफी के दौरान शरीर के अंदर ट्यूब को ग्रॉइन की मदद से डाला जाता था। जिससे कि मरीज़ को 6-8 घंटे तक अस्पताल में ही रहना होता था। वहीं अब एंजियोग्राफी हाथों से ही की जाती है और मरीज को दो घंटों के अंदर ही घर जाने की अनुमति मिल जाती है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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