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कहीं आपके काजल में खतरनाक लेड तो नहीं

काजल का प्रयोग बच्चे और बड़े दोनों करते हैं, लेकिन इससे जुड़ी कुछ बातें हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते, इस स्लाडइडशो में उन तथ्यों के बारे में जानें।

तन मन By Devendra Tiwari Sep 05, 2016

काजल और इससे जुड़े कुछ तथ्य

भारत में दशकों से काजल का प्रयोग किया जा रहा है। इसका धार्मिक महत्व भी है, इसके अलावा विज्ञान ने भी इसे आंखों के लिए फायदेमंद माना है। हालांकि इसका प्रयोग किसी एक धर्म से नहीं है, इसे सभी धर्मो के लोग प्रयोग करते हैं। महिलायें आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल का प्रयोग कई तरीके से करती हैं। हालांकि डर्मोटोलॉजिस्‍ट की मानें तो काजल का प्रयोग सभी के लिए सही नहीं है। कुछ लोगों को काजल से एलर्जी भी है। ऐसे दूसरे कई तथ्य हैं जिनसे आप अनजान हैं, इन तथ्यों के बारे में इस स्लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं।

इसके कई नाम

अगर आप देश के दूसरे हिस्सों में जायें तो आपको काजल का नाम सुनने को नहीं मिलेगा, क्योंकि इसके कई नाम हैं। कुछ लोग इसे कोल बुलाते हैं तो कुछ, काजल और कुछ अल-कहल, इसके अलावा इसका नाम सूरमा भी है। भारत में इसका प्रयोग छोटे बच्चों के लिए भी किया जाता है। यह परंपरा है, और इसके पीछे यह मान्यता है कि इससे बुरी आत्मायें दूर रहती हैं। हालांकि यह बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

क्या है इसका इतिहास

काजल के प्रयोग के बारे में इतिहास में कई तरह की लोकोक्तियां हैं। काजल बनाने की विधि से ही इसके प्रयोग की जानकारी मिलती है। इसका सबसे अधिक प्रयोग भारत और अफ्रीका के लोग करते हैं। सूत के दिये को एक स्टील की कटोरी से ढका जाता था और स्टील का नीचे का हिस्सा काला हो जाता है, यही काजल होता था। यह मान्यता थी कि यह सूर्य और बुरी आत्मांओं से बचाता है, इसलिए इसका प्रयोग छोटे और बड़े दोनों करते हैं।

घर का या बाहर का

काजल को घर में भी आसानी से बनाया जा सकता है। हालांकि वर्तमान में बाजार में कई तरह के आई लाइनर काजल के रूप में मिलते हैं। लेकिन अब भी घर या बाहर का काजल प्रयोग करने को लेकर लोगों में मतभेद है। इसलिए जब भी आप काजल का प्रयोग करें तो एक बार डर्मोटोलॉजिस्ट से पूछ लें कि आपके लिए कौन सा बेहतर होगा।

काजल में खतरनाक लेड

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की मानें बाजार में मिलने वाले काजल में अधिक मात्रा में लेड होता है। चूंकि लोगों को लेड के खतरे के बारे में जानकारी नहीं होती है। लेड का बुरा असर बच्चों पर अधिक पड़ता है। इसके कारण एनीमिया, किडनी की समस्यायें, न्यू‍रोलॉजिकल समस्यायें हो सकती हैं। खराब गुणवत्ता वाले काजल के अधिक प्रयोग से मौत तक हो सकती है। इसलिए जब भी बाजार में काजल खरीदें, इसकी गुणवत्ता की जांच कर लें।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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