• shareIcon

एरोमाथेरेपी से जुड़े तथ्‍यों के बारे में जानें

वैकल्पिक चिकित्‍सा के ही एक प्रकार यानी एरोमाथेरेपी से जुड़े कुछ तथ्‍यों की जानकारी के लिए जरूरी पढ़ें हमारा यह स्‍लाइड शो।

घरेलू नुस्‍ख By Pooja Sinha / Aug 21, 2015

एरोमाथेरेपी से जुड़े तथ्‍य

आयुर्वेद या होम्‍योपैथ की तरह एरोमाथेरेपी भी वैकल्पिक चिकित्‍सा का एक प्रकार है। एरोमाथेरेपी का उद्देश्‍य आवश्‍यक तेलों और अन्‍य खुशबूदार संयंत्र यौगिकों का उपयोग कर व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य और मनोदशा में सुधार लाना है। इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से हम आपको एरोमाथेरेपी जैसी वैकल्पिक चिकित्‍सा से जुड़े कुछ तथ्‍यों के बारे में जानकारी देगें।

सिर्फ खुशबुओं से इलाज करती है एरोमाथेरेपी

ऐरोमा का अर्थ है खुशबू और थेरेपी का उपचार। ऐरोमाथेरेपी उपचार की वह पद्धति है जिसमें खुशबू के द्वारा अनेक बीमारियों का निदान संभव है। जी हां, आपको बीमारी के लिए गोली, कैप्सूल या कुछ भी लेने की जरूरत नहीं होती, एरोमाथेरेपी खुशबुओं से इलाज करती है। आवश्‍यक तेल की खुशबू का अहसास ही इलाज होता है। प्रत्येक खुशबू से सीधे हमारा मस्तिष्क प्रभावित होता है, हर तेल में एक विशेष प्रकार की उपचारिक शक्ति होती है, जिसके द्वारा पूर्ण रूप से प्राकृतिक उपचार होता है।

तेल पौधे के हर हिस्‍से की छोटी बूंदों से बनता है।

आवश्‍यक तेल संयंत्र कोशिकाओं के बीच छोटी बूंदों के रूप में मौजूद रहते हैं। यह बूंदें प्रकृति में सुंगधित होती है और सत्‍त फूल, घास, बीज, जड़ी बूटी, खट्टे फल, पत्ते, छाल और जड़ों की छाल से निकाले जाते हैं।

बहुत महंगे होते है ये तेल

क्‍या आप जानते हैं कि यह तेल बेहद महंगे होते है, क्‍योंकि इन्‍हें बनाने की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है और इसका श्रम ज्‍यादा और महंगा होता है। गुलाब की तेल की एक बूंद को बनाने में 30 से ज्‍यादा गुलाब के फूलों का इस्‍तेमाल किया जाता है और इस लिक्विट का एक लीटर बनाने में 4-5 लाख से ज्‍यादा खर्च होता है।

तेलों में पौधों के जरूरी एसेन्स की मौजूदगी

पौधे के जरूरी एसेन्‍स मौजूद होने के कारण इन तेलों में कई प्रकार के चिकित्‍सकीय गुण होते है। यह तेल पौधों की जलवायु परिवर्तन, कीट, रोग आदि से रक्षा करता है और शोधों के अनुसार तेजी से मनुष्य के लिए अपने प्रभाव का प्रदर्शन करते है!

उपचार का रूप होता है बेहद व्यक्तिगत

इसकी खुशबू का असर अलग-अलग व्‍यक्ति पर अलग-अलग प्रकार से होता है। जैसे एसिडिटी, गुस्‍से, अल्‍सर, बुखार आदि के इलाज के लिए कुलिंग और शांत प्रभाव वाले गार्डेनिया, चमेली, गुलाब, चंदन आदि का प्रयोग किया जाता है। जबकि सिरदर्द, तंत्रिका चिंता, अनिद्रा आदि से ग्रस्‍त लोगों के लिए गर्म और स्फूर्तिदायक तेल जैसे कपूर का इस्‍तेमाल किया जाता है।

अन्‍य बीमारियों का इलाज करती है एरोमाथेरेपी

एरोमाथेरेपी में कई प्रकार के तेलों का उपयोग विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों जैसे अ‍पच, अनिद्रा, मुंहासे, दर्द, तनाव आदि को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा आप इन तेलों का उपयोग कामुक भावना को जगाने, दिमाग को तेज करने और चेतना का विस्‍तार करने के लिए भी कर सकते हैं।
Image Source : Getty

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK