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ख़ामोश रह जाना बेहतर होता है इन 8 स्थितियों में

रोजमर्रा में कई अवसर ऐसे भी आते हैं जब व्यक्ति की ज़बान, उसके ज्ञान, आचार, व्यवहार एवं व्यक्तित्व को दर्शाने का मुख्य माध्यम बन जाती है। लेकिन इसके उलट कई स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जब आपकी वाणी परेशानी पैदा कर देती है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul SharmaFeb 05, 2015

कुछ मौके जहां आपकी चुप्पी ही बेहतर

काम से ही इंसान की पहचान होती है, और रोजमर्रा में कई अवसर ऐसे भी आते हैं जब व्यक्ति की ज़बान, उसके ज्ञान, आचार, व्यवहार एवं व्यक्तित्व को दर्शाने का मुख्य माध्यम बन जाती है। लेकिन इसके उलट कई स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जब आपकी वाणी सिर-फुटावल की नौबल ला सकती है, या किसी बनती बात को बिगाड़ सकती है। तो ऐसे स्थियों पर आपकी चुप्पी ही बेहतर होती है। तो तलिये जानें ऐसी ही आठ स्थितियां जहां पर मुंह बंद रखना ही बेहतर होता है।
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बिना किसी रचनात्मकता उपयोगिता के विषयों पर..

जिनकी विषयों की कोई रचनात्मक उपयोगिता न हो, उन पर मौन ही रहना बेहतर होता है। उदाहरण के लिये घर व बाहर की छोटी-छोटी बातें, जैसे किसने क्या पहना, क्या बनाया, क्या खाया, देर से आई, जल्दी चली गई वगैरह, वगैरह। इस तरह की टीका-टिप्पणी व्यर्थ होती हैं और इस पर बहस की जाए तो यह मूर्खता ही होगी।
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पूरी जानकारी अथवा ठोस प्रमाण न हो तो..

जब तक किसी विषय की पूरी जानकारी व ठोस प्रमाण न हो, अपने आप को चुप रखना ही बेहतर होता है। ऐसे में बहस करने से आपकी छवि ही धूमिल होगी। इसके अलावा बहस के दौरान विपक्षी अपने तर्क की सत्यता साबित कर दे तो उसे सहजता से स्वीकार करते हुए बहस पर विराम लगा दें, वरना आप कुतर्की कहलाएंगे।
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अगर आपको किसी के प्रेगनेंट होने का शक हो तो...

तो अगर आपको शक हो की आपकी कोई मित्र या सहकर्मी प्रेगनेंट हैं तो, बजाय मुबारकबाद देकर उसे व खुद को सबके सामने शर्मिंदा करने के चुप रहें और खुद उस इंसान को इस बात की घोषणा करने का मौका दें।  
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जब आपके पास कुछ खास कहने को न हो...

यह बड़ी ही मौलिक सी बात है कि, यदि आप 4-5 ज्ञान छलकते गागर के समान लोगों के साथ बैठे हों, जो मानों बात नहीं, बल्कि सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता कर रहे हों, और आपको जीके का न तो जी पता हो और न ही के, तो अपने मुहं को थोड़ी देर बंद करके बैठने में ही भलाई होती है।  
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जब कोई आपको अपमानित करने की कोशिश कर रहा हो..

हालांकि जब कोई आपका अपमान कर रहा हो तो खुद को चुप रख पाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन उसकी बेकार की बातों के लिये कुतर्क करने से चुप रहना ही बेहतर होता है। उस व्यक्तियों को उसी के स्वर में जवाब देने से परिणाम दोनों के लिये ही गलत निकलने वाला है। तो बड़प्पन दिखाएं और होशियारी दिखाकर अपनी चुप्पी से उसे हरा दें।
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जब कोई दूसरा बोल रहा हो....

ये वार्तालाप का एक प्राथमिक सिद्धांत है, लेकिन दुर्भाग्यवश अकसरर लोगों द्वारा भुला दिया जाता है। एक सेहतमंद वार्तालाप के लिये जितना जरूरी लोगों को अपनी बात बताना होता है, उससे भी जरूरी होता है कि जब वे बोल रहें हों तो चुप रह कर शांती और ध्यान से उनकी बात को सुनाना।   
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ड्राइविंक करते समय....

की लोगों को रोमांच बड़ा पसंद होता है, लेकिन रोमांच की कीमत अगर जान हो तो ऐसे रोमांच से दूरी ही भली होती है। जी हां ड्राइव करते समय न तो फोन पर और न ही साथ बैठे या चर रहे लोगों से बात करनी चाहिये। सभी जानते हैं कि इस वक्त बोलना घातक सिद्ध हो सकता है, लेकिन दुर्भग्यपूर्ण है कि इसे मानते कम ही लोग हैं।
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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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