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मानव मानसिकता के बारे में अविश्वसनीय तथ्य

मनोविज्ञान में मानस (मानसिकता) सचेत और अचेत दोनों ही सूरत में मानव मन की सम्पूर्णता होती है। लेकिन जीवन में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो मानव मन की तुलना में अधिक दिलचस्प होती हैं।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Rahul Sharma / Dec 24, 2014

मानव मानसिकता और अविश्वसनीय तथ्य

मनोविज्ञान में मानस (मानसिकता) सचेत और अचेत दोनों ही सूरत में मानव मन की सम्पूर्णता होती है। लेकिन जीवन में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो मानव मन की तुलना में अधिक दिलचस्प होती हैं। आज हम आपको मानव मानसिकता के बारे में ऐसा ही कुछ अविश्वसनीय तथ्य बताने जा रहे हैं जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे।
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लक्ष्यों के बारे में बताना

शोधों से इस बात की पुष्टी हो चुकी है कि आप दूसरों को अपने लक्ष्यों के बारे में बताते हैं तो आपके द्वारा उन्हें प्राप्त करने की संभावना कम हो जाती है। क्योंकि इससे आपका आत्मविश्वास और प्रेरणा खो जाती है।  
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मनोवैज्ञानिक फोबोफोबिया

मनोवैज्ञानिक फोबोफोबिया (फोबिया होने का भय) सहित 400 अधिक विशिष्ट भयों की पहचान की है। फोबिया हमारे जीवन में किसी भी समय, टीनएज से लेकर वयस्क होने तक कभी भी शुरू हो सकते हैं। लेकिन चरम फोबिया आमतौर पर बचपन में शुरू होते हैं।
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रोमांटिक प्रेम होता है ओसीडी जैसा

रोमांटिक प्रेम जुनूनी ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के निदान के साथ बायोकेमिकली अप्रभेद्य होता है। प्यार में लोगों के  दिमाग में एक रासायनिक प्रोफ़ाइल होता है, ठीक उसी प्रकार से जिस प्रकार ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों में होता है।
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डीएनए और यादें

हाल के शोध के अनुसार फोबिया यादों से डीएनए के माध्यम से पीढ़ियों में जा सकता है। क्योंकि यादें आनुवंशिक स्विच के माध्यम से अगली पीढ़ियों में जा सकती हैं। जिनके परिणाम के रूप में बच्चों को उनके पूर्वजों के अनुभवों विरासत में मिल सकते हैं।
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ट्रूमैन सिंड्रोम

ट्रूमैन सिंड्रोम (Truman Syndrome) एक भव्य भ्रम होता है, जिसमें रोगियों का मानना होता है कि वे एक रियलिटी टीवी शो में रह रहे हैं। ट्रूमैन सिंड्रोम टर्म 1998 फिल्म ट्रूमैन शो के बाद वजूद में आयी।
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अस्तित्वहीन होने की भावना

एक ऐसा असामान्य मानसिक विकार होता है, जहां लोगों को लगता है कि वे मर चुके हैं, डीकम्पोज़िंग हैं या फिर अस्तित्वहीन हैं। हालांकि ये मानसिक विकार काफी दुर्लभ होता है।
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अवचेतन फैंसले

हमारे ज्यादातर फैंसले अवचेतन होते हैं। हम ये विश्वास करना चाहते हैं कि हमारे द्वारा लिये गये आधिकांश फैंसले सावधानीसे, नियंत्रित व नियोजितकर तरीके से लिये गये हैं। लेकिन अनुसंधानों से पता चलता है कि हमारी रोजमर्रा की जरूरतें और विकल्प वास्तव में अवचेतन होते हैं।
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