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डा. अब्‍दुल कलाम के ये 10 टिप्‍स आपको बनायेंगे सफल

पूर्व राष्‍ट्रपति और भारत रत्‍न या फिर मिसाइल मैन इनकी उपलब्धियां बहुत हैं, अगर आप अब्‍दुल कलाम जैसी रचनाशीलता और एकाग्रता और सफलता चाहते हैं तो ये टिप्‍स आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

तन मन By Nachiketa Sharma / Jul 28, 2015

बनें अब्‍दुल कलाम की तरह!

पूर्व राष्‍ट्रपति डा. एपीजे अब्‍दुल कलाम हमारे बीच नहीं रहे। लेकिन उनके द्वारा पढ़ाये गये पाठ हर कदम पर आपका साथ देंगे और जीवन में आपको सफल बनायेंगे। मिसाइल मैन नाम से विख्‍यात अब्‍दुल कलाम सभी उम्र वर्ग के लिए एक मिसाल थे, बच्‍चे हों या बूढ़े, सभी उनके मुरीद थे और हमेशा उनके जीवन से प्रेरित होते थे। उनके जीवन के बारे में जितना कहा जाये उतना कम है, लेकिन अगर आप उनके रास्‍ते पर चलना चाहते हैं और उनके जैसा विवेकवान और रचनाशील बनना चाहते हैं तो ये टिप्‍स आपके काम आ सकते हैं।

कठिन मेहनत करें

देश के 11वें राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि कठिन मेहनत से कभी नहीं घबराना चाहिए। उन्‍होंने खुद कठिन मेहनत करके ये मुकाम हासिल किया। पैसे की तंगी के चलते अखबार बेचना और फिर दिन-रात पढ़ाई करना उनके जीवन का हिस्‍सा था और इससे वे कभी भी नहीं घबराये। उन्‍होंने ये भी कहा, " महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।"

खुली आंखों से सपने देखें

कलाम का मानना था जो लोग बंद आंखों से सपने देखते हैं वे उसे कभी पूरा नहीं कर पाते हैं। इसलिए खुली आंखों से सपने देखना चाहिए। अब्‍दुल कलाम की मानें तो खुली आंखों से सपने देखने वाले लोग उसे पूरा करने का अधिक प्रयास करते हैं। इसलिए बंद आंखों से नहीं खुली आंखों से सपना देखें। कलाम ने कहा, "सपने वो नहीँ जो हम सोते हुये देखते है, सपने वो हैं जो हमे सोने नहीँ देते।"

असफल कहानियां पढ़ें

मिसाइल मैन का मानना था कि अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो सक्‍सेफुल यानी सफल लोगों की नहीं बल्कि अनसक्‍सेसफुल यानी असफल लोगों की कहानी पढ़ें। इससे आप असफलता की राह पर ले जाने वाली गलतियों को नहीं दोहरायेंगे और सफलता आपके कदम चूमेगी।

आम आदमी भी खास है

आम आदमी भी खास इनसान है इसकी सबसे अच्‍छी मिसाल डा. कलाम थे। एक साधारण से नाविक के बेटे अब्‍दुल पाकिर जैनुलाब्‍दीन अब्‍दुल कलाम का जन्‍म 15 अक्‍टूबर को तमिलनाडु के रामेश्‍वरम हुआ। भारत की अत्याधुनिक रक्षा तकनीक की चाह के पीछे एक इसी सख्सियत का योगदान है। देश के उपग्रह कार्यक्रम, निर्देशित और बैलेस्टिक मिसाइल परियोजना, परमाणु हथियार और हल्के लड़ाकू विमान परियोजना में उनके योगदान ने उनके नाम को हर भारतीय की जबान पर ला दिया।

बोलने का अनोखा अंदाज

अब्‍दुल कलाम का बोलने का अंदाज भी अनोखा था, इसके कारण बच्‍चों और छात्रों में उनकी एक अलग पहचान थी। अपनी अनोखी संवाद कुशलता के चलते कलाम अपने भाषणों और व्याख्यानों में छात्रों के बीच हमेशा से ही लोकप्रिय रहे। अपने व्याख्यान के बाद वह अक्सर छात्रों से उन्हें पत्र लिखने को कहते थे और मिलने वाले सभी संदेशों का जवाब देते भी देते थे। मिसाइल कार्यक्रम में उनके योगदान के लिए उन्हें 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण प्रदान किया गया।

असीमित है हमारी क्षमता

अब्‍दुल कलाम का मानना था कि व्‍यक्ति की क्षमता असीमित है और वह अपनी कल्‍पनाशीलता और रचनात्‍मकता के दम पर असंभव को भी संभव बना सकता है। उनके शब्‍दों में, "भगवान ने हमारे मष्तिष्क और व्यक्तित्व में असीमित शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। इश्वर की प्रार्थना हमें इन शक्तियों को विकसित करने में मदद करती है।"

निष्‍ठा और एकाग्रता है जरूरी

पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम का मानना था कि अगर आप सफल होना चाहते हैं और अपने मिशन में कामयाब होना चाहते हैं तो अपने लक्ष्‍य के प्रति एकचित्त निष्ठावान बनिये। उन्‍होंने कहा, "अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।"

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